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बाबाओं का भूत सिर चढ़कर क्यों बोल रहा है ?

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                               *सुसंस्कृति परिहार

आसाराम, राम-रहीम बाबा के जेल में जाने के बावजूद बाबाओं का तिलिस्म जिस तेजी से बढ़ रहा है वह आश्चर्यचकित करने वाला है। आज जब पढ़ें लिखे युवा बाबाओं के पास पहुंचकर अर्जी लगाते हैं या कर्मचारी स्थानांतरण की मांग करते हैं तो अफसोस होता है ।सरे आम हिन्दू राष्ट्र बनाने में अपने आपको लगा, बताने वाले बागेश्वर धाम का पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री कहते दिख रहे हैं, ”किसी शादीशुदा स्त्री की दो पहचान हैं, सिंदूर और मंगलसूत्र. मांग का सिंदूर न हो, गले में मंगलसूत्र न हो, तो हम क्या समझते हैं कि भई ये प्लॉट अभी खाली है.” धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान पर क्या कहेंगे आप?  स्त्रियों के प्रति इस कथित हिंदू राष्ट्र निर्माता की सोच कितनी घृणित है यह महिलाओं को सोचना चाहिए गाहे-बगाहे यदि हिंदू राष्ट्र बन गया तो स्त्री की हालत दलितों से भी बदतर होगी। दिल की बात ज़ुबां पर आ ही जाती है।

बीते 60सालों में जितना प्रचार प्रसार अंधविश्वास और पाखंड के खिलाफ किया गया उसका असर जिन पर पड़ा है वे आज सनातन धर्म विरोधी माने जाते हैं।अंध श्रद्धा निर्मूलन अभियान के संस्थापक डा नरेन्द्र दाभोलकर को अंधश्रद्धा में डूबे व्यक्ति ने सरेआम मार डाला था।वे सनातनी हिन्दू थे। इससे पूर्व महात्मा गांधी को जो अंधविश्वास और रुढ़िवादी विचारों के खिलाफ थे सच्चे रामभक्त थे आज़ादी के नायक थे, सद्भभाव के प्रतीक थे उन्हें सनातनी नाथूराम ने मार डाला। इसका मतलब ये हुआ कि सनातन धर्म में पाखंडियों और अंधश्रद्धा रखने वालों का विरोध करने वाला हिन्दू नहीं या आज की भाषा में कहें तो सच्चा राष्ट्रभक्त नहीं है।तो क्या इन बाबाओं पर श्रद्धा रखना ही राष्ट्र भक्ति है उनके चमत्कार पर ताली बजाकर उनकी भक्ति में लीन होना ही सनातन धर्म है दूसरे शब्दों में कहें तो आज बाबाओं का अंधानुकरण ही राष्ट्रवादिता का परिचायक है।

 लगता है यही हाल रहा और बाबाओं का जादू यूं ही चलता रहा तो  सती प्रथा, बाल-विवाह भी एक दिन मान्य हो जायेंगे। विधवा विवाहों को बंद कर दिया जाएगा।लड़की का पढ़ना लिखना मुश्किल होगा।धर्म और जातपात के बन्धन में हम फिर जकड़ दिए जायेंगे।वही हिंदुत्व की पहचान होगी।तब लव-जिहाद के खिलाफ आग तेजतर होने लगेगी ।ऊपरी तौर पर ऐसा ही समझ में आता है पर ऐसा आज के प्रगतिशील दौर में संभव नहीं हो सकता ये बात वे भी जानते हैं तो क्या है हिंदुत्व के बहाने उनका लक्ष्य कुछ और है ।

आपने कभी इस बात पर गौर किया कि बाबा चुनाव काल में ही  क्यों मुखर हो जाते हैं। हिंदू मुस्लिम होने लगता है 2014 के आम चुनाव में बाबा रामदेव ने योगासनों के जरिए लोगों को जाल में फंसाया फिर वोट भाजपा को दिलवाई।तब जाके वे आज बाबा से कुशल व्यापारी बने। आज फिर हिंदू राष्ट्र निर्माण की बात क्यों बाबा कर रहे हैं वह भी बेखौफ होकर। वहीं अखंड भारत का सपना धूर्त बाबाओं द्वारा दिखाया जाने लगा है  यह उनकी चालाक नियत को दर्शाता है। वे जानते कि इन बातों का असर कमजोर हिंदू खासकर बहुजन समाज पर पड़ता है। सदियों से जिन्होंने राजाओं और उनके कारिंदो का दंश सहा है आज भी वे समाज में प्रताड़ित हैं, परेशान हैं क्योंकि वे बाबाओं के भ्रमजाल में शीघ्र ही फंस जाते हैं उन्हें जब शासन से वह सब प्राप्त नहीं होता जिसकी उन्हें दरकार है तो वे तथाकथित भगवानों के चरण वंदन में लग जाते हैं। सरकार के खिलाफ मोर्चा नहीं खोलते। पीड़ित महिलाओं की तादाद इनमें सर्वाधिक होती है।अब तो बेरोजगार लोग भी इन दरबारों में बड़ी संख्या में रोजगार मांगने जाने लगे हैं।

बाबाओं के पीछे कौन सी ताकत काम कर रही है इसका खुलासा बराबर जब तब हो जाता है यदि इसकी पड़ताल करें तो पाते हैं इसके पीछे संघ पोषित एक पूरा चैनल सक्रिय हैं जो भारत को हिंदू राष्ट्र में परिवर्तित करने एक और,अंतिम बार इसी मुद्दे पर चुनाव जीतना चाहते हैं। अगर देखें तो आज तो सोशल मीडिया में इसके लिए पहलकदमी करने वाले लोग भी जिम्मेदार है जिसके ज़रिए इन बाबाओं के झूठे करिश्माई किस्से जन जन तक पहुंच रहे हैं। दूसरे इसमें राजनैतिक लोगों का बड़ी तादाद में जाना लोगों को आकृष्ट करता है। प्रशासनिक अधिकारी भी इसमें धड़ल्ले से जाते हैं, फिल्मी कलाकार, पत्रकार भी स्वयं जब इनका यश गाएं तो समाज पर इसका असर तो होना ही है हालांकि राजनीति में आदिकाल से बाबाओं का हस्तक्षेप रहा किन्तु आज की राजनीति का जो घृणित स्वरुप नज़र आ रहा है वह दुखदाई है। अब तो चुनाव आयोग को धता बताते हुए एक बाबाजी मुख्यमंत्री बनाने के काम लग गए  हैं ये बात वे खुलकर कहने भी लगे हैं तथा मोदीजी के साथ भी बाबाजी के नकली वीडियो प्रदर्शित कर रहे हैं जिसका कहीं विरोध दिखाई नहीं देता मतलब साफ है। वहीं तथाकथित साध्वियां भी भी चाकू छुरी तेज रखने और सनातन के विरोध में बोलने वालों को मार देने की बात कहने लगी है ये सब दर्शाता है कि इन्हें वर्तमान सरकार का पूरा संरक्षण मिला हुआ है।

समय आज यह अपेक्षा करता है कि इन तथाकथित पाखंडी आडम्बरधारी बाबाओं से दूरी बनाएं ये सत्ता के एजेंट हैं और राजसी सुख भोग रहे हैं। इनसे आपका कतई कोई भला होने वाला नहीं है। पिछले साल से बाबाओं का यह संजाल फैला है मकसद साफ है हिंदु वोट का ध्रुवीकरण।इसके पीछे हिंदूवादी राष्ट्रद्रोही ताकतें हैं।सतर्क और सावधान रहें।

Ramswaroop Mantri

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