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मिशन 2022 के लिए कांग्रेस के ट्रंप कार्ड क्यों हैं चरणजीत सिंह चन्नी?

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  • मालवा जीतने वाली पार्टी पंजाब में बनाती है सरकार
  • कैप्‍टन से नाराज था मालवा का दलित सिख वोटर
  • चन्‍नी को सीएम बना नाराजगी दूर करने की कोशिश

नई दिल्‍ली
कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के इस्‍तीफे के बाद पंजाब के अगले सीएम को लेकर सस्‍पेंस खत्‍म हो गया है। कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्‍नी को प्रदेश का अगला मुख्‍यमंत्री चुना है। चन्नी दलित सिख समुदाय से आते हैं। वह अमरिंदर सरकार में तकनीकी शिक्षा मंत्री थे। रविवार को चन्नी को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया।

चन्‍नी से पहले कई नाम सीएम पद के लिए सुर्खियों में रहे। इनमें सुखजिंदर सिंह रंधावा और अंबिका सोनी का नाम सबसे आगे था। अंबिका सोनी के नाम पर आलाकमान सहमत था। लेकिन, उन्‍होंने खुद पद ग्रहण करने से इनकार कर दिया। इसके बाद रंधावा का नाम बराबर बना रहा। हालांकि, अंत में कम चर्चित चेहरे चरणजीत सिंह चन्‍नी के नाम पर सहमति बनी।

चन्‍नी को चुनने के पीछे कांग्रेस की सोची-समझी स्‍ट्रैटेजी है। इसके जरिये पार्टी ने दलित सिख कार्ड खेल रहे है प्रतिद्वंद्व‍ियों को जवाब दिया है। पंजाब की पॉलिटिक्‍स में एक कहावत बहुत चर्चित है। कहा जाता है कि जो मालवा जीत लेता है, वही सरकार बना लेता है।

पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में 69 सीटें मालवा में ही हैं। 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने क्षेत्र में 40 सीटें जीती थीं। दूसरे अहम क्षेत्र माझा और दोआब को माना जाता है। माझा में 25 विधानसभा सीटें हैं तो दोआब में 23 विधानसभा सीटें आती हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने माझा की 22 सीटों और दोआब की 15 सीटों पर जीत हासिल की थी।

सिख दलित वोटरों का गणित
मालवा क्षेत्र में 7 लोकसभा सीटें आती हैं। इनमें फिरोजपुर, फरीदकोट, बठिंडा, लुधियाना, संगरूर फतेहगढ़ साहिब और पटियाला शामिल हैं। समझने वाली बात यह है कि डेरा का सबसे ज्यादा प्रभाव मालवा में ही है। एक अनुमान के अनुसार, क्षेत्र के 13 जिलों में करीब 35 लाख डेरा प्रेमी हैं। उसमें भी खास बात यह है कि दलित सिख ही इनमें ज्‍यादा जाते हैं। यही बात चन्‍नी को फेवरेबल बना देती है। डेरा प्रेमी का एकमुश्‍त वोट किसी भी दल का गणित बिगाड़ सकता है।

यही कारण है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्‍व वाली आप मालवा में पूरा दम झोंकती रही है। 2017 के चुनाव में उसने यहां से 18 सीटें जीती थीं। इस बार भी वह यहीं के बूते गणित बिगाड़ना चाहती है। आप ही नहीं शिरोमणि अकाली दल (SAD) भी यहां अपनी मौजूदगी को फिर मजबूत करना चाहती है। अकाली दल ने इस क्षेत्र से 2012 में 33 सीटें जीती थीं। लेकिन, 2017 में उसकी सीटें घटकर 8 रह गई थीं। इस तरह उसने सत्‍ता भी गंवा दी थी। 23 सीटों वाले दोआब क्षेत्र में पारंपरिक तौर पर अकाली दल की पकड़ रही है।

कैप्‍टन से खफा रहा है डेरा
बेअदबी कांड को लेकर पंजाब में डेरा की भूमिका पर सवाल उठे थे। इससे डेरे की साख प्रभावित हुई थी। एसआईटी ने भी डेरे का कनेक्शन इस मामले से होने का संकेत दिया था। लिहाजा, डेरा कैप्टन से खफा है। यह मामला करीब साढ़े पांच साल पुराना है। 1 जून 2015 को दोपहर के वक्त पंजाब के बरगाड़ी से करीब पांच किमी दूर गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला में स्थित गुरुद्वारा साहिब से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूप चोरी हो गए थे।

25 सितंबर 2015 को बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब के पास हाथ से लिखे दो पोस्टर लगे मिले थे। ये पंजाबी भाषा में लिखे गए थे। आरोप है कि पोस्टर में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया था और इन स्वरूपों की चोरी में डेरा का हाथ होने की बात लिख सिख संगठनों को खुली चुनौती दी गई थी।

मार्च 2017 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद इस मामले की जांच फिर से शुरू हुई और जस्टिस रणजीत सिंह के नेतृत्व में जांच आयोग का गठन हुआ। इस आयोग ने 30 जून 2018 को अपनी रिपोर्ट सौंपी जिसमें बेअदबी मामलों में डेरा की भूमिका पर शक जताया गया था। माना जा रहा है डेरा से जुड़े नाराज दलित सिखों को अपने खेमे में बनाए रखने के लिए कांग्रेस ने यह कार्ड खेला है।

channi charanjit

Ramswaroop Mantri

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