अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

भव‍िष्‍य क्‍या उम्‍मीदें जगाता है भारत

Share

भारत आज एक आजाद देश के रूप में 76 साल पूरे कर रहा है। इस मौके पर अगर देश की अब तक की उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं का जायजा लेना हो तो उसका एक अच्छा तरीका यह हो सकता है कि दूसरों की नजर से खुद को देखा जाए। यानी दुनिया के अन्य देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थान हमें किस रूप में देखते हैं, अगले कुछ वर्षों में उनकी हमसे क्या अपेक्षा है। मार्के की बात है कि आज अंतरराष्ट्रीय हलकों में इस बात पर लगभग सर्वसम्मति है कि डगमगाई हुई ग्लोबल इकॉनमी में भारत एक ब्राइट स्पॉट बना हुआ है। भारत का ग्रोथ इंजन आज पूरी दुनिया के लिए उम्मीद का आधार है। यह कोरोना और फिर यूक्रेन युद्ध से उपजे तात्कालिक हालात के कारण कुछ समय के लिए बना परिदृश्य नहीं है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले कई वर्षों तक इंडियन इकॉनमी की गाड़ी काफी तेजी से आगे बढ़ सकती है। पिछले करीब दस वर्षों की बात करें तो भारत 11वें नंबर की इकॉनमी से पांचवें नंबर की अर्थव्यवस्था तो बन ही चुका है। आगे इसकी रफ्तार और तेज होगी।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि साल 2030 तक भारत की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 10 फीसदी सालाना रहेगी। इससे वित्त वर्ष 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति सालाना आय 4000 डॉलर हो जाएगी। दूसरे शब्दों में भारत मिडल इनकम देश की कैटिगरी में आ जाएगा। कई दूसरे विश्लेषण भी इस तरह के आकलन की पुष्टि करते हैं। उदाहरण के तौर पर यह बात भी कही जा रही है कि इस दशक के अंत तक यानी साल 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच जाएगी। यानी तब अमेरिका और चीन ही भारत से आगे होंगे।

देश की इस तरह की पॉजिटिव तस्वीर के पीछे डिजिटल इंडिया, जनधन खाता और आधार जैसी नीतियां रही हैं। मगर इसका मतलब यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि हमारे रास्ते में चुनौतियां नहीं हैं। अगले कुछ वर्षों का जो सुखद लक्ष्य दिख रहा है, वहां तक पहुंचना आसान नहीं है। सबसे बड़ी बात यह कि लेबर फोर्स में कामकाजी लोगों की भागीदारी लगातार घट रही है। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2000 में जो LFPR (लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट) 60 फीसदी था, वह घटकर 53 फीसदी के आसपास आ गया है। लेबर फोर्स के स्किल का सवाल भी अहम है। देश में बालिग कामकाजी लोग 6.7 साल की औसत स्कूलिंग वाले हैं।

जाहिर है शिक्षा और रोजगार दोनों मोर्चों पर काफी काम करने की जरूरत है। लेकिन सबसे अहम है देश के अंदर का माहौल। मणिपुर के हालात तो असुविधाजनक सवाल पैदा करते ही हैं, देश में हेटस्पीच के बढ़ते मामले और समाज में दिख रहा तीखा ध्रुवीकरण इन तमाम उम्मीदों पर पानी फेर सकता है। याद रखना होगा कि पूंजी वही आती है, जहां अमन-चैन हो और इसी निवेश की बदौलत देश तेजी से तरक्की की राह पर आगे बढ़ता है।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें