अग्नि आलोक
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‘गंगा मैया’ के साथ हो रहे इस बलात्कार पर आपत्ति क्यों नहीं है?

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गंगा_विलास केवल नाम ही नहीं रखा है। इसके भीतर विलासिता का भरपूर इंतजाम भी है। यह मां गंगा के साथ अनैतिक पापाचार तो है ही, गंगा की गोद में खेलने वाले करोड़ों दीनहीन निर्धन गंगा-पुत्रों की गरीबी का राजकीय उपहास है जो खुले आकाश में डोंगियां चलाकर गंगा और गंगाधर की प्रकारांतर आराधना करते हैं।अब इस दुर्दिन को मां गंगा ने खुद बुलाया है, तो हम हाथ मलने के सिवा कर ही क्या सकते हैं। अपनी जुबान से ज्यादा कड़वा बोलने की आदत नहीं है। इसलिए श्याम सिंह रावत जी का यह महत्वपूर्ण आलेख है, जरूर पढ़ लीजिए। ‌

गौरीशंकर अग्रवाल

भगीरथ तेरी गंगा मैली हो गई…!

श्याम सिंह रावत

आप उस समाज को क्या कहेंगे जो एक फिल्म में एक अभिनेत्री द्वारा बमुश्किल दो-तीन सेकेंड दिखाई देती नारंगी रंग की बिकिनी पहनने से कुपित होकर बवाल मचा देता है लेकिन अपनी ‘माँ के साथ हो रहे बलात्कार’ को अनदेखा-अनसुना कर देता है? 

यहां पर बात हो रही है उस समाज की जो गंगा को अपनी गंगा मैया कहते हुए पृथ्वी की सबसे पवित्र नदी कहता नहीं अघाता। वही नदी जिसे मोक्षदायिनी, पुण्य-सलिला, त्रि-पथगामिनी, पापनाशिनी और न जाने क्या-क्या कहते हुए उसके महात्म्य से ग्रंथों के अंबार लगा दिये गये हैं। जिसके जल की उपमा अमृत से दी जाती है। जो मृतात्माओं के उद्धार के लिए स्वर्गलोक से धरती पर लाई गई बताई जाती है। जिसमें गोता लगाकर लोग स्वयं को धन्य समझते हैं। जल का आचमन कर परमतृप्ति अनुभव करते हैं। यही नहीं उसे शीशियों में भरकर देश-दुनिया भर में ले जाकर उसे शुभ कार्य में छिड़क कर शुद्धिकरण करते हैं।

आज उसी गंगा मैया की बीच धार में अहंकारी सत्ताधारियों और उनके धनपशु मित्रों द्वारा शराब, कबाब और मौजमस्ती का इंतजाम कर दिया गया है, जहां हर रात मुर्ग मुसल्लम उड़ाया जा रहा है, शैंपेन व दुनियां की महंगी से महंगी शराब उंडेली जा रही है, हर रात अय्याशी भरी पार्टियां हो रही हैं। 

इस सब पर उन ‘बिकिनी द्रोहियों’ समेत तमाम पंडे, पुरोहितों, पुजारियों, ब्राह्मणों और भक्ति भाव में डूबे उसी हिंदू समाज ने आंख-कान-मुंह सब बंद कर लिये हैं जो गंगा किनारे हुक्का पीने पर हंगामा खड़ा कर मुकाबला दर्ज कर देता है, गंगा को अपनी मैया कहते नहीं अघाता, वही आज ‘गंगा-विलास क्रूज’ के विलासी यात्रियों द्वारा गंगा में लगातार 51 दिनों तक मांस-मदिरा व अय्याशी की पार्टियों तथा हगने-मूतने से आहत नहीं होता है, है न शर्म की बात!

गंगा-विलास क्रूज को स्वघोषित राष्ट्रवादी हिंदू प्रधान सेवक द्वारा वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर वाराणसी के रविदास घाट से रवाना किया जा चुका है। यह क्रूज गंगा नदी में 51 दिन की यात्रा कर वापस लौटेगा। इसमें यात्रा करने वाले सब विदेशी हैं। उनके लिए क्रूज में हर तरह का भोजन परोसा जाएगा, उम्दा वाइन, शैम्पेन, ‘प्रीमियम स्पिरिट’ आदि की पूरी व्यवस्था है। 

इस गंगा विलास क्रूज की संचालक कंपनी ‘अंतरा लग्जरी रिवर क्रूज’ की वेबसाइट पर जाकर देखा जा सकता है कि क्रूज के यात्रियों से क्या-क्या वादे किये गये हैं। वहीं से लेकर चार स्क्रीन शॉट नीचे दिये गये हैं।

एक फिल्म में गाना गाते हुए दो-तीन सेकेंड की क्लिप में हीरोइन द्वारा पहनी गई ऑरेंज कलर की टू पीस बिकिनी के रंग से मर्माहत होकर बवाल मचाने वालों को क्या अब हिंदू संस्कृति का इतना बड़ा अपमान दिखाई नहीं दे रहा है?

खुद को विश्वगुरु बताने वाले ज्ञानियों को अब अपनी ‘गंगा मैया’ के साथ हो रहे इस बलात्कार पर आपत्ति क्यों नहीं है? क्या वह बिकिनी विरोध सही और यह सवाल ग़लत है? हिंदू संस्कृति के इन स्वयंभू पहरेदारों में दोगलापन क्यों है? अब क्या ये किसी बिल में जाकर छिप गये हैं? 

#एकदा_जंबूद्वीपे

Ramswaroop Mantri

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