धर्म और ज्योतिष दोनों में मकर संक्रांति पर्व को बहुत अहम माना गया है. इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं. पूरे साल मे पूजा-पाठ, त्योहार में काला रंग पहनना अशुभ होता है लेकिन मकर संक्रांति ऐसा पर्व है जिसमें खासतौर पर काला रंग पहना जाता है. आइए जानते हैं ऐसा क्यों.
उज्जैन. सनातन धर्म में मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत पावन और विशेष महत्व रखता है. यह पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जिसे शुभ परिवर्तन और नई ऊर्जा का संकेत माना जाता है. इस दिन सूर्य देव की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है और गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया जाता है. साथ ही दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है, जिसे अत्यंत फलदायी माना गया है. इस वर्ष 14 जनवरी को सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसी कारण पूरे देश में इसी दिन मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा. भारत के विभिन्न राज्यों में यह पर्व अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है. इस दिन आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सजा नजर आता है और उत्सव का माहौल चारों ओर छा जाता है.
पूजा-पाठ में क्यों नहीं पहनते काले कपड़े?
आमतौर पर हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ या शुभ अवसर पर काले वस्त्र पहनना वर्जित माना जाता है, लेकिन मकर संक्रांति एक ऐसा विशेष पर्व है जब काले कपड़े पहनना शुभ माना जाता है. आखिर क्यों इस दिन काले रंग को शुभ माना जाता है और इसके पीछे क्या धार्मिक व ज्योतिषीय कारण छिपा है. आइए जानते हैं उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज से इस बात का रहस्य.
मकर संक्रांति पर काला रंग पहनना क्यों माना जाता है शुभ?
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि देव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं. ज्योतिष शास्त्र और सनातन परंपराओं के अनुसार काले रंग का गहरा संबंध शनि देव से माना गया है. इसी कारण मकर संक्रांति के दिन काले वस्त्र धारण करने की परंपरा प्रचलित है. मान्यता है कि इस विशेष दिन काले रंग के कपड़े पहनने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है. इससे जीवन में चल रही बाधाओं, कष्टों और शनि दोष के प्रभाव में कमी आती है. यही वजह है कि महाराष्ट्र सहित दक्षिण भारत के कई हिस्सों में मकर संक्रांति के अवसर पर काले रंग के वस्त्र पहनना शुभ और लाभकारी माना जाता है.
मकर संक्रांति का पर्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन का भी प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि सूर्य देव के उत्तरायण होने के साथ ही धीरे-धीरे शीत ऋतु की विदाई शुरू हो जाती है और मौसम में बदलाव महसूस होने लगता है. हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ठंड अपने चरम पर होती है.
ऐसे में काले रंग के वस्त्र पहनना व्यावहारिक दृष्टि से भी लाभकारी माना गया है, क्योंकि काला रंग सूर्य की किरणों को अधिक अवशोषित करता है, जिससे शरीर को गर्माहट मिलती है. यही कारण है कि मकर संक्रांति के दिन काले कपड़े पहनने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे शुभ भी माना जाता है.





