देश भर के गांधी जनों ने साबरमती सत्याग्रह आश्रम को बचाने के लिए सेवाग्राम से साबरमती आश्रम अहमदाबाद तक संदेश यात्रा निकाली और देश भर में प्रार्थना सभाएँ की। लेकिन सरकार ने अभी तक अपने रुख़ में कोई परिवर्तन नहीं किया है। बहुजन संवाद यूट्यूब चैनल पर आज ‘साबरमती सत्याग्रह आश्रम के कार्पोरेटीकरण का विरोध जरूरी क्यों?’ विषय पर परिचर्चा की गई।
इस परिचर्चा में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच इस देश की धरोवर को खतम करने की है। सादगी, स्वावलंबन जैसी गांधी जी की सोच को वे मानने वाले नहीं है। उनका नजरिया गांधी विरोधी है। वे गोड़से का समर्थन करने वालों के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोलते।
उड़ीसा से ग्रिन नोबेल पुरस्कार विजेता प्रफुल सामंतरा ने कहा कि सरकार की नीतियां गांधी जी के दर्शन को समाप्त करने की है। उनके सत्य, अहिंसा के सिद्धांत को खत्म करने की साजिश की जा रही है। हमें गांधी जी की विरासत को बचाने के लिए एकजुट होकर सामुहिक उपवास, धरना करना चाहिए।
उड़ीसा से राष्ट्र युवा संगठन के मानस पटनायक ने कहा कि साबरमती आश्रम गांधी जी की विरासत है , कोई पर्यटक स्थल नहीं है। हमें यहां से आजादी की प्रेरणा मिलती है।
अखिल भारतीय एआईडीएसओ के उपाध्यक्ष भाविक राजा ने कहा कि यह सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव कर रही है। क्रांतिकारियों के इतिहास को कैसे तोड़ मरोड़ किया जाए इसका प्रयास कर रही है और इतिहास में अपने अनुरूप परिवर्तन करने का प्रयास कर रही है।
अहमदाबाद से मानवाधिकार कार्यकर्ता देव देसाई ने कहा कि आज आश्रम को वैश्विक पहचान दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। गांधी जी पहले से ही वैश्विक है। जरूरत देश मे बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की है।
वर्धा से एन ए पी एम के, सर्वोदयी युवराज गटकल ने कहा कि गांधी जी, विनोबा भावे जी जहां रहते थे उस स्थान और वस्तुओं को देखकर हम उन महापुरुषों को अनुभव करते है लेकिन जब वहां कांक्रीट का जंगल खड़ा हो जाएगा, तब आने वाली पीढ़ी किस नजरिये से देखेंगी?
परिचर्चा का संचालन डॉ सुनीलम द्वारा किया गया तथा दृक श्रव्य संचालन टीआर आठ्या द्वारा किया गया।
साबरमती सत्याग्रह आश्रम के कार्पोरेटीकरण का विरोध जरूरी क्यों





