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काले कृषि कानून के आंदोलन में हम क्या करें?

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मुनेश त्यागी

आज भारतीय राजव्यवस्था एक अजीब दौर से गुजर रही है जहां पर किसानों, मजदूरों और आम जनता की समस्याओं का कोई निदान नहीं किया जा रहा है और वहीं पर देशी- विदेशी पूंजीपति घरानों के मुनाफों को बढ़ाने के लिए सरकार बेचैन है। ये काले कृषि कानून भी उसी मुहिम का एक हिस्सा हैं। यहां पर हमारा जरूरी काम बनता है कि हम जनता के सामने उठ खड़े हुए सवालों का जवाब दें,,,,,,
सवाल ,,,, क्या किसान आंदोलन केवल पंजाब और हरियाणा तक सीमित है?
नहीं इस आंदोलन में पंजाब और हरियाणा के किसानों के अतिरिक्त राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तामिल नाडू, मध्य प्रदेश आदि समस्त राज्यों के किसान शामिल हैं और वे इन काले कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं।
सवाल,,,, क्या इस आंदोलन में केवल किसान शामिल हैं?
जी नहीं, इस कृषि विरोधी नए कानूनों के आंदोलन में किसान, मजदूर, खेतिहर मजदूर, बूढ़े, नौजवान, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं वह सब इसमें भाग ले रहे हैं।
सवाल,,,,, सरकार ने किसान विरोधी कानून क्यों बनाए हैं?
भारत का खाद्यान्न उद्योग 70 लाख करोड से लेकर 80लाख करोड रुपए के बीच में है, देसी विदेशी धनी कारपोरेट पूंजीपति इस विशाल बाजार पर निगाहें गड़ाए बैठे हैं ताकि उनके मुनाफे बढ़ सके और सरकार इस मुहिम में लुटेरों के साथ खड़ी हुई है, उनका साथ दे रही है और किसानों मजदूरों और आम जनता पर हमले कर रही है।
सवाल,,,,,तीन काले कानूनों को लेकर किसानों के खिलाफ बदनामी का प्रचार क्यों?
सरकार किसान एकता को तोड़ना चाहती है और उन्हें बदनाम करने के लिए सरकार उन्हें खालिस्तानी, पाकिस्तानी, चीनी एजेंट, टुकड़े टुकड़े गैंग, कांग्रेसी और कम्युनिस्ट बता रही है और ऐसा कह कर किसानों को बदनाम कर रही है और उनकी बदनामी की मुहीम चला रही है और हकीकत से ध्यान हटा रही है।
सवाल ,,,,,,क्या इस किसान आंदोलन में कुछ ही किसान संगठन शामिल है?
नहीं, इस किसान आंदोलन में 500 से ज्यादा किसान संगठन शामिल है जो एकीकृत नेतृत्व के तहत इस आंदोलन को चला रहे हैं और इसके निर्णय ले रहे हैं। किसी पार्टी से उस किसान समिति का ताल्लुक नहीं है, सरकार इसे विपक्षी पार्टियों का आंदोलन बताकर या विपक्षी पार्टियों का आंदोलन बताकर बदनाम कर रही है, यह सच्चाई से परे है।
सवाल,,,,, क्या ये तीनों काले कानून किसानों, मजदूरों, जनता की बेहतरी के लिए लाए गए हैं?
नहीं, इन कानूनों का किसानों, मजदूरों और जनता के कल्याण से कोई लेना देना नहीं है, इन्हें सिर्फ पूंजीपतियों के मुनाफे बढ़ाने के लिए लाया गया है।
सवाल,,,,,, क्या स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया गया है?
नहीं, स्वामीनाथन आयोग ने सी2plus 50% फार्मूले के साथ न्यूनतम वेतन मूल्य तय करने की सिफारिश की थी जो इस सरकार ने लागू नहीं की है बल्कि वह बहाने बना कर स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने से बच रही है।
सवाल,,,,,, विपक्षी पार्टियों पर हमला क्यों?
इस आंदोलन की आड़ में सरकार विपक्षी पार्टियों पर हमला कर रही है, सरकार असली काले कानूनों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्षी पार्टियों का राग अलाप रही है।
सवाल,,,,,क्या ध्यान भटकाने के लिए सांप्रदायिक करण किया जा रहा है?
इन काले कानूनों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए “लव जिहाद” और “गौसंरक्षण” का अभियान चलाकर बीजेपी डराने धमकाने के लिए सांप्रदायिक भावनाएं भड़का रही है लोगों की एकता तोड़ रही है उनका ध्यान भटका रही है उन्हें बदनाम कर रही है।
सवाल,,,,,, उदारीकरण नीतियों को क्यों लागू किया जा रहा है?
विश्व अर्थव्यवस्था मंदी के संकट से गुजर रही है, पिछले 30 सालों में भी वह अभी तक संभल नही पाई है, भाजपा की केंद्र सरकार कारपोरेट घरानों की ज्यादा से ज्यादा मुनाफाखोरी के लिए उन्हें और ज्यादा अवसर प्रदान करने के लिए आक्रामक ढंग से नए नए क्षेत्रों और नए नए बाजारों का अधिग्रहण करने के लिए उदारवादी सुधारों और नीतियों को आगे बढ़ा रही है, ताकि उनकी मुनाफाखोरी को बढ़ाया जा सके और उन्हें आर्थिक संकट से निकाला जा सके, इसलिए सरकार नवउदारवाद की नीतियों को किसी भी सीमा तक जाकर लागू कर रही है। ये काले कानून भी उसी क्रम और नीतियोंका हिस्सा हैं।
सवाल,,,, क्या यह किसान आंदोलन सिर्फ जाटो का आंदोलन बनकर रह गया है
नहीं, यह आंदोलन समस्त किसानों का आंदोलन बन गया है, सिर्फ बीजेपी से जुड़े किसान संगठन ही इस आंदोलन को सपोर्ट नहीं कर रहे हैं, बाकी किसानों के सभी हिस्से,,, जाट, गुर्जर, त्यागी, ब्राह्मण, क्षत्रिय और किसानों के दूसरे हिंदू, मुस्लिम और सिख संगठन इस आंदोलन को सपोर्ट कर रहे हैं। मुजफ्फरनगर की महारैली ने यह सिद्ध कर दिया है और सरकार को दिखा दिया है कि यह आंदोलन सिर्फ जाटों का आंदोलन नहीं है बल्कि इसमें दूसरी तमाम जातियां शामिल है। ये जातियां किसानों की जातियां हैं, ये कोई अलग से कोई जाति नही हैं।
सवाल,,,,, क्या यह आंदोलन सिर्फ हरियाणा पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ किसानों का है?
नहीं, यह आंदोलन पूरे भारत के किसानों का आंदोलन बन गया है जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, पश्चिमी बंगाल, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मतलब कि पूरे देश के किसान इसमें आंदोलन में शामिल हैं।
अब यहां पर हमारा काम बनता है कि सरकार जो किसान आंदोलन को लेकर झूठ बोल रही है उसके झूठ को हम पकड़े और पूरी जनता में उसका उत्तर दें और जनता को बताएं कि यह आंदोलन सिर्फ किसानों का आंदोलन नहीं है बल्कि यह देश की पूरी जनता को बचाने का आंदोलन है जिसमें खेतिहर, मजदूर, विद्यार्थी, नौजवान और महिलाएं सब शामिल हैं।

Ramswaroop Mantri

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