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*जो तुम इतना मुस्करा रहे हो!*

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-सुसंस्कृति परिहार 

देश में हुए हादसों और इज़राइल ईरान युद्ध की विभीषिका के बीच हमारे प्रधानमंत्री का मुस्कराता चेहरा कनाडा G7 के दरम्यान देखा गया वह अचरज भरा था शायद पहली बार उनकी दंतपंक्ति देखी गई।इटली की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी के साथ तो जो दतनिपोरी हुई वह ऐतिहासिक थी।

इतना तो वो तब ख़ुश नज़र नहीं आए जब उन्हें साइप्रस के दूसरे बड़े सम्मान ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकरिओस से नवाजा गया। साइप्रस के निकोलस में राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने भी लाल कारपोरेट बिछाकर उनका स्वागत सत्कार किया। भारतीयों ने दिल खोलकर जय जयकार किया। जबकि कनाडा में उन्हें पहले तो आमंत्रित ही नहीं किया बाद में पता नहीं किस जुगत से वे आमंत्रित हुए।यह साफ़ दिखाता है वहां से जारी फोटो सेशन में जहां वे पहले नज़र नहीं आए। लोगों का ऐसा मानना है वे शायद भारत की शान का ख़्याल रखने पोशाक बदलने में देर कर दिए। दूसरे फ़ोटो सेशन में वे पीछे नज़र आ गए लेकिन फोटोजीवी का चेहरा मायूस दिखा।

लगता है उनके आका डोनाल्ड ट्रम्प के जाने से वे अपने आपको अकेला महसूस कर रहे होंगे। लेकिन उसके बाद उन्होंने जबरिया मुस्कान ओढ़ ली वे ज़रुरत से ज्यादा अट्टहास करते दिखे।यही वो अट्टहास है , मुस्कान है जो उसकी आंतरिक पीड़ा को बयां करती नज़र आ रही है।

वे इस समय मुसीबतों के दौर से गुज़र रहे हैं अमेरिका की तरह उनकी हेकड़ी और अभिमान ना केवल देश में बल्कि दुनियाभर में धराशाई हो रहा है। देश में वे जहां वे बढ़ती दुर्घटनाओं में घिरे हैं वहीं राहुल गांधी की जननायक की छवि से उनकी दुश्वारियां बढ़ रही हैं।इतना ही नहीं संघ का भाजपा अध्यक्ष को लेकर बढ़ता दबाव तथा पार्टी के विखंडन का खतरा भी उनकी परेशानियों में शामिल है। सितंबर भी उन्हें डरा रहा है 75वर्ष पूरे होने वाले हैं। उधर सुको की घेराबंदी में अपनी नाकामी से भी शाह मोदी हलाकान हैं।

इधर अमेरिका की यारी के परखच्चे उड़ते जा रहे हैं। यह बात विदेश मंत्री जयशंकर प्रसाद के कथन से ज़ाहिर होती है वे कह रहे हैं कनाडा से मोदीजी की ट्रम्प से 35 मिनिट मोबाइल पर बात हुई। उन्होंने ट्म्प से कहा है कि वे भारत पाक मामले में मध्यस्थता ना करें। प्रसाद ये भी बताते हैं कि उन्होंने सीज़ फ़ायर पाकिस्तान के कहने से किया। ये बात कितनी सच है कहना मुश्किल है क्योंकि डोनाल्ड ट्रम्प ने कल फिर 14वीं बार अपने कथन को दोहराया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को व्यापार रोकने की धमकी देकर सीज़फायर रुकवाया है।उनने यह भी कहा कि पाकिस्तान को सहयोग जारी रहेगा तथा मोदीजी हमारे दोस्त हैं। एक कपटपूर्ण नीति के तहत ये उद्गार देखें जाने चाहिए।

मोदीजी किस दबाव में होंगे आसानी से समझा जा सकता है।यही दबाव उनसे नेतान्याहू की तरफदारी करवाता रहा है आज जब दुनिया के आधे से ज़्यादा देश ईरान के साथ खड़े हैं।  एशिया के चीन,रुस,कोरिया जैसे सबल राष्ट्र साथ भारत, पाकिस्तान को छोड़कर तमाम देश वा यूरोप के टर्की और कई मुस्लिम देश,अफ्रीका ईरान को सहयोग करने तैयार है।तो भारत की कथित तटस्थता बैचेनी बढ़ाने वाली है।इस समय भारत और पाकिस्तान जो अमरीकी गुलामी ओढ़े हुए हैं।छटपटा रहें हैं।यह क्या तौहीन नहीं है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख फ़ील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मंगलवार को व्हाइट हाउस में हुई बैठक को इस्लामाबाद में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

सोचिए,एक तरफ़ पाकिस्तान के सेना प्रमुख डोनाल्ड ट्रम्प की मेहमानी करते हैं और मोदीजी फोन पर बात।यह भारत जैसे महान देश की आज हैसियत बता रहा है।जो बहुत त्रासदायक है।इसका ग़म मोदीजी को ना होगा यह कहना बेमानी होगा।ये परिस्थितियां बता रही हैं कि साहब की दतनिपोरी यूं ही नहीं है। फिल्म अर्थ का ये दर्दनाक गीत बार बार याद आ रहा है जो जगजीत सिंह ने गाया है -‘जो तुम इतना मुस्करा रहे हो/क्या ग़म है जो तुम छुपा रहे हो’ ख्यात व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई जी भी कहते थे -दुखी व्यक्ति अपने ग़म छिपाने सदैव हंसने का नाटक करता है।’उनसे बेहतर और कौन हो सकता है जो इस मनोविज्ञान को समझता होगा।

बहरहाल,देखना यह होगा कि इन घटनाओं का मोदीजी पर कुछ असर होता है या वे अपनी हेकड़ी पर कायम रहते हैं।

Ramswaroop Mantri

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