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बापू तुम कब सुनोगे 

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राकेश श्रीवास्तव 
बापू तुम तो जब तक जीवित रहे सबकी मदद करते रहे। अच्छी खासी बैरिस्टरी छोड़ कर दक्षिणी अफ्रीका मे संघर्ष करने लगे। फिर भारत आकर आजादी की लड़ाई मे कूद पड़े।गांव गांव पदयात्रा की।चम्पारण जाकर निलहों के लिए लड़ने लगे।खुद तो नौकरी छोड़ी ही, तुम्हारी देखा देखी लाखों की संख्या मे औरों ने भी छोड़ दी। छात्र-छात्राओं ने स्कूल,कालेज और विश्वविद्यालय छोड़ दिए। तुम सबकी चिंता करते रहे। 

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पर यह कैसी बात है कि जो तुम्हें रोज मारते हैं उनकी चिंता नहीं करते हो।वो तुमको मारते हैं और तुम दुगनी ताकत से उन के सामने फिर खड़े दिखते हो। ऐसा क्यों करते हो बापू? देखते नहीं, उनको कितना परिश्रम करना पड़ता है। नकली गोली, नकली खून, नकली विचार, नकली राष्ट्रप्रेम सब लाना पड़ता है। 
बापू, तुमने तो देशवासियों की चिंता मे अपने कपड़े न्यूनतम कर लिए, अपना भोजन कम से कम कर लिया यहां तक कि पानी भी कम से कम प्रयोग करते थे। देशवासियों ने तुम्हारे कहने पर विदेशी कपडों की होली जलाई, उनका त्याग कर दिया। तुमने चरखा और खादी को जन जन तक पहुंचाया। दांडी मे नमक लेकर खड़े हो गए।मानव जीवन और प्रकृति के संसाधन से कितना प्यार करते थे। 
तुमने अपने विरोधियों के प्रति भी कोई वैमनस्य नहीं रखा। पर तुम उनकी क्यों नहीं सुनते हो।तुम्हारी देह को गोली मारने के बाद भी तुम्हारे विचारों को मारने के लिए,उन को समाप्त करने के प्रयास में दिन रात ओवरटाइम कर अपनी उर्जा व्यय करनी पड़ती है।तुम उनकी कब सुनोगे बापू। 
बापू तुम तो सत्य और अहिंसा के पुजारी ठहरे। थप्पड़ मारने वाले के सामने दूसरा गाल सामने करना सिखाया।तुमने सत्याग्रह और सिविल नाफरमानी सिखाई। तुमने भारतीयों मे अभय का संचार किया।तुमने असहयोग की ताकत को आवाज दी।तुमने तो दूसरों की गलती के प्रायश्चित के लिए भी उपवास किये। तुम्हारे भीतर तो करुणा का सागर रहा है। 
पर तुम्हारे आलोक की फुहार इधर कब पडेगी। यह लोग तुम्हारा नाम मिटाने को परेशान हैं। तरह तरह के प्रयास करने पड रहे हैं।इन्हें व्हाट्सएप, ट्विटर,फेसबुक और अन्य मीडिया पर बहुत मेहनत करनी पड़ती है। मीम, कार्टून, फोटोशॉप न जाने क्या क्या करना पड़ता है पर तुम गायब ही नहीं हो पा रहे हो। कुछ तो ध्यान दो बापू। तुम्हारे बरबक्स अलग अलग लोग खड़े करने पड़ते हैं पर वह सब भी तुम्हारे शिष्य या साथी निकल आते हैं।कभी नेताजी तो कभी सरदार पटेल, कभी भगत सिंह तो कभी लालबहादुर शास्त्री।ये सब कह देते हैं कि हम सब एक ही आंदोलन से तप कर निकले हैं और ब्रिटिश हुकूमत हमारी दुश्मन थी। हम सब उसके खिलाफ लड़े हैं । बापू अपने समय कुछ तो ऐसे नेता बनाते जो आपको गाली देते। और तो और विदेशी भी ऐसा नहीं करते हैं। 
आप किस मिट्टी के बने हो कि मरने के इतने सालों बाद भी संघर्ष करते हुए दिखते हो। बजाय मरने के हर आक्रमण के बाद और अधिक उर्जा से और अधिक दिलों मे राज करते हो। बापू तुम कब सुनोगे।

Ramswaroop Mantri

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