इंदौर चलिए शुरुवात मंडी गेट से करते है। नियम तो ये है मंडी में किसी भी माल से भरे ट्रक के प्रवेश करते ही उसकी इंट्री मंडी समिति के पास पहुँच जानी चाहिए।। लेकिन 50,100 रूपगे गेट पर पकड़ाओ ओर गाड़ी खाली कर निकल जाओ कोई पूछने वाला नही।। अब यही माल जब मंडी में अगले दिन दलाल बेचेगा तो खेल और बड़ा हो जाएगा। *इंदौर चोइथराम मंडी में रोज हो रही करोड़ो की टैक्स चोरी।।* अगले दिन माल बिक गया और दूसरी गाड़ी पर माल लादा गया लेकिन एक बार फिर 200,500 रुपये गेट पर पकड़ा के गाड़ी फुररर ।। न माल आने की कोई खबर न जाने की।। चलो अब गेट से अंदर घुसते है ..अंदर दूर से खड़े होकर देखने मे सब सामान्य सा लगता है। बोलिया लग रही है खरीदी बिक्री हो रही है।। लेकिन यहाँ भी अलग खेल चल रहे है किसान का प्याज बिका तो 18 रुपये लेकिन ये बात सिर्फ दोनो व्यापारियों को मालूम है किसान की जानकारी में 15 रुपये ही भाव आया।। ओर अब जब ये माल मंड़ी गेट से बाहर हुआ तो फिर वोही खेल 500 का नोट।। मंडी टैक्स सरकार के खाते में जाने के बजाय गेट पर तैनात कर्मचारियों और उनके दुवारा अधिकारियों के जेब मे जा रहा है।। अब सवाल उठता है कि क्या जिला प्रशासन को इसकी कोई जानकारी नही है? इसके पीछे भी बड़ा कारण छिपा है। एक तो जेब गर्म हो रही है दूसरा कार्यवाही करने की हिम्मत किसी मे नही क्योंकि आपको बता दे इंदौर चोइथराम मंडी में कोई व्यापारी संघटन नही है आलू प्याज लस्सन,सब्जी,फल फ्रूट सभी की अलग अलग चार से पाँच सनघटन सक्रिय है।। और सभी का दबाव छोटे व्यपारियो ओर अधिकारियों पर रहता है और इनके खिलाफ कभी कोई कार्यवाही नही होती।। जिला प्रशासन को इसके लिए कठोर कार्यवाही करनी होगी। सब्जी,फल क्रूट की सिर्फ दो व्यापारी सनघटन हो।। *मंडी गेट सहित समूचे परिसर में vedio कैमरे लगाए जाएं। *टैक्स चोरी रोकने गेट के सभी कर्मचारी व मंडी अधिकारियो को बदला जाए
इंदौर चोइथराम मंडी में व्याप्त करोड़ो के भरस्टाचार में हिस्सेदार कौन कौन ?





