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 सामयिक:बेटियों पर बढ़ते ख़तरे जिम्मेदार कौन ?  

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सुसंस्कृति परिहार 

एक तरफ बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का ज़ोर है तो वहीं बेटियों पर सुरक्षा कवच का ऐलान करने वाले, उनके परिजन और शहजादों की कुत्सित आक्रामकता के कारण बेटियां मौत की नींद सुलाई जा रही हैं।एक तरफ धार्मिकता की ओट में आसाराम और राम-रहीम जैसे अनेकों लोग बेटियों के गुनहगार सदियों से रहे हैं। वहीं अब सत्ता और पद के गुमानियों के कारण ये आंकड़ा निरंतर बढ़ रहा है।

पिछले दिनों से उत्तराखंड निवासी अंकिता भंडारी की दुखद दास्तान से विभिन्न संस्थानों में काम करने वाली लड़कियों का बुरा हाल है। एक होनहार लेकिन गरीब घर की सुंदर सी लड़की अंकिता भंडारी जो 12वीं बोर्ड में 88%अंक लेकर भी आगे पढ़ने की गुंजाइश न होने के कारण होटल मैनेजमेंट का कोर्स करती है।उसकी नियुक्ति ‘वनांतरा’ रिजार्ट  में हो जाती है। उसके माता-पिता खुश हो जाते हैं। उन्हें नहीं पता था कि एक माह में ही उनकी बेटी की निर्मम हत्या हो जायगी।

अंकिता की यह कहानी उसी तरह गुम हो जाती यदि वह अपने मित्र को यहां की जानकारी नहीं भेजती। बताते हैं कि इससे पहले भी एक बेटी जो रिसेप्शनिस्ट थी गायब हो गई थी उसका कोई पता नहीं चला। यह रिजार्ट एक रसूखदार भाजपाई नेता विनोद आर्य के पुत्र पुलकित का है जो अवैध जमीन पर बना है। अंकिता को अपना ईमान जताने के लिए पुलकित ने एक बार एक षड्यंत्र के तहत एक शराबी गेस्ट से अंकिता के साथ अभद्र व्यवहार कराया और बुरी तरह उसे फटकार लगाई। इससे अंकिता बहुत खुश हुई उसने अपने मित्र को इसे ख़ुश होकर बताया भी। अंकिता पर विश्वास जमाने के बाद पुलकित ने उसे बातों ही बातों में स्पा और एक्स्ट्रा सर्विस देने पर ₹10,000 प्रति ग्राहक देने की बात कही जिस पर उसने सहजता से आत्म विश्वास के साथ इंकार कर दिया। लगता है उसका इंकार और नौकरी छोड़ने की बात ही उसका गुनाह बन गई। यह बात भी उसने मित्र से साझा की थी।

फिर अचानक एक रात  पुलकित, अंकित और सौरभ तीनों उसके रुम में आते हैं उससे क्या कहा सुनी हुई यह तो पता नहीं चला पर इस घटना को चूंकि उसने अपने मित्र से रोते हुए जो कहा उस संक्षिप्त बात से  उसकी मनोदशा को समझा जा  सकता है। उसने मित्र से यहां आने भी कहा। इधर अपना बैग भी मांगा। उसे वे ही तीन लोग रात 9:30 बजे तक मोटर साइकिल पर बैठाकर ले गए।एक कर्मचारी ने बताया कि यहां से वे चार लोग गए थे और लौटे तीन। इस बीच उसके मित्र के फोन के जवाब में पुलकित ने  कहा कि वह कमरे में सो रही होगी। सुबह जब वह पहुंचा तो बताया गया वह यही कहीं होगी।पूरे छः दिन उसकी तलाश परिवार के लोग और उसका दोस्त करता रहा। जब नहीं मिली तो वहां राजस्व कर्मचारी को मामला दिया गया। कोई कार्रवाई न होने पर उसे पुलिस को दिया गया। होटल कर्मचारी और अंकिता के मित्र से हुई बातचीत के आधार पर इन तीनों को हिरासत में लिया गया है जिसमें उन्होंने उसके शव को चिल्ला नहर में फेंकने की बात की। वहां से शव निकाल लिया गया।

इधर इस घटना से क्षेत्र में इतना तनाव बढ़ गया कि आरोपियों को ले जाते महिलाओं ने उन्हें लगभग निर्वस्त्र करते हुए भरपूर पिटाई की।इस बीच राजस्व पुलिस ने पुलकित के रिजार्ट पर बुलडोजर चलवा दिया जिसमें सामने का काउंटर और वह कमरा है जिसमें अंकिता का सामान था जिसे बुरी तरह तोड़ा गया था। यह भी एक बड़ी साज़िश का हिस्सा लगता है क्योंकि रिसेप्शन का कैमरा और कमरे का सामान रहस्य खोल सकते थे। इधर दुखी जनता ने शेष कमरों में भी आग लगा दी। क्षेत्रीय विधायक की गाड़ी में भी तोड़ फोड़ की गई। सबसे बड़ी बात ये है कि इस शातिर अपराध के लिए उसका बाप  पुलकित को भोलाभाला बता रहा है। हालांकि धामी सरकार ने पिता और दोनों पुत्रों को उनके ओहदों से हटा दिया है।

अब चिंता इस बात की है कि भाजपाई अपराधी हो तो मुश्किल होता है दंड मिलना क्योंकि हम देख रहे हैं किस तरह बिल्किस मामले के वीभत्स हत्या और बलात्कार के अपराधियों को अच्छे आचरण की आड़ में आज़ादी के 75वीं सालगिरह पर छोड़ दिया गया।उनका स्वागत सत्कार हुआ।वह शर्मनाक है।यह पहला अवसर नहीं है बलात्कार को संघ अपराध नहीं मानता है इसीलिए इनका भाजपा मंच पर भी स्वागत होता है।

आज सबसे ज़रूरी है कि बेटियां अपने सिक्स्थ सैंस का इस्तेमाल करना सीखें। इससे वे इस प्रवृत्ति के लोगों को पहचान सकती हैं और उनसे दूरी बना सकती है। जैसे गुड टच बैंड टच की सीख दी जाती है इसे भी विस्तारित करना होगा। सोचिए यदि आज उसका मित्र नहीं होता जिसे वह अपनी स्थिति से अवगत कराती रही तो यह दुर्दांत घटना भी, पहली घटना की तरह ही ख़त्म हो जाती और सारा दोष अंकिता के मत्थे मढ़ दिया जाता। अपनी स्थिति से किसी न किसी को भागीदार ज़रुर बनाएं। उस क्षेत्र की महिलाओं ने जिस तरह से तीनों बदमाशों के साथ जो किया उसकी सराहना होनी चाहिए। यह भी नागरिकों की जिम्मेदारी बनती कि जिस होटल में पहले एक लड़की के गुम होने की जानकारी थी तो उसे अंकिता तक पहुंचाना था।

सार यह है बेटियां तब तक सुरक्षित नहीं हो सकती हैं जब तक हम सब मिलकर बेटियों की चिंता नहीं करते। उन्हें हर कदम पर आपका साथ चाहिए। गरीबी और मंहगाई के इस भयानक दौर में सत्तानशीं, अफसरों और धार्मिकता की आड़ में जो कुछ चल रहा है उससे हम सब भली-भांति वाक़िफ है। ज़िंदादिल इंसान ही इस घटाटोप अंधियारे समय में अंकिताओं को बचा सकते है। आईये, बेटी दिवस पर कुछ करें ताकि बेटियों की मुश्किलें कम हो सकें।

Ramswaroop Mantri

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