शशिकांत गुप्ते
आज अचानक इंग्लिश भाषा की निम्न सूक्ति स्मरण हुआ।
When literate people will become educated then only we can think about revolution or change.
इस सूक्ति का हिंदी में अनुवाद होता है, जब पढ़े लिखे लोग शिक्षित हो जाएंगे तब हम क्रांति या परिवर्तन के लिए सोच सकते हैं।
उक्त सूक्ति में जो क्रांति और परिवर्तन कहा गया है,उसका तात्पर्य है, समाज में व्याप्त कुरीतियों,अंधश्रद्धा उन्मूलन,
कर वैचारिक क्रांति करना।
वर्तमान में उक्त महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीरता से व्यापक स्तर पर विचार करना अनिवार्य है।
इनदिनों सिर्फ पढ़े लिखे लोग स्वयं को भ्रम से शिक्षित समझ रहें हैं।
इसी भ्रम में लीन लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ना सिर्फ दुरुपयोग कर रहें हैं बल्कि अपनी अपरिपक्व मानसिकता को भी प्रमाणित कर रहे हैं।
ऐसे भ्रमित लोग दूसरों की आलोचना करते समय अमर्यादित भाषा का उपयोग करते हैं।
हाल ही में किसी व्यक्ति में अपनी अपरिपक्वतापूर्ण और घृणित मानसिकता को प्रमाणित करते हुए महात्मा गांधी की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल पैदा किया?
इनदिनों ऐसे ही लोगों की फेहरिस्त बहुत लंबी होती जा रही है,जो उलजुलुल वक्तव्य दे कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मखौल उड़ाते हुए सिर्फ सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करना चाहते हैं।
ऐसे नादान नासमझ लोगों के वक्तव्यों को ignore करना चाहिए मतलब नज़रअंदाज करना चाहिए। ऐसे लोगों के वक्तव्यों को तवज्जोह देना मतलब अंधों के आगे रोना और अपनी आंखें खोना
कारण इनदिनों ऐसे उलजुलूल वक्तव्यों को प्रश्रय देने के लिए कुछ कथित समाचार माध्यम भी सक्रिय है। साथ ही व्हाटसेप छद्म विश्वविद्यालय भी बहुत सक्रिय है।
जिन लोगों के बगैर परिश्रम के उपलब्धि मिल जाती है,उन्हे इस उपलब्धि का महत्व कभी भी समझ में नहीं आता है।
स्वतंत्रता आंदोलन में शहादत देने वाले और आंदोलन में सक्रिय भूमिका का निर्वाह करने वालो के ही अथक परिश्रम से हमे आजादी मिली है।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





