-सुसंस्कृति परिहार
मध्यप्रदेश की दमोह विधानसभा प्रदेश की ऐसी विधानसभा के रूप में जानी जाती है जहां कांग्रेस के मतदाता स्थिर मतदाता हैं उनका वोट कभी किसी दूसरे दल को नहीं गया।शह और मात का खेल सौ से लेकर हजार के बीच चला है।यह बात इसी से सिद्ध हो जाती है कि भाजपा के कद्दावर नेता मंत्री जयंत मलैया के 35 साल में भी हार जीत लगभग ऐसी ही बनी रही है।
यह फासला तब बढ़ा जब कांग्रेस से विजित राहुल लोधी ने गद्दारी की और भाजपा में चले गए तो जनता ने गद्दारी का उन्हें अच्छा सबक सिखाया और तब उपचुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी अजय टंडन ने राहुल लोधी को 17,000 से मात दी तथा दमोह में कांग्रेस का इतिहास बनाया।इस उपचुनाव में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष बी डी शर्मा ने एक माह डेरा डाला हुआ था और मुख्यमंत्री सहित कई केबिनेट नेताओं ने गली गली छानी थी। कुछ लोग कहते हैं कि जयंत मलैया ने आगत में अपनी टिकिट कटती देखकर अजय टंडन को चोरी-छिपे समर्थन दिया था।इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता।इसी कारण मलैया जी उपेक्षित और उनके पुत्र सिद्धार्थ भाजपा निलंबित रहे।

इस बार जयंत मलैया अपनी रणनीति में सफल होकर भाजपा का टिकिट लेकर चुनाव लड़ रहे हैं और उनके सामने कांग्रेस के वहीं अजय टंडन हैं जिनसे उनका याराना है और उपचुनाव में सहयोग देने का आरोप लगा था। इसलिए जय पराजय का गणित लगाना आसान नहीं लगता।यह भी सच है कि इन पांच सालों में मलैया जी ने बहुत कुछ खो दिया है और अजय टंडन ने काफी कुछ गेन किया है।मसलन जैन समाज के अंदर बिखराव बड़े पैमाने पर हुआ है। दूसरे ब्राह्मण वोट पर जो एकाधिकार भाजपा का था वह बुरी तरह टूटा है। मुस्लिम समाज में पिछले वर्षों की तरह मलैया जी की साख बनी हुई है लेकिन तकरीबन 40%वोट अभी भी कांग्रेस के पाले में है। जहां तक सवाल पिछड़े वर्ग का है उनमें से बड़े पैमाने पर उनका भाजपा से मोहभंग हुआ है।कारण जातिगत जनगणना और आरक्षण पर भाजपा कांग्रेस से पिछड़ गई है।इसके अलावा तमाम कर्मचारियों की इक तरफा वोट कांग्रेस को मिलने की चर्चा हो रही है। पुरानी पेंशन बहाली छग, राजस्थान और हिमाचल जहां कांग्रेस सरकार है ने दे दी है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तो पहले ही कांग्रेस को समर्थन देने की बात कह चुके हैं।एक वर्ग वो भी है जो मलैया की जगह अजय टंडन को मंत्री बनाने की जुगत वाला है। लाड़ली बहना का कोई खास असर यहां नहीं पड़ने वाला क्योंकि उनकी बड़ी संख्या पिछले दस सालों से अपने मामा को ही वोट देती रही हैं। सबसे बड़ी बात तो ये कि कांग्रेस आ रही है का शोर ,सत्ता में अपनी हिस्सेदारी के लिए वोट टंडन को जाने के संकेत दे रहे हैं।यह पुष्टि मोदी मीडिया के साथ तमाम सर्वे भी कर रहे हैं। मतदाता अपना वोट भाजपा को देकर खराब करने के पक्ष में नहीं हैं।हां भाजपा का परम्परागत वोट मलैया जी को पक्का मिलेगा।
कुल मिलाकर यहां जीत हार का मुकाबला दिलचस्प होगा। भाजपा खेमा जहां निराश नज़र आ रहा है वहीं कांग्रेस जीत का दावा कर रही है। बहरहाल, प्रदेश में चहुंओर माहौल कांग्रेस का नज़र आ रहा है। इसलिए अजय टंडन की जीत पक्की मानी जा रही है। खासियत ये है दोनों पक्के मित्र हैं लोग यह भी कयास लगा रहे हैं कि यदि प्रदेश में कांग्रेस सरकार बन रही है तो मलैया जी कांग्रेस यदि चूकती है तो साम दाम दंड भेद उन्हें जिताने का काम भी कर सकते हैं ताकि भविष्य सुरक्षित रहे।इधर टंडन यदि बहुत पिछड़ते है जिसकी संभावना कम ही है तो वे निराश नहीं होंगे लेकिन दमोह उपेक्षित रहेगा जैसा भाजपा राज में अब तक रहा है।





