-मंजुल भारद्वाज
सत्य किसे चाहिए
जब झूठ से सत्ता मिलती है
एक झूठ बार बार बोलने से
महंगाई
भुखमरी
बेरोजगारी
देश की सुरक्षा
देश में शांति के सवाल
हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं !
एक झूठ से जनता
भीड़ बन कर झूठे को पूजती है
सत्ता के शिखर पर बिठा
पूरी व्यवस्था को मज़ाक बनता देख
ताली बजाती है
झूठा
आदिवासी पर मूतता है
महिला का बलात्कार करता है
सरेआम सड़क पर
उनके कपड़े फाड़ता है
उनके मुंह को अपने
जूते से रौंदता है
देश देखता है
बस देखता है !
एक झूठ से
वोट मिलता है
एक झूठ की ताक़त
सच से ज्यादा है
सच भूखा रहता है
दुःख झेलता है
जेल जाता है
गोली खाता है
और झूठ
न्यायधीश बन जाता है !
किसे चाहिए सच
जब झूठ से
मोक्ष मिलता हो
झूठ पर हिन्दू गर्व करता हो
झूठ से राम मिलता हो
झूठ से मंदिर बनता हो
झूठ से संविधान बर्बाद होता हो
झूठ से समान अधिकार छीन कर
वर्णवाद का राज स्थापित हो !
झूठ भारत की संस्कृति है
नरो या कुंजरो
जीत का मन्त्र है
झूठ से यहाँ जनता दुखी नहीं होती
झूठ से जनता लज्जित नहीं होती
झूठ को प्रणाम करती है
राम का जप करती है
जनता के लिए
झूठ ही राम है
झूठ ही धर्म है
झूठ ही जीवन है !
जब झूठ ही जीवन है
तब सत्य किसे चाहिए
क्योंकि सच मौत है !





