राजकुमार दांतारे
भारत, पाकिस्तान, चीन, जापान! इन चारो देशों ने 1945 से 1949 के दरमियान स्वतंत्र रूप से अपना सफर शुरू किया!
पाकिस्तान ने धर्म चुना और जन्म से लेकर आज तक सिर्फ भीख ही मांग रहा है, क्योंकि मदरसे सुई तक बनाना नही सिखाते! जब तक कुछ बनाओगे नहीं तब तक बेचोगे क्या? और जब तक कुछ बेचोगे नहीं तब तक मुनाफा कहाँ से कमाओगे ? सीधी सी बात है, भीख ही मांगनी पड़ेगी!
भारत ने धर्म और विज्ञान की मिश्रित व्यवस्था चुनी ! पाकिस्तान से कुछ हद तक बेहतर! इसलिए विकास करते हुए सिर्फ विकासशील ही बना रहा, लेकिन पाकिस्तानी सरकार के विपक्ष के लिए कहने वास्ते (देखो भारत कितनी तरक्की कर रहा है) एक उदाहरण भी !
चीन का सफर शुरू तो हमारे साथ ही हुआ लेकिन शुरूवात नेहरू के भारत जैसी अच्छी नहीं रही, क्योंकि दुर्भाग्यवश उसे मोदी जैसा शासक माओत्से तुंग मिला जिसकी नीतियों ने यह हालत कर दी कि एक बार तो वहाँ की जनता को पेट भरने के लिए पेड़ों के पत्ते और मिट्टी तक खानी पड़ी! लिहाजा बीमारियां फैलीं, और कई जानें चलीं गईं! अब वक्त था भयंकर गुस्से का, वह उभरा भी……. उभरा और माओ को कान पकड़कर कुर्सी से नीचे उतार दिया! लेकिन इस सब मे 22 साल बर्बाद हो गए! फिर आया चीन की असली नीव रखने वाला डेन जियाओ ! खराब शुरुआत के दौरान भी सिर्फ एक बात अच्छी यह रही, कि चीन धर्म की चपेट में नहीं था! इसीलिए भारत से 22 साल बाद शुरुआत करने के बाद भी वह आज हमसे 50 साल आगे निकल गया!
जापान में धर्म को लोग उतना ही जानते हैं जितना मैक ग्राथ और व्यंकटेश प्रसाद बल्लेबाजी के बारे में जानते थे! यही कारण है कि हमारे साथ चला जापान हमसे सौ साल आगे निकल गया! हम जापान की चकाचौंध से हतप्रभ रहते हैं, लेकिन कभी यह नहीं सोचते कि वह चकाचौंध धार्मिक ज्ञान से नहीं बल्कि तकनीकी ज्ञान से निर्मित हुई है! हम उसकी रईशी की तारीफ तो करते हैं लेकिन अपनी दुर्गति के कारण नहीं खोजते ! और अभी भी धर्म – पंथ के उस दलदल में आकंठ डूबे हैं, जिससे जापान ने हमेशा ही दूरी बनाकर रखी! जब जापान के लोग बुलेट ट्रेन की पटरियां बिछा रहे थे तब हम राम रथ यात्रा के पथ पर मदमस्त थे! जब जापानी, औद्योगिक आविष्कार कर अकूत पैसा बना रहे थे तब हम धार्मिक दंगों में पागल होकर एक दूसरे को मारने काटने में ऊर्जा लगा रहे थे! और आज ? हम आज भी वही कर रहे हैं! दिल्ली, करौली, खरगौन…………..
आखिर क्या हक है तुम्हें पिछली सरकारों से यह पूछने का कि उन्होंने गरीबी खत्म क्यों नहीं की? तथा बीस साल बाद भी तुम्हे कोई हक नहीं होगा मोदी से यह पूछने का कि उसने भारत की गरीबी और ज्यादा क्यों बढ़ा दी?
हम आज भी वही कर रहे हैं! दिल्ली, करौली, खरगौन………….





