
चंद्रशेखर शर्मा
क्या ही अद्भुत और कमाल मैच हुआ कल ! निरा अविश्वसनीय !
जैसा कल विराट कोहली ने निवेदन किया, आइए, कल के उस आनंद को हम आज भी विस्तारित रखें। सो आज मैं थोड़ी सी उसी मैच की कथा कहने की कोशिश करता हूँ। अनुमति दीजिये।
सबसे पहली बात तो यह कि चाहे युद्ध हो या खेल का मैदान, प्रेशर यानी दबाव अपना खास रोल प्ले करता ही है। यह प्रेशर किसी भी बात से हो सकता है और नतीजे में जो प्रेशर ओढ़ता है, वो ढीला पड़ जाता है अथवा उसके हाथ-पैर फूल जाते हैं और वो लड़ाई के पहले ही हथियार डाल देता है। उदाहरण के लिए याद कीजिए महाभारत को ! भगवान श्रीकृष्ण के साथ होने के बावजूद महान धनुर्धर अर्जुन ने युद्धारंभ के पूर्व ही अपना गांडीव (हथियार) छोड़ दिया था कि मुझे नहीं लड़ना ! सो प्रेशर किसी भी बात का हो सकता है। हालांकि बाद में भगवान श्रीकृष्ण ही अर्जुन को उपदेश करते हैं कि अर्जुन तुम क्षत्रिय हो और लड़ना तुम्हारा धर्म है। तुम अपने धर्म के पालन से कैसे इनकार कर सकते हो ? भगवान के उस उपदेश को हम दुनिया के महान ग्रंथ गीता या गीतोपदेश के रूप में खूब जानते हैं !
सो प्रेशर की महिमा इतनी अहम है कि क्रिकेट में भी इसे टेक्टिक के रूप में खूब आजमाया जाता है। वो कहते हैं न प्रेशर टेक्टिस ! ऑस्ट्रेलिया वाले इसमें खूब माहिर हैं। वो तो मुकाबला या खेल शुरू होने के पहले ही अपनी जुबान या बोलवचन के जरिए बहुत सोची-समझी रणनीति के तहत इस पर अमल शुरू कर देते हैं। ऊपर से अब तो खास इसीलिए यानी रणनीतियां बनाने के लिए हर टीम मोटी रकम चुकाकर विशेषज्ञों की सेवाएं लेती है। जमा यह तो सबसे बड़ा टूर्नामेंट है यानी विश्व कप ! जाहिर है सब टीमों के पास हर टीम का पूरा लेखा-जोखा, इतिहास और जाने क्या-क्या डेटा है, वीडियोज हैं और विश्लेषण हैं तथा उनका अध्ययन है। साथ ही हर मैदान को लेकर भी तमाम डिटेल जानकारी। कहने का मतलब यह कि हर मैच बहुत अध्ययन, विश्लेषण और सोच-विचार के बाद तैयार की गई रणनीति से खेला जाता है यानी एक-एक कदम पहले से सुविचारित होता है और वैसी ही सुविचारित प्रेशर टेक्टिस भी !
चलिए, कल के मैच में इसे देखते हैं। सबसे पहले याद दिला दूं कि यह एक तरह से इस विश्व कप का सबसे बड़ा मैच था। जी हां, भारत विरुद्ध पाकिस्तान। अंदेशा था कि कल मेलबर्न में बारिश हो सकती है और मैच रद्द करना पड़ सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यदि ऐसा होता तो आईसीसी को सिर्फ इस एक मैच के रद्द होने से 500 करोड़ रुपयों से भी ज्यादा का नुकसान होता ! गोया इस मैच के मैग्नीट्यूड का एक अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है। बहरहाल ऐसा नहीं हुआ और दोनों कप्तान रोहित शर्मा और बाबर आजम टॉस के लिए मैदान पर उतरे। भले टॉस का कोई नहीं बता सकता कि वो कब किसके पक्ष में गिरेगा लेकिन दोनों स्थिति में दोनों टीमों की रणनीति तैयार रहती है। यह भी कि टॉस होने के बाद कप्तान को क्या बोलना है ? सो टॉस हुआ और रोहित शर्मा ने उसे जीता और कहा कि वो पहले गेंदबाजी करेंगे। यानी पहले से तैयार रणनीति के तहत निर्णय। रवि शास्त्री ने कारण पूछा तो रोहित ने कहा कि विकेट पर घास है और वातावरण में नमी भी। तो उसका लाभ लेने के लिए पहले अपनी (कमजोर पक्ष मानी जा रही) गेंदबाजी को मददगार परिस्थिति में आजमाने का सटीक फैसला। जाहिर है वो सुविचारित विश्लेषण और रणनीति का फैसला था और बयान भी। अलबत्ता बहुत गौरतलब बयान बाबर आजम का था, जो कि टॉस हारे थे ! बोले तो प्रेशर टेक्टिस वाला बयान।
जी हां, रोहित के बाद जब रवि शास्त्री ने बाबर से बात की तो शास्त्री ने उनसे यह नहीं पूछा था कि वो (पाकिस्तान) इस विकेट पर कितने रन बनाना पसंद करेंगे या पर्याप्त मानेंगे, लेकिन चूंकि पहले से तय प्रेशर टेक्टिस के तहत उन्हें एक विशेष बात कहनी थी लिहाजा बिना पूछे भी वो बोले ! बोले कि वो यहां 160-170 रनों का स्कोर खड़ा करना चाहेंगे। आप देखिए कि बड़ी टीम के सामने यह टोटल लड़ने लायक तो माना जा सकता है, लेकिन किसी भी सूरत सेफ या विजयी टोटल नहीं। फिर भी बाबर ने इस टोटल को लक्ष्य बताया तो परोक्ष रूप से वो यही कहना-जताना चाह रहे थे कि एक तो मैदान बहुत बड़ा है और दूसरे भारत की बल्लेबाजी को कोई कितना ही ताकतवर माने पर हमारी दुनिया की सबसे मजबूत गेंदबाजी के सामने उसमें इतना दम-गुर्दा नहीं कि वो इतने रन बना पाए। दूसरी बात यह कि वो इस बयान से अपने बल्लेबाजों को भी आश्वस्त कर रहे थे कि टॉस हारना चिंता की बात नहीं है और न उन्हें 200, 190 या 180 रन बनाने की चिंता करना है। उलटे भारत पर दबाव है कि वो हमें 160-170 रन बनाने से रोके !
हकीकत यही है कि मेलबर्न के इस बहुत बड़े मैदान पर 160-170 रन भी 180-190 रन के बराबर होते हैं। जाहिर है वो बिना पूछे 160-170 रन बनाने की बात बोले तो साफ था कि वो खुद से और अपने बाकी बल्लेबाजों से टॉस हारने और पहले बल्लेबाजी कर बड़ा टारगेट सेट करने के दबाव को दूर कर रहे थे तथा उसी के साथ टीम इंडिया यानी भारत पर दबाव डाल रहे थे कि दम हो तो हमें इससे भी कम पर रोककर दिखाओ !
बहरहाल टीम इंडिया ने कल अर्शदीप को इस वर्ल्ड कप के और उनके भी वर्ल्ड कप के पहले व सबसे कांटा व सबसे बड़े मैच में खेलाने का जो फैसला किया, वो सबसे आला और शानदार फैसला था। मालूम हो कि पाकिस्तान के खिलाफ पिछले मैच में अर्शदीप ने अहम मौके पर एक आसान कैच टपका दिया था, जिससे टीम हार गई थी। बाद में लोगों ने सोशल मीडिया पर अर्शदीप को जाने क्या-क्या वाही-तबाही बकी थी। जाहिर है उन्हीं अर्शदीप को फिर पाकिस्तान के खिलाफ खेलाने का यह फैसला बेशक दलेर फैसला तो था ही, साथ ही एक मनोवैज्ञानिक निर्णय भी था। सो यह कि कैच टपकाने और उस वाही-तबाही के बाद अर्शदीप अपमान से खूब भरे हुए थे। फिर वो एक दलेर कौम (सिख) से आते हैं तो हर दलेर बंदा अपने अपमान का हिसाब चुकता करने को बहुत उतावला होता है, शिद्दत से मौके की तलाश में होता है और शूरवीर पृथ्वीराज चौहान की तरह उसे चूकता नहीं ! जमा अर्शदीप में पृथ्वीराज की ही तरह विशेष टेलेंट भी। तभी तो महज 22-23 की उम्र में वो देश की टीम में है। एक सिख गुरु तो बाज से चिड़िया लड़ाने की बात करते थे। सो कुल मिलाकर कल उनको खेलाने का फैसला ऐन दुरुस्त और उम्दा था। आप नतीजा देखिए कि उस भरे हुए अर्शदीप ने इस बेहद बड़े मैच और वर्ल्ड कप के अपने पहले ही मैच में, अपनी पहली ही गेंद पर पाकिस्तान के कप्तान और बाज खिलाड़ी जैसे बाबर आजम के तोते उड़ा दिए। यही नहीं, अर्शदीप ने उसके बाद जल्द ही पाकिस्तान के दूसरे सूरमा और बाज रिजवान के भी पर कतर दिखाए और भारत के लिए मिनटों में मैच बना दिया ! अब जीत के बाद पूरी दुनिया भले विराट-विराट भज रही है पर अर्शदीप का कल का पराक्रम भी बेशक उसी जोड़ का रहा। वो तो फील्डिंग में दुनिया के सबसे ढीले खिलाड़ी आर. अश्विन की बदौलत पाकिस्तान 159 तक पहुंच भी सका अन्यथा कल उससे डेढ़ सौ भी नहीं बनते। मैंने पहले भी कहा है और फिर दोहराता हूँ कि अश्विन की इस टीम में किसी सूरत जगह नहीं बनती। कारण यह कि वो सिर्फ फील्डिंग में ही मुर्दे नहीं हैं, बल्कि गेंदबाजी में भी खूब कुटेले हो गए हैं। हां, सातवें-आठवें नम्बर पर बल्लेबाजी में थोड़ी मदद की उनसे अपेक्षा की जाती है और वो सक्षम बल्लेबाज हैं भी, लेकिन ध्यान रहे सिर्फ टेस्ट या वनडे में। हां, टी 20 में वो तीसरे-चौथे नम्बर पर पिंच हिटर के तौर पर ज्यादा उपयोगी साबित हो सकते हैं, लेकिन सातवें-आठवें नम्बर पर वो किसी काम के नहीं। सिवाय भर्ती के ! कोई कह सकता है कि कल उन्हीं ने चतुराई से पहले नवाज की एक गेंद को वाइड करवाया और बाद में आखरी गेंद पर विजयी शॉट (सिर्फ एक रन के लिए) लगाया। जरूर यह सही बात है। अलबत्ता उसके पहले टीम के फिनिशर दिनेश कार्तिक पर मैच फिनिश करने की जिम्मेदारी थी, पर वो नहीं कर पाए और हड़बड़ी में बहुत गंदे तरीके से आउट भी हुए।
असल में फिनिशर की भूमिका में एमएस धोनी बेजोड़ थे। चाहे कितना ही दबाव-तनाव हो, वो हमेशा शांत दिमाग होते थे और उन्हें अपनी मजबूत भुजाओं पर अटूट भरोसा था। उनकी उन भुजाओं की पूरी क्रिकेट बिरादरी में एक अलग ही धाक थी और वो खुद कहते थे कि ऐसी परिस्थितियों में उनके बजाय उनके सामने आने वाले गेंदबाज के हाथ-पांव फूले होते थे और वो गलती करता था, जिसकी मैं ताक में रहता था और उसका फायदा उठाता था। इधर, मुझे लगता है कि दिनेश कार्तिक हैं तो बढ़िया फिनिशर लेकिन वो इस दबाव को खुद पर ओढ़ लेते हैं कि मेरे बाद कौन ? आर. अश्विन यानी ढैया ढूंस ! हां, अक्षर पटेल से आसरा रहता है, लेकिन कल तो वो पहले ही खेत रहे थे। सो कुलजमा कहने का मतलब यह कि फिनिशर बतौर कार्तिक को उनके बाद आने वाले बल्लेबाज से भी थोड़ा आसरा दरकार होता है, जो अश्विन की सूरत में वो कतई नहीं पाते। रही गेंदबाजी की बात तो कल हमने छह गेंदबाज खेलाए थे और पाया कि अक्षर से सिर्फ एक ओवर ही डलवाया गया, क्योंकि वो उसमें खूब पिट गए थे। किसी दिन यह हम अश्विन के साथ भी होता देखेंगे। लिहाजा हम यदि छह गेंदबाज की और उसमें से किसी से सिर्फ एक ओवर करवाने की लक्जरी अफोर्ड कर सकते हैं तो उस सूरत में अश्विन या अक्षर की जगह राहुल तेवतिया ज्यादा ठीक चयन नहीं होते ? तेवतिया एक तो बाएं हाथ के हैं और साथ में फोड़ू बल्लेबाज भी। जो हो। अब शायद कुछ नहीं हो सकता। खैर।
बात यह हो रही थी कि जब बाबर आजम ने वो प्रेशर टेक्टिस वाला और हूल वाला बयान दिया तो वो अर्शदीप थे, जिन्होंने खुद बाबर और उनके दूसरे सूरमा रिजवान को जल्दी रवाना कर उसका ऐन माकूल जवाब दिया ! अब बात विराट कोहली की। हकीकतन पिछले टी 20 वर्ल्ड कप से विराट के साथ जो हादसे होना शुरू हुए थे, उसकी रौ में मेरा आकलन था कि या विराट अब टी 20 टीम का हिस्सा नहीं होंगे या उनका बल्लेबाजी क्रम (तीन नम्बर) उनसे ले लिया जाएगा। इसके बाद उन्होंने खुद भी बतौर सलामी बल्लेबाज खेलने के मंसूबे व्यक्त किए। जो हो। कुल मिलाकर मेरा आकलन फेल साबित हुआ और मुझे खुशी है कि ऐसा हुआ। जी हां, आप देख लीजिए, वो टी 20 की वर्ल्ड कप टीम में भी हैं और अपने उसी बल्लेबाजी क्रम पर भी ! फिर कल की उनकी इस पारी का क्या ही बखान किया जाए। पूरी दुनिया में कल की उनकी इस अविश्वसनीय पारी की सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ धूम है। हर तरफ किंग कोहली का शोर है। इस पारी को खुद विराट ने अपनी सबसे उम्दा पारी माना है और रोहित शर्मा ने तो कल उन्हें अपने कांधे पर लादकर अपनी खुशी जाहिर की। यों खुशी का तो कहना ही क्या ! भारत में तो खैर उस पारी और जीत से लोगों को अपार हर्ष हुआ ही, साथ ही अफगानिस्तान और जाने कहाँ-कहां इस खुशी के ज्वार-भाटे ने लोगों को आनंद से सराबोर किया। बता दूं कि ऑस्ट्रेलिया के मैदान महान सचिन तेंदुलकर की तरह किंग कोहली को भी खूब रास आते हैं। सो यदि किंग ने लय पकड़ ली है तो कोई अचरज नहीं कि आगे टीम इंडिया वर्ल्ड कप ट्रॉफी पकड़ती भी मिले !
अंतिम बात। कल मैच शुरू होने के पहले मैंने एक पोस्ट में रामचरित मानस की दो चौपाइयां लिखकर टीम इंडिया की विजय की कामना की थी। बाद में मैच देखते हुए कई बार लगा कि अपनी कामना आज शायद फलीभूत नहीं होगी, लेकिन विधाता यानी ऊपरवाले ने कुछ और ही सोचा हुआ था। बड़ी बात यह कि जीत के बाद नाबाद कोहली जब वापस लौट रहे थे तो पता नहीं किसकी बात के जवाब में उन्होंने आसमान की तरफ अंगुली उठाकर इशारा किया। हां, बाद में जब जतिन सप्रू और इरफान पठान ने उनसे कुछ सवाल पूछे तो उन्होंने कहा कि मुझे खुद सूझ नहीं पड़ रहा कि कैसे मैं यह सब कर पाया और फिर कहा कि सब ऊपरवाले की मर्जी से हुआ ! क्या यह कल की मेरी वो चौपाइयों वाली पोस्ट का प्रभाव था या कोई टेलीपैथी कि किंग कोहली ने भी सारा श्रेय ऊपरवाले के यहां जमा किया ? प्रभु श्रीराम ही जाने ! बहरहाल आप सबकी दीपावली में खूब आनंद हो !
●चंद्रशेखर शर्मा।






