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व्यतिरेक : अति महान शख्स परमपूज्य दाऊद जी!

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मीना राजपूत 

दाऊद इब्राहिम जी ने ने 80 औऱ 90 के दशक में विश्व के स्मगलिंग, नारकोटिक्स, हथियार आपूर्ति, अवैध वसूली मनीलॉन्ड्रिंग के क्षेत्र में भारत का नाम ऊंचा किया। 

इनके अंतराष्ट्रीय कारोबार में 23 हजार से ज्यादा एम्प्लोयी कार्यरत थे। उन्होंने सैकड़ों शार्प शूटर, स्मगलर,  मवाली, फ्रॉडियों और गुंडों को सीधे रोजगार दिया था। 

      वे अनस्किल्ड यूथ की सीधी भर्ती करके, कम्पनी के खर्चे पर उसका सम्पूर्ण प्रशिक्षण करवाते थे। नेतृत्व को बढ़ावा देने की उनकी प्रवृत्ति से, अंडरवर्ल्ड में कई नए चेहरों को जीवन में बड़ा मकाम, गर्लफ्रेंड और धन मिला।

परन्तु सीधे रोजगार से ही उनके योगदान का असल मूल्यांकन सम्भव नही। 

      अगर कोई दो टके का एक्टर, उनके ऊपर बनी फिल्मों में स्मगलर बनकर, दस बीस करोड़ कमा ले, तो उसे रोजगार कहेंगे कि नही कहेंगे??? 

तो उनके कारण बहुत अप्रत्यक्ष रोजगार भी बने। जिसमें  हीरो, हीरोइन, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, सिंगर, म्यूजिक कम्पनी, सिनेमा हॉल वालों, उसके सामने टिकट ब्लैक करने वालो, डुप्लीकेट सीडी बनाकर बेचने वालों, और कैंटीन में पकौड़ा बेचने वालों  को बड़ी भारी मात्रा में रोजगार मिला। 

उन्होंने खुद भी फिल्में, नेता और पत्रकारों को फाइनांस किया। 

     उनके द्वारा अंडरवर्ल्ड सोशल रिस्पांसिलिटी के तहत बहुत से नेताओं, पुलिसवालों, वकीलों को चन्दा दिया गया। इससे लोकतन्त्र को मजबूती मिली। 

श्री दाऊद जी इब्राहीम ने दुबई, कराची, लन्दन, नैरोबी, सिंगापुर वगैरह में नारकोटिक्स के बिजनेस में धूम मचा दी थी। उनके द्वारा सप्लाई की गई कोकीन की गुणवत्ता विश्व मे सर्वोत्तम मानी गयी थी ।

     एक भारतीय नागरिक, तमाम विदेशी स्मगलरों को पछाड़ कर, विश्व मे स्मगलिंग का सिरमौर बना। 

     मगर विदेशी इटालियन माफिया, माइकेल कारलियोनि उर्फ गॉडफादर के वामपंथी चमचे, एक परिश्रमी, ईमानदार भारतीय स्मगलर पर कीचड़ उछालने से बाज नही आते। 

  यह गुलाम मानसिकता का प्रतीक है। 

वो भारत का व्यक्ति है। चाहे जो भी करे, बस दो पैसा कमा ले। कुछ रोजगार और हमारी पार्टी के नेताओं को चन्दा दे, तो उसकी प्रशंसा किया जाना सच्चे भारतीय का फर्ज है। यही सर्टिफाइड देशभक्ति है। 

नहीं तो तुम्हारे विलेज में दम है, तो तुम भी दाऊद बनके दिखा दो। 

        देशभक्ति की ये टुच्ची परिभाषा, अमृतकाल में नई नई बनी है।  काश, 80 के दशक में सोशल मीडिया होता, तो राष्ट्रवादी भक्त समाज दाऊद जी के पक्ष जोरदार अभियान चलाता, 

इससे उन्हें एटलीस्ट पद्मश्री तो मिल ही जाती। मगर मिली नही। दाऊद जी के साथ हुए अन्याय के प्रतिकार के लिए, देश प्रेम के गर्व से भरी कृपया इस पोस्ट को इतना शेयर करें, कि हर भारतीय तक पहुँच जाये। 

       हाँ, जिन्हें दाऊद जी के धर्म से दिक्कत हो, वह पोस्ट में हर जगह “छुटका जी राजन” का नाम घुसेड़कर, उसे पद्मश्री दिलाने को रीपोस्ट कर सकते हैं।

Ramswaroop Mantri

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