-सुसंस्कृति परिहार
आमचुनाव करीब हैं सरकार चार सौ पार की बात कर रही है विपक्ष हक्का-बक्का है जो स्थितियां बता रहीं हैं उनसे ऐसा हरगिज नहीं लगता कि कि ये चुनाव भाजपा के लिए आसान होगा और ज़बरदस्त बहुमत वह पा जाएगी। जानकार लोगों का कहना है कि यह गुमान ईवीएम की बदौलत ही भाजपा को हो गया है।पांच राज्यों के दिसंबर 23के चुनाव में तमाम ख़िलाफत को धता बताते हुए जिस तरह भारी बहुमत लाया गया और पंजाब मेयर के चुनाव में हाल ही में जो धांधली हुई है उसे नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता।

चुनाव आयोग सरकार की हर शै का गुलाम है हम सभी जानते हैं,आयोग ने 28दलों द्वारा ईवीएम हटाने की मांग पर किस कदर बेरुखी दिखाई है राजनैतिक दलों की ये उपेक्षा अलोकतांत्रिक व्यवहार है उसने पिछले राज्य चुनाव में मिले 15,000से अधिक आवेदनों की जांच करना भी उचित नहीं समझा। ईवीएम में शत् प्रतिशत वीवीपेट की गणना भी नामंजूर कर दी गई। आयुक्त की नियुक्ति के बारे में सुको को कानून बनाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।इधर ‘ईवीएम हटाओ -चुनाव बैलेट पेपर से कराओ’आवाज सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने दिल्ली में बुलंद की जिसे लाखों लोगों ने पहुंचकर समर्थन दिया।उसे भी सुनने वाला कोई नहीं। संसद में राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने ईवीएम का डटकर विरोध दर्ज कराया लेकिन सब फ़िज़ूल साबित हो रहा है।बताया जा रहा है एक महिला कमांडो जो चुनाव ड्यूटी पर तैनात थी ईवीएम बदले जाने की खुलकर सोशल मीडियापर बात की है। वहीं 40लाख गुम ईवीएम कहां हैं आज तक अज्ञात है।रहा सवाल हैकिंग का सरे-आम इस दुरुपयोग को दिखाया जा रहा पर चुनाव आयोग इसे देखना भी नहीं चाहता।जब इस तरह का रवैया तथाकथित लोकतांत्रिक सरकार है तो भला इस समस्या से कैसे निज़ात मिल सकेगी आज यह बड़ा सवाल है।
अब ऐसे शून्यकाल में क्या किया जाए वह विचारणीय है आंदोलन, प्रदर्शन, सत्याग्रह जैसे हथियार।अब जब भोथरे हो जाएं तो क्या करना उचित होगा। कुछ लोगों का ख्याल है कि सरकार को एक अल्टीमेटम देकर यह चेतावनी दी जाए कि यदि ईवीएम नहीं हटाते, चुनाव आयुक्त नहीं बदलते तो वे आमचुनाव नहीं होने देंगे।इस बिंदु पर जब विचार करते हैं तो लगता है वे तो यही चाहते हैं चुनाव ना हो। क्योंकि हमारे संविधान में दूसरी सरकार की व्यवस्था नहीं है ना देश में राष्ट्रपति शासन लग सकता है।यानि रहेंगे वहीं जो ईवीएम से चुनाव में यकीन रखते हैं और हैकिंग से 400पार का जुगाड़ दुनिया को दिखाने जमाए हुए हैं। वैसे भी कई लोगों का ख्याल है जिनमें राज्यपाल सतपाल मलिक और सुको के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण शामिल हैं का कहना है कि यदि इस बार आमचुनाव येन-केन प्रकारेण भाजपा जीत लेती है तो भविष्य में संविधान ख़त्म हो जाएगा ना रहेगा बांस और ना बजेगी बांसुरी। चुनाव बीते कल की बात हो जाएगी।आपके तमाम अधिकार ख़त्म।जिसका कुछ कुछ दृश्य बराबर दिखाई दे रहा है।
फिर सवाल वही उठता है क्या किया जाए तो ईवीएम की लड़ाई मज़बूती से लड़ें यदि इसमें कामयाब हो गए तो चार सौ पार का दर्प ख़त्म होगा। दूसरी बात सरकारी प्रलोभन लें भले हीं, पर उसकी हकीकत समझें उसके बदले आपका वोट बड़ी साज़िश है इसे समझें और समझाएं।तीसरी बात धार्मिकता यानि अपनी आस्था को राजनीति के सुपुर्द ना करें।चौथी और सबसे अहम् बात देश की सबसे मजबूत बुनियाद गंगा -जमनी तहज़ीब मिटाने वालों को मुंहतोड़ जवाब दें।हमारा देश विविधता में एकता के लिए दुनिया में जाना जाता है।अल्लामा इक़बाल तो इसीलिए फ़रमा गए हैं।सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा।
आइए,देश कायम रहे। भाईचारा टूटे ना। इसलिए नफ़रत के ख़िलाफ़ मोहब्बत का पैगाम दें। अन्याय के विरुद्ध न्याय योद्धा बनें।सब मिलकर एक साथ आगे बढ़े तो तानाशाही की ओर बढ़ते कदम रोके जा सकते हैं।हमारे सामने पाकिस्तान का उदाहरण है जहां कई बार तानाशाही लादी गई किंतु वहां की अवाम ने एकजुटता की दम पर वहां लोकतांत्रिक शासन को कायम रखा है। दूसरा उदाहरण श्रीलंका का भी सामने है ।जनता चाहे तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं है।ज़रुरत महात्मा गांधी और राहुल गांधी के सहो मत और डरो मत के आव्हान की है।जनता के पास मतदान का जब तक अधिकार है वह उसका प्रयोग कर बहुत सी समस्याओं से मुक्त हो सकती है।यह यदि ईवीएम लील गई तो बड़ी मुश्किल होगी।आज निष्पक्ष चुनाव का यकीन कोई दिलाने वाला नहीं है इसलिए सबको साथ साथ जागना होगा।





