प्रोफेसर डॉक्टर लाल रत्नाकर
हजारों साल से
परिवर्तन का दौर चल रहा है
परंतु पाखंड पीछा क्यों नहीं छोड़ रहा है ?
पाखंड परोसने वाले भी साथ – साथ चल रहे हैं।
क्योंकि उनका जीवन पाखंड से चल रहा है !
सत्य के सिपाही बार-बार हार क्यों जाते हैं ?
जीती हुई लड़ाई छोड़ जाते हैं !
आपस के तंत्र से !
पाखंडियों के बुद्धि विलास और आप दंभ से !
व्यापारियों का मेल और पाखंड का खेल !
क्यों नहीं बदलता जबकि दुनिया बदल गई है !
बैलगाड़ी से वायुयान पर आ गई है !
जनता मुफ्त का भोजन पा रही है !
फिर भी दिमाग ठिकाने नहीं लगा रही है !
क्योंकि उसके दिमाग को कैद कर लिया गया है !
पाखंड के हथियार से अंधविश्वास के बाजार से !
जो ऑनलाइन भी चल रहा है !
जुमलों के अत्याचार से परंपराओं का डर दिखाकर !
अन्याय के शिकंजे से मरने मारने के डर से !
अंधविश्वास का धुआं कर दिया गया है उसकी बुद्धि में !
अज्ञान का समंदर प्रवाहित कर दिया गया है !
नहीं पढ़ता वह ज्योतिबा फुले को !
नहीं मानता सावित्रीबाई फुले को !
पेरियार का तर्क उसकी समझ में नहीं आता !
कबीर चिल्ला चिल्ला कर कहते हैं !
उनकी बात नहीं सुनता !
सभार- विश्व प्रसिद्ध चित्रकार प्रोफेसर डॉक्टर लाल रत्नाकर, गाजियाबाद उप्र संपर्क - 98105 66808
संकलन -निर्मल कुमार शर्मा गाजियाबाद उप्र संपर्क - 9910629632Attachments area





