-निर्मल कुमार शर्मा,
अभी अमेरिका और उसके पिछलग्गू देशों के दुनियाभर के समाचार मिडिया में यूक्रेन-रूस के बीच युद्ध को लेकर अपने विरोधी खेमे के नेताओं यथा रूसी राष्ट्रपति पुतिन,चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग उन आदि तीनों को तथा विशेषरूप से रूस के वर्तमान समय के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तरह-तरह की गालियाँ जैसे वह तानाशाह है,सनकी है,पागल हो गया है,सत्ता का लोभी है ! आदि-आदि अत्यंत अभद्र,अश्लील व असंसदीय भाषा में खूब गाली देकर उनका जमकर चरित्रहनन किया जा रहा है !* उदाहरणार्थ न्यूयॉर्क टाइम्स में हर रविवारीय अंक में स्थाई स्तंभ लिखनेवाले तथाकथित सुप्रतिष्ठित पत्रकार थॉमस एल फ्रीडमैन न्यूयॉर्क टाइम्स में अपने एक ताजे लिखे लेख में लिखते हैं कि ‘यूक्रेन पर कब्जा जमाने की रूसी कोशिश शताब्दियों पहले की याद दिलाती है,जब अमेरिका और फ्रांस में लोकतंत्र के लिए हुई क्रांति से भी पहले यूरोप का कोई सम्राट या रूस का जार अचानक यह फैसला कर लेता था कि उसे और अधिक जमीन चाहिए,वही तौर-तरीका अपनाकर पुतिन न सिर्फ एकतरफा तरीके से दूसरे विश्वयुद्ध के बाद बनी विश्व व्यवस्था के उस नियम को दोबारा लिखने की कोशिश कर रहे हैं कि कोई देश अपने पड़ोसी देश पर कब्जा नहीं कर सकता,बल्कि वह उस शक्ति संतुलन को भी बदल रहे हैं,जिसे शीतयुद्ध के बाद रूस पर जबरन थोपा गया मानते हैं ! जैसा प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी पर थोपी गई अपमानजनक शर्तें थीं,यानी मास्को को न सिर्फ पोलैंड जैसे उन पूर्वी यूरोपीय देशों को नाटो के असर में जाते देखना चाहते हैं ,जो कभी सोवियत रूस के असर वाले क्षेत्रों में था,बल्कि यूक्रेन जैसे देशों तक को नाटो के नजदीक जाते हुए भी देखना नहीं चाहते !जो कभी सोवियत रूस का हिस्सा था ! ‘

वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर व्लादीमीरोविच पुतिन को अमर्यादित गाली देते हुए आगे लिखते हैं कि ‘यूक्रेन पर हमले का पहला दिन पुतिन के शेष जीवन का सबसे अच्छा दिन साबित होगा और निकट भविष्य में भी पुतिन की सैन्य शक्ति का वर्चस्व बना रहेगा,परन्तु दीर्घावधि में पुतिन को एक खलनायक की तरह याद किया जायेगा,क्योंकि जो नेता अतीत के लिए अपने भविष्य को बर्बाद कर डालते हैं,उन्हें अच्छी निगाहों से नहीं देखा जाता ! हालांकि पुतिन इन सबकी परवाह नहीं करते ! आखिर उन्होंने महामारी की पृष्ठभूमि में युद्ध छेड़ा ही है,भविष्य में वह ऐसा नहीं करेंगे,यह भी नहीं कह सकते ! काश मैं यह भविष्यवाणी कर सकता कि यूक्रेन पुतिन के लिए वाटरलू साबित होने वाला है ! आज की दुनिया का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि स्टालिन के बाद रूस में पुतिन के पास और चीन में माओ के बाद शी जिनपिंग के पास सबसे अनियंत्रित शक्ति है,आज की दुनिया दो अतिवादी शख्सियतों पर टिकी हुई है,दुनिया ऐसी खतरनाक कभी भी नहीं थी,जब तीन सबसे ताकतवर परमाणु शक्तिसंपन्न देशों में से दो के नेताओं पुतिन और शी जिनपिंग के पास इतनी अनियंत्रित शक्तियां हों ! ‘

अब आइए श्रीमान् तथाकथित सुप्रतिष्ठित पत्रकार थॉमस एल फ्रीडमैन के उक्तवर्णित कथन की शिष्टता,शालीनता और मर्यादित शब्दों में रहकर एक विश्लेषण करते हैं,श्रीमान् तथाकथित सुप्रतिष्ठित पत्रकार थॉमस एल फ्रीडमैन साहब यह बात कतई भूल गए हैं और उन्हें यह बात याद दिलाना हम अपना पवित्र कर्तव्य समझते हैं कि उन्हें ये खूब ठीक से समझकर अपने दिमाग में रख लेना चाहिए कि जब इसी महामारी में उनका कथित शुद्ध लोकतंत्र और इमानदार मानसिकता वाला देश अमेरिका रूस,चीन,क्यूबा आदि के खिलाफ नाटो जैसी कुटिल सैन्य व्यवस्था के तहत व्यूहरचना कर सकता है,तो व्लादिमीर पुतिन द्वारा इसका विरोध करना अप्रासांगिक क्यों हो गया ? थॉमस एल फ्रीडमैन साहब को यह भी याद दिला दें कि प्रथम विश्वयुद्ध के बाद इन्हीं अमेरिकी और ब्रिटिशसाम्राज्यवादियों की अपनी वर्चस्ववादी रवैयों और घोर व्यापारिक स्वार्थ की वजह ने जर्मनी के विश्वविख्यात क्रूर तानाशाह को पैदा करने और बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही है ! द्वितीय विश्वयुद्ध केवल जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर की वजह से नहीं हुआ,अपितु इस दुनिया के उस समय के तत्कालीन सबसे बड़े आर्थिक शोषक और पूरी दुनिया को अपनी मुट्ठी में करने की क्रूर लालच रखनेवाले ब्रिटिशसाम्राज्यवादियों और उससे थोड़ा कद में थोड़े से छोटे अमेरिकीसाम्राज्यवादियों के जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर से रत्तीभर भी कम योगदान नहीं है ! कल्पना करिए अगर द्वितीय विश्वयुद्ध में स्थित विपरीत होती,मतलब एडोल्फ हिटलर विजयी रहता तो ये दुनिया का यह वर्तमानसमय का कथित दरोगा बने अमेरिकीसाम्राज्यवादी हिरोशिमा और नागासाकी पर बम टेस्टिंग के लिए अपने परमाणु बम लिटिल बॉय और फैटमैन छोड़कर चंद सेकेडों में जापान के बिल्कुल निरपराध और मासूम 246000 लोगों को मौत के मुँह में धकेल देनेवाले ये नरपिशाच एडोल्फ हिटलर से भी बड़े खलनायक रहते ! इसके अतिरिक्त श्रीमान् तथाकथित सुप्रतिष्ठित पत्रकार थॉमस एल फ्रीडमैन साहब यह बात भी बिल्कुल भूल ही गये हैं कि द्वितीय विश्वयुद्ध के तुरंत बाद उस युद्ध जैसी स्थिति से दुनिया बची रहे और अमन-शांति की स्थापना के लिए 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गई थी,लेकिन सबसे व्यथित और क्षुब्ध करनेवाली बात यह है कि दुनियाभर को कथित मानवाधिकार का पाठ पढ़ाने वाला श्रीमान् थॉमस एल फ्रीडमैन साहब का यह देश जिसका नाम अमेरिका है,संयुक्त राष्ट्र संघ की सबसे ज्यादे बेइज्जती और अवहेलना किया है ! उदाहरणार्थ 1950 से लेकर आज 2022 तक इस वैश्विक आतंकवादी देश अमेरिका ने पूरे 72 सालों में 33 गरीब और अत्यंत कमजोर देशों पर आक्रमण करके इस दुनिया की लगभग एक तिहाई आबादी को भीषण अशिक्षा,कुपोषण और भूखमरी आदि के नर्क में धकेल कर रख दिया है ! करोड़ों लोगों को सीधे मौत के मुँह में धकेला है,उससे कई गुना लोगों को अपंग बनाकर और उनके आश्रितों उनके वृद्ध माँ-बापों को बेसहारा तिल-तिलकर मारने का अक्षम्य अपराध किया है ! इसके अतिरिक्त चीली के महाकवि व राजनेता पाब्लो नेरूदा व क्यूबा के निर्माता,लेखक,दार्शनिक, डॉक्टर,महानक्रांतिकारी चेग्वेरा जैसे लाखों लोगों की अपनी बदनाम, हिंसक व इंसानियत की शत्रु अमेरिका की ही बदनाम गुप्तचर संस्था सीआईए के द्वारा लाखों मानवीयहितैषी विचारधारा के लोगों की निर्ममतापूर्वक हत्या तक भी करवाया है !

इससे भी आगे बढ़कर पश्चिमी मिडिया जगत की एक महिला पत्रकार श्रीमती ओलिविया ड्यूरंड रूस के हृदयप्रदेश यूक्रेन को रूस का हिस्सा मानने से ही इन्कार करते हुए लिखतीं हैं कि ‘व्लादिमीर पुतिन का यह कहना कि हमारे लिए यूक्रेन एक पड़ोसी देश भर नहीं है,अपितु यह हमारे इतिहास, संस्कृति और अध्यात्म का हिस्सा है,आधुनिक यूक्रेन का निर्माण पूरी तरह से रूस खासकर बोल्शेविक,कम्युनिस्ट रूस द्वारा 1917 के बाद हुआ इसलिए यूक्रेन के लोगों को अपने अस्तित्व के लिए सोवियत संघ के निर्माता महान व्लादिमीर इल्यीच उल्यानोव लेनिन और उनके अन्य सहयोगियों का आभार प्रकट करना चाहिए ‘को सिरे से नकारती हुई कहती हैं कि ‘ऐतिहासिक तथ्य बताते हैं कि वर्ष 1710 से ही यूक्रेन के लोग खुद को रूसियों से अलग बताते हैं ! ‘ मैं तथाकथित अत्यंत विदुषी पत्रकार श्रीमती ओलिविया ड्यूरंड को याद दिलाना चाहूँगा कि वे वर्तमान संयुक्त राज्य अमेरिका के इतिहास का खूब मन लगाकर अध्ययन कर के यूक्रेन और रूस के संबंधों के बारे में अपना उपदेश देने का कष्ट करें ! श्रीमती ओलिविया ड्यूरंड को याद दिला दें कि एक पुर्तगाली अन्वेषक क्रिस्टोफर कोलम्बस द्वारा भारत खोजने के प्रयास में गलती से वह सन् 1492 में अमेरिकी धरती पर पहुँच गया था,वह अभी भी उस अमेरिकी जमीन को भारतीय भूभाग ही समझ रहा था,इसलिए वह वहाँ के ठिगने,गठीले व कुछ लाल रंग के मूल निवासियों को रेड इंडियन के नाम से संबोधित कर दिया था !लेकिन वास्तव में वे लाल रंग के वहाँ के जनजातीय आदिवासी रेड अमेरिकन थे ! इस पुर्तगाली अन्वेषक क्रिस्टोफर कोलम्बस द्वारा इस अत्यंत उपजाऊ व विस्तृत भूखंड को खोज करने के बाद यूरोप के सभी देशों के अत्यंत लालची व स्वार्थी तत्वों को अमेरिका की इस धरती को कब्जा करने की एक होड़ सी मच गई ! ऐतिहासिक साक्ष्य है कि इन यूरोपियन देशों में इस जमीन के बंदरबाँट और लूट-खसोट और अधिक से अधिक जमीन हड़पने के लिए सदियों तक रक्तरंजित लड़ाइयाँ अबाधरूप से चलती रहीं ! लेकिन अत्यंत दुःख की बात है कि इन लालची और स्वार्थी यूरोपिनों द्वारा सबसे ज्यादे नुकसान वहाँ के मूल निवासियों,जिन्हें अभी भी यूरोपियन्स इन अमेरिकी आदिवासियों को रेड इंडियन ही कहते थे और वहाँ के एक भैंसे जैसे वन्य जीव, जिन्हें बाइसन कहते हैं,इन दोनों को हुआ ! इन दोनों को मतलब बाइसन भैंसों और रेड इंडियन्स को यूरोपियन दरिंदों व नरपिशाचों द्वारा अपनी बंदूकों से अकथनीय क्रूरता और नृशंसतापूर्वक बध किया गया ! इतनी ज्यादे कि पुरातत्वविदों के अनुसार अमेरिकी भूभाग पर 15000 साल से 20000 साल पूर्व से रह रहे इन अमेकन बाइसनों और रेड इंडियंस की लगभग समस्त प्रजाति ही खत्म कर दी गई ! अब स्थिति यह है कि अमेरिका में कुछ-कुछ जगहों पर भारत में जैसे बाघों के लिए अभयारण्य बनाए गए हैं, वैसे ही अमेरिका के इस आदिम वन्यजीव बाइसनों और रेड इंडियंस के लिए बहुत ही सीमित जगह में सुरक्षित क्षेत्र बनाकर दिया गया है,जहाँ ये प्रागैतिहासिक काल के बाइसन और हजारों सालों से रह रहे ये अमेरिकी आदिवासी कथित रेड इंडियंस आज अपने अस्तित्व की अंतिम लड़ाई लड़ रहे हैं !

आश्चर्य और दुःख होता है ऐसे हिंसक देश के सत्ता के कर्णधार शेष दुनिया के लोगों को मानवाधिकार का उपदेश देते फिर रहे हैं और वहाँ के तथाकथित पत्रकार इस आशय के उपदेशात्मक लेख लिखकर दुनिया को अपने हिसाब से समझा रहे हैं ! जबकि ये अपने देश के हिंसक इतिहास को नेपथ्य में धकेलकर ऐसे अनजान बन जाते हैं,गोया दुनियाभर के लोग इन तथाकथित पत्रकारों और लोकतंत्र का मुखौटा लगाए इनके हिंसक राजनेताओं के मिथ्या कथन पर दुनियाभर के लोग आँख मूँदकर यूँ ही विश्वास कर लेंगे ! कटुयथार्थ और कटुसच्चाई यह है कि आज पूरे विश्व को तृतीय महायुद्ध के मुहाने पर लाने के असली खलनायक पूर्व में तत्कालीन सोवियत संघ और अब रूस के खिलाफ एक अत्यंत अपवित्र उद्देश्य से बनाए गए नाटो नामक सैन्य संगठन के बैनर तले लगातार एक व्यूह रचना करने वाले अमेरिकीसाम्राज्यवादी कर्णधार हैं !_
-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में पाखंड, अंधविश्वास,राजनैतिक, सामाजिक,आर्थिक,वैज्ञानिक, पर्यावरण आदि सभी विषयों पर बेखौफ,निष्पृह और स्वतंत्र रूप से लेखन ‘, गाजियाबाद, उप्र,संपर्क – 9910629632,ईमेल – nirmalkumarsharma3@gmail.com





