अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

हमें मोदी जैसे किसानविरोधी नहीं,अपितु चरण सिंह जैसे किसानों का हमदर्द प्रधानमंत्री चाहिए

Share

( चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन 23 दिसंबर के सुअवसर पर विशेष )

CS at Boat Club Kisan Rally 10 | Charan Singh

निर्मल कुमार शर्मा

        पिछले दिनों इस देश के अन्नदाताओं को दिल्ली के वर्त
मान क्रूर,असहिष्णु ,बदमिजाज, अमानवीय,फॉसिस्ट,तानाशाही प्रवत्ति के निजाम के जबरन रोकने की वजह से दिल्ली में प्रवेश कर अपनी न्यायोचित्त माँग के लिए दिल्ली में लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अपनी बात कहने के लिए जंतर-मंतर या वोटक्लब पर आकर अपनी व्यथा सुनाने केे अधिकार को कुँद करके जबरन पिछले दिनों पूरे 378 दिन तक चले किसानों के आंदोलन,जो से 26 नवम्बर 2020 से इस साल 10दिसम्बर 2021 तक चला ! पिछले साल दिसम्बर-जनवरी की इस हाड़ कँपा देनेवाली ठंड और इस ठंड के मौसम में भयंकर बारिश में भी तमाम पाशविक तरीकों से जबरन रोक देने से इस देश का अन्नदाता खुली सड़क और खुले आसमान के नीचे अन्नदाता होकर भी याजक की मुद्रा में असहाय पड़ा हुआ था ! इस भयावह मौसम में इतने दिनों तक इसी स्थिति में पड़े रहने की वजह से मौसम के क्रूर पंजों ने कुल 750 अन्नदाता मौत के मुँह में चले गये ! अपवाद स्वरूप दो-चार अन्नदाताओं ने इस क्रूरताभरे कुव्यवस्था की वजह की वजह से मानसिक तनाव व अवसाद में जाने की वजह से खुद को अपनी रिवॉल्वर से गोली भी मार लिए या सल्फास की गोली भी खा लिए या खुद ही चुपचाप छिपकर फाँसी लगाकर भी मौत के मुँह में चले गए। इस विकट स्थिति के लिए जिम्मेदार वर्तमान समय के इस कथित लोकतांत्रिक व्यवस्था का सर्वेसर्वा प्रधानमंत्री मोदी के इसी देश के अन्नदाताओं के प्रति इतनी असहिष्णुता,बर्बरता और वहशीपना भरे कुकृत्यों से इस देश के हर व्यक्ति को आजीवन किसानों, मजदूरों व आमजनहितैषी तथा किसानों के मसीहा कहे जाने वाले वाले प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की बरबस याद आ जाती है।



     भारतीय अन्नदाताओं के हक,अधिकार और उनके जीवन की बेहतरी के लिए आजीवन संघर्ष करनेवाला यह अथक योद्घा और सेनापति 23 दिसम्बर 1902 में मेरठ जिले के नूरपुर नामक एक छोटे से गाँव में एक शिक्षक और किसान के घर पैदा हुआ था,वर्ष 1923 में वे विज्ञान विषय से ग्रेजुएशन किए,बाद वे आगरा विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री लेकर गाजियाबाद में 1923 से ही वकालत करना शुरू कर दिए थे,उसके पश्चात 1925 में वे कला वर्ग से आगरा विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर लिए,1937 में वे मात्र 35 वर्ष की अवस्था में बागपत के छपरौली से विधायक चुन लिए गये,पहली बार  विधायक बनने के दौरान ही उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा में किसानों के हित और फायदे के लिए एक बिल पेशकर उसे पास भी करा लिए,जो किसानों द्वारा पैदा फसलों को एक निश्चित विक्रय मूल्य तय करती थी,यह बिल किसानों के लिए इतना हितकारी और संरक्षण करने वाली थी कि भारत के कई अन्य किसान-कल्याणकारी राज्य इस बिल की देखा-देखी अपने-अपने राज्यों में ठीक इसी तरह की बिल को लागू किए। विधायक बनने से काफी पूर्व में ही आजादी के दीवाने चौधरी चरण सिंह सन् 1930 में महात्मा गांधी के साथ नमक कानून तोड़ने के लिए युवा चरण सिंह दांडी यात्रा आंदोलन में शामिल हुए थे,गाँधीजी के दांडी के नमक सत्याग्रह से प्रभावित होकर वे गाजियाबाद में 1940 में स्थित हिंडन नदी पर अपने हजारों साथियों के साथ नमक बनाने का एक आंदोलन भी किए थे,जिससे कुपित होकर तत्कालीन ब्रिटिश सरकार उन्हें 6महीनों की जेल की सजा दे दी थी ! वर्ष 1941में जेल से छूटने के कुछ ही दिनों बाद वे एक गुप्त क्रांतिकारी संगठन बनाने में जुट गये,वर्ष 1942 में वे भूमिगत होकर गाजियाबाद,हापुड़,सरधना,मेरठ,मवाना और बुलन्दशहर जैसी जगहों पर दिन-रात घूम-घूमकर युवाओं को अपने गुप्त क्रांतिकारी संगठन के लिए उर्जा भरने का लगातार काम करने लगे,ब्रिटिश शासन चौधरी चरण सिंह के इस भूमिगत क्रियाकलापों से बहुत ही परेशान और विचलित होने लगी थी,चूँकि तत्कालीन ब्रिटिश सत्ता चौधरी चरण सिंह को पकड़ पाने में बहुत दिनों तक असफल रही,उनके प्रति अंग्रेजी सल्तनत में इतना गुस्सा बढ़ गया,कि इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तत्कालीन मेरठ जिला प्रशासन अपने पुलिसकर्मियों को चौधरी चरण सिंह को देखते ही गोली मार देने का आदेश तक भी दे रखा था ! परन्तु एक दिन गुप्त मिटिंग करते समय किसी भेदिया विभीषण से भेद पाकर ब्रिटिश सरकार के अधीन पुलिस ने चरण सिंह को गिरफ्तार करके पुनः डेढ़ साल के लिए जेल में डाल दिया,लेकिन चरण सिंह जेल में रहते हुए भी जेल से मुक्ति के लिए कथित वीर सावरकर जैसे कभी माफीनामा नहीं लिखे अपितु वे अपने समय का सदुपयोग करते हुए जेल में ही 'शिष्टाचार,भारतीय संस्कृति और समाज के शिष्टाचार के नियम 'नामक एक पुस्तक लिख डाले,यह पुस्तक अभी भी शिष्टाचार पर भारतीय समाज की एक अमूल्य धरोहर बनी हुई है !
           किसानों के लोकप्रिय नेता चरण सिंह ही थे,जो वर्ष 1952 में जमींदारी प्रथा के उन्मूलन का कानून बनवाने में सफल रहे,उसके बाद किसानों के हित को संरक्षित करने के लिए वर्ष 1954 में उत्तर प्रदेश में भूमि संरक्षण बिल को पारित करवा लिए,उत्तर प्रदेश के वर्ष 1967 में उनके मुख्यमंत्रित्व काल में ही देश भर में भयावह दंगे भड़क उठे लेकिन चौधरी चरण सिंह के कुशल,स्वच्छ व ईमानदार नेतृत्व और प्रशासन पर उनकी जबरदस्त पकड़ की बदौलत उत्तर प्रदेश दंगों से पूर्णतः अछूता ही रहा ! वे वर्ष 1979 में जब देश के वित्तमंत्री और उपप्रधानमंत्री दोनों पदों को कुशलतापूर्वक सम्भाले हुए थे,उस दौरान उन्होंने किसानों को आर्थिक सम्बल प्रदान करने के लिए नाबार्ड मतलब राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक की स्थापना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी,जो अभी भी भारतीय किसानों और कृषि के हित में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वे कहते थे कि 'जिस देश के लोग भ्रष्ट होंगे,वह देश कभी भी तरक्की नहीं कर सकता,चाहे उस समय देश का कोई भी नेता या प्रधानमंत्री हो ! ' चौधरी चरण सिंह हमेशा या यूँ कहें जीवनपर्यंत गाँव,गरीब और किसानों के उद्धारक और मसीहा बने रहे और अपना सम्पूर्ण जीवन ही किसानों को समर्पित कर दिया,वकालत जैसे पेशे में भी उनकी मिशाल दी जाती है कि वे ऐसे मुकदमों को ही स्वीकार करते थे और पैरवी करते थे,जिन मुवक्किलों का पक्ष न्यायपूर्ण होता था,वे जमीन से जुड़े जननेता थे,किसानों के सदा हित करने के उद्देश्य से वे हमेशा मंत्रीमंडल में कृषि विभाग को ही संभालते थे,वे स्वभाव से ही एक भारतीय किसान की तरह सादा रहन-सहन के हिमायती थे,गाँधीजी की सुनियोजित हत्या के बाद कांग्रेसी नेताओं ने भी आधुनिकता की दौड़ में गाँधी टोपी पहनना त्याग दिए थे,लेकिन चौधरी चरण सिंह मरते दम तक आजीवन गाँधी टोपी पनने वाले जननायक बने रहे ! वे अपने किसानहित सम्बन्धित अपने सद्कार्यों से किसानों में इतने लोकप्रिय थे कि वे अपने जीवन काल में एक भी चुनाव नहीं हारे,उन्होंने अपने सिद्धांत और अपने मर्यादित आचरण से कभी समझौता नहीं किया,वे एक अच्छे लेखक,कुशल वक्ता तथा आमजन,किसानों और मजदूरों के जबरदस्त हिमायती थे । 
        वे किसान नेता होते हुए भी उनकी अंग्रेजी भाषा पर बहुत ही जबरदस्त पकड़ थी उन्होंने अंग्रेजी भाषा में भी भारतीय समाज की तमाम विसंगतियों मसलन जमींदारी प्रथा, भारतीय किसानों की व्यथा और इस देश की गरीबी को केन्द्र में रखकर कई पुस्तकें उदाहरणार्थ अबॉलिशन ऑफ जमीदारी,लिजेंड प्रोपराइटर शिप और इंडियाज पॉवर्टी एण्ड इट्स सोल्यूशंस नामक पुस्तकें लिखे । चौधरी चरण सिंह हमेशा गरीबों और किसानों के हित की ही सोचते रहते थे,वे अपने भाषणों में अक्सर कहा करते थे कि 'बगैर किसानों की खुशहाली के इस देश का विकास ही संभव नहीं है ! 'वे बहुत ही दृढ़ता और स्पष्टता से कहते थे कि 'इस देश की समृद्धि का रास्ता गाँवों के खेतों और खलिहानों से होकर गुजरती है ' ,किसानों को उनकी फसलों का दाम न्यायोचित्त मिले,इसके लिए वे जीवन भर सतत संघर्षशील और प्रयत्नशील रहे,उनका कहना था कि 'भारत का संपूर्ण विकास तभी संभव हो पाएगा जब इस देश का किसान,मजदूर और गरीब आदि सभी लोग खुशहाल रहेंगे। ' विद्वतजनों का मानना है कि चौधरी चरण सिंह राजनैतिक गलतियाँ कर सकते हैं,लेकिन वे चारित्रिक गलती कभी नहीं कर सकते ! इसलिए चरण सिंह केवल एक नेता और एक वित्तमंत्री और एक भूतपूर्व उप प्रधानमंत्री या प्रधानमंत्री तक ही सीमित नहीं थे,अपितु श्रद्धेय स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह स्वयं में एक विचारधारा समाहित किए हुए थे। और अन्त में उक्तवर्णित इस देश के उस महान सपूत के ईमानदारी,पूर्ण निष्ठा और गरीबों, किसानों व मजदूरों के हितसंरक्षण के लिए सदैव आमजनहिताय नीतियों और कानूनों को बनाने वाले उस कालजयी सपूत के सद्कार्यों और वर्तमा समय में दिल्ली की सत्ता पर कुँडली मारकर बैठे सत्ता के कर्णधार की इस देश के अन्नदाताओं के प्रति किए जा रहे व्यवहार में तुलना करिए, जिसकी वजह से वर्तमानसमय में इस देश की आवाम,गरीबों,बेरोजगारों,मजदूरों और खुदकुशी करते-मरते इस देश के सैकड़ों अन्नदाताओं का जीवन घोर संकट में पड़ा हुआ है। हमारे 750 अन्नदाताओं की 378 दिन चले किसान आंदोलन में दुःखद मौत भी हो चुकी है,लेकिन इस आधुनिक निजाम के मुँह से उन शहीद हुए किसानों के बेसहारा बच्चों, विधवा बीबियों और वृद्ध मां-बाप के लिए अभी तक एक उफ् शब्द तक नहीं निकला है,न उसके एक रोम में सिहरन पैदा हुई है,न उसकी आंखों में एक भी बूँद आँसू के निकले हैं ! अब इस आधुनिक निजाम के असहिष्णु व मानवेत्तर व्यवहार के प्रति इस देश के स्वाभिमानी,लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्ध अरबों नागरिकों को गौर करनी चाहिए ! कि क्या ऐसे असहिष्णु व आमजनविरोधी व्यक्ति को भारतीय राष्ट्रराज्य का एक दिन भी प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का अधिकार है या नहीं ! इस बात पर अब गंभीरतापूर्वक चिंतन करनी ही चाहिए !

निर्मल कुमार शर्मा,गाजियाबाद,उ.प्र.,संपर्क -9910629632,

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें