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*सदाकत आश्रम से निकली सच्चाई को क्या बल मिलेगा?*         

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सुसंस्कृति परिहार 

पिछले दिनों बिहार के पटना स्थित ऐतिहासिक क्रांति स्थल सदाकत आश्रम में आज़ादी के बाद कांग्रेस की महासभा का आयोजन हुआ। जिसकी मुख्य वजह देश को सदाकत यानि सच्चाई से अवगत कराना है।

वोट चोरी की जो गूंज अब देश के कोने कोने में सुनाई दे रही है उसके मूल में प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी की वह मेहनत है जिसने वोट चोरी की पोल खोलकर एक लोकतांत्रिक देश में ऐतिहासिक काम किया है।देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, बेरोजगारी,महिला असम्मान, मंहगाई क्यों है उसकी तह में जाकर भाजपा की बुनियाद हिला दी है।हम दो हमारे दो को किस तरह जनता का पेट काटकर विश्व स्तर का पूंजीपति बनाया गया। बैंक लुटवाए ग ए,पेपर आउट करके नौकरी देने में अवरोध डाला गया। प्रजातंत्र को मिटाने संविधान से छेड़छाड़ होती रही। चुनाव  जीतने पुलवामा और पहलगाम किए गए। प्रतिपक्ष की आवाज़ का दमन किया गया गया। नोटबंदी करके अपना कालाधन सफेद किया गया।चुनी हुई विपक्षी सरकारों की खरीद-फरोख्त कर भाजपाई रंग में रंगा गया।141सांसदों को सदन से निलंबित कर चुनाव आयोग को सर्वाधिकार सौंप कर मन मुताबिक चुनाव जीते गए।जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को दहशत देकर उनसे धन लूटा और भाजपा से जोड़ा गया। विदेश नीति में सिर्फ गौतम अडानी के लिए काम हुआ। 28%जीएसटी लगाकर जनता को 8 साल भरपूर लूटा गया। ऐसे बहुत से मुद्दों पर कांग्रेस के नेताओं ने अपने विचार रखे।

चूंकि बिहार विधानसभा चुनाव समीप है इसलिए कांग्रेस ने समूचा ध्यान यहां केन्द्रित रखा। मूल बिंदु संविधान बचाओ, चुनाव आयोग की वोट चोरी रोकने तथा बिहार के साथ जेडीयू और भाजपा के शातिराना खेल से बिहार की जनता को बचाना है। विदित हो भाजपा की बी टीम के रुप में काम कर रहे प्रशांत किशोर को मिल रहे भरोसे को तोड़ना है। सच्चाई बताना है । जेडीयू और भाजपा मंत्रियों पर आरोप  लगाना और उन पर कार्रवाई ना होना,  प्रशांत किशोर की चुप्पी इसका सबूत है।

जिस पावन भूमि पर सीडब्ल्यूसी की बैठक हुई उस 21 एकड़ ज़मीन को 1921 में मौलाना मज़हरूल हक ने दान देकर इसकी नींव रखी थी। सदाकत का मतलब अरबी भाषा में ‘सच्चाई’ होता है, और यह स्थान वास्तव में उसी सच्चाई और त्याग की पहचान से जाना जाता है। ज्ञात हो महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी ने इस आश्रम का शिलान्यास किया था। बाद में गांधीजी कई बार यहां ठहरे और चरखा कातते हुए स्वदेशी आंदोलन को मजबूती दी। यही नहीं, यहां बैठकर गांधी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू और आचार्य कृपलानी जैसे नेताओं ने असहयोग, सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जैसी बड़ी योजनाओं का खाका तैयार किया था। इस प्रकार सदाकत आश्रम केवल एक इमारत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संघर्ष की आत्मा साबित हुआ।आज जब देश अपने संविधान से प्रदत्त वोट देने के अधिकार से वंचित होने की कगार पर कराह रहा है।जिसको बचाने की कवायद अब कांग्रेस के साथ इंडिया गठबंधन के राजनैतिक दल कर रहे हैं उम्मीद की जा सकती है कि सदाकत आश्रम से निकली इस सच्चाई को देश भर में समर्थन मिलेगा।यह भी समझा जा रहा कि यह आवाज एक बार फिर बिहार क्रांति के रुप में मुखर होकर बिहार में ना केवल बदलाव का इतिहास लिखेगी वरना देश में भी इस सच्ची आवाज को बल मिलेगा। जिससे लोकतांत्रिक देश एक बार फिर सुदृढ़ होकर उभरेगा।

विदित हो 1940 में कांग्रेस वर्किंग कमिटी की ऐतिहासिक बैठक के 85 साल बाद, पटना के सदाकत आश्रम में सीडब्ल्यूसी की बैठक हुई है  लेकिन इस बार लड़ाई स्वतंत्रता की नहीं, कांग्रेस के द्वारा आज़ाद भारत से छीने जा रहे अधिकारों की लड़ाई है जो झूठ और फरेब के खिलाफ सच्चाई की जीत के लिए है। जिसे देश की जनता ने 12वर्ष के संघी शासन से ऊबकर बखूबी समझा है।

Ramswaroop Mantri

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