कई बार और कई जगह चुनाव के दौरान आपने फर्जी मतदान या फिर फर्जी वोटर आईडी कार्ड की खबरें पढ़ी और सुनी
होंगी। इसी के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने लागू किया चुनाव कानून (संशोधन) विधेयक 2021, जिसके जरिए अब
आधार कार्ड से लिंक करा सकेंगे वोटर कार्ड, ताकि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में स्थापित भारत की प्राण-प्रतिष्ठा
अब दुनिया के सबसे मजबूत लोकतांत्रिक देश के रूप में और सशक्त हो…
आम चुनाव हों, विधानसभा हो या फिर पंचायत चुनाव हों, इनके लिए एक ही वोटर लिस्ट काम में आए। इसके लिए हमें
सबसे पहले रास्ता बनाना होगा। आज हर एक के लिए अलग-अलग वोटर लिस्ट है, हम क्यों खर्चा कर रहे हैं, समय क्यों
बर्बाद कर रहे हैं। अब हर एक के लिए 18 साल की आयु सीमा तय है। पहले तो उम्र में फर्क था, इसलिए थोड़ा अलग रहा,
अब इसकी कोई जरूरत नहीं है। ”
बीते वर्ष संविधान दिवस के अवसर पर पीठासीन अधिकारियों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहे गए प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के यह शब्द भारत में चुनाव सुधार की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत ही थे। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए इस बार
शीत सत्र में संसद के दोनों सदनों ने चुनाव कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 को मंजूरी दे दी है। इसमें सबसे अहम है आधार
नंबर से वोटर आईडी कार्ड को लिंक कराने का विकल्प। हालांकि यह स्वैच्छिक है। लेकिन भारत जैसे विशाल देश में भविष्य
में होने वाले चुनावों में यह अहम हो सकता है। इससे न केवल फर्जी कार्डों पर रोक लग सकेगी, बल्कि फर्जी मतदान भी
समाप्त हो जाएगा। इसके अलावा फर्जी वोटर आईडी के जरिये कई तरह की गैर-कानूनी गतिविधयों को भी अंजाम दिया
जाता है। फर्जी वोटर आईडी की मदद से आज धड़ल्ले से मोबाइल कनेक्शन लिए जा रहे हैं और राशन कार्ड भी बनवाए जा
रहे हैं। साथ ही कई तरह की अन्य सरकारी सुविधाएं भी ली जा रही हैं। इससे चुनावों में धांधली की गुंजाइश कम होगी।
चुनाव सुधार के नजरिये से इस विधेयक को बहुत ही अहम माना जा रहा है, क्योंकि वर्तमान में आप केवल वर्ष में एक बार
मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा सकते हैं। लेकिन नियम के बाद आपको साल में 4 बार इसका मौका मिलेगा। n
यह हैं अहम बदलाव
n•आईडी को आधार से जोड़ा जाएगा, ये स्वैच्छिक है, अनिवार्य नहीं। लोगों को अब साल में चार बार मतदाता सूची में
अपना नाम जुड़वाने के मौके मिलेंगे। 1 जनवरी (जो पहले से है), 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर।
nजेंडर न्यूट्रल शब्द को लेकर किया गया बदलाव, संशोधन में जब ‘वाइफ’ यानी पत्नी के जगह ‘स्पाउस’ शब्द का इस्तेमाल
होगा। महिला सैनिकों के पतियों को भी सर्विस वोटर का दर्जा।
nचुनाव आयोग चुनाव संचालन के लिए किसी भी परिसर का इस्तेमाल मतगणना, मतदान मशीनों और मतदान संबंधी
सामग्री को रखने और सुरक्षा बलों और कर्मियों के आवास के रूप में कर सकेगा।
वोटर आईडी को आधार से लिंक करने के फायदे
फर्जी वोटिंग को रोकने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य विभिन्न स्थानों पर एक ही व्यक्ति के एकाधिक नामांकन रुकेगी।
चुनाव डेटाबेस को मजबूती मिलेगी। प्रवासी मतदाताओं को कही से भी वोट करने में मदद मिलेगी।
भ्रम में न आएं
nस्वैच्छिक लिंकिंग: आधार और चुनाव डेटाबेस के बीच प्रस्तावित लिंकेज स्वैच्छिक है, अनिवार्य नहीं। लेकिन फर्जीवाड़ा
रोकने में अहम कदम।
nमताधिकार से वंचित होने का कोई जोखिम नहीं: मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिये किए गए किसी भी आवेदन
को अस्वीकार नहीं किया जाएगा और किसी व्यक्ति द्वारा आधार संख्या प्रस्तुत करने या सूचित करने में असमर्थता की स्थिति
में मतदाता सूची से कोई भी नाम नहीं हटाया जाएगा।






