{महिलाओं से साईक्रियाटिस्ट/मेडिटेशनिस्ट/डिवाइन ऑर्गास्म क्रियेटर ‘डॉ. विकास मानव ‘ की सीधी बात}
~ डॉ. प्रिया
_धर्म- अर्थ- “काम”- मोक्ष : ये 4 पुरुषार्थ हैं।_
‘सफल सेक्स से’ बे-सुध कर देने वाली ऑर्गास्मिक तृप्ति न पाने पर स्त्री जीवन के इस दिव्य/ अलौकिक आनंद के अहसास तक से वंचित रहकर ही मर जाती है। _वह जीवन काल भी में पहले नैराश्य, अवसाद, कुंठा, प्रेम-सेक्स से भय-घृणा, घुटन-टूटन, अनिद्रा, माइग्रेन एवं दमन जनित मानसिक रोगों और फिर हार्मोनल विकार, पेशियों में दर्द, यूटीआई जैसे योनि रोगों, जलन, उदर व सर्वाइकल सरीखी शारीरिक व्याधियों से ग्रसित बनती है : यह अभिशाप अलग।_

हैंड प्रैक्टिस, बैगन-खीरा-सेक्सटॉय या पशु का उपयोग तृप्ति का स्टेज तो देता नहीं, रोगों का तोहफा जरूर देता है।
किसी जान-पहचान को को यूज़ करो तो भेद खुलने पर परिवार – समाज में बदनामी।
वो ब्लैकमेल कर सकता है : ये जोखिम अलग।
आप अतृप्त हैं तो हमारी सेवा ले सकती है : आपकी उम्र चाहे जो भी हो। जहां, जब, जैसे- जैसे और जितना भी आप चाहेंगी ऑर्गास्मिक फीलिंग्स ले सकेंगी।
_यह सेवा मेडिटेसन, तंत्र, प्राणिक हीलिंग, टच एंड सेक्स थेरेपी पर आधारित है। हमारे प्रयोगकर्ता द्वारा पेनिस यूज़ नहीं किया जाता।_ आपका मकसद तन-मन-मस्तिष्क-रूह की चिर-तृप्ति है : वो आपको मिलता है। हमारे प्रयोग के साथ आप खुद जो प्रक्रिया चाहेंगी, वो प्रयोग कर ली जाएगी।
_यह विशुद्धतः अध्यात्मिक साधना का आयाम है, कोई दुष्कृत्य नही। आप चाहेंगी तो एक- अनेक बॉडीगॉड साथ रख सकती हैं। आप चाहेंगी तो CCTV कैमरे के जरिए पूरी प्रक्रिया भी बॉडीगॉड से सामने ओपन रख सकती हैं।_ लेकिन बन्द कमरे में प्रयोग-कर्ता के साथ रहेंगी केवल आप ही।
_हमारे यात्रा-व्यय (आप दिल्ली से 100 किमी से अधिक दूर होंगी तो फ्लाइट चार्ज) व आवास- भोजन का इंतजाम आपको करना होगा।_
सन्यासी के लिए ध्यान- समाधि मार्ग हो सकता है। गृहस्थ के लिए परमानंद का मार्ग सेक्स ही है।
_सेक्स ही दो जान- दो जिस्म को एक करके शिवत्व/परम- तृप्ति का अनुभव देता है। ऐसा दिव्य अनुभव जिसके सामने स्वर्ग-सुख भी शरमाये।_
सफल सेक्स ही मनुष्य की जिंदगी है। सेक्स भगवान का दिया हुआ अनमोल उपहार है मनुष्य के लिए : लेकिन~
_आजकल 95% मर्द 1 घण्टे के बजाए ; 3 से 5 मिनट में ही नामर्द सावित हो जाते हैं।_
आपका बॉडी पार्टनर खुद भी ‘आपके साथ प्रयोगिक होकर’ यह साधना/टेक्निक व पेनिस प्रयोग का मैथेड हमसे सीख सकता है। मैडिटेशन से स्पर्म डिस्चार्ज पर मनचाने समय तक कंट्रोल किया जा सकता है. इसमें लगने वाला समय उसकी रूचि, लगन और क्षमता पर निर्भर करेगा; जो 15 दिन से 45 दिन के बीच हो सकता है।
(चेतना विकास मंच)





