जीतू पटवारी ओबीसी वर्ग से आते हैं। एमपी में ओबीसी की आबादी को साधने के लिए राहुल गांधी ने बोल्ड फैसला लिया है। जीतू पटवारी राहुल गांधी की पसंद पर एमपी कांग्रेस के अध्यक्ष बने हैं। जीतू पटवारी मालवा-निमाड़ के बड़े चेहरे हैं। इस बार वह अपना चुनाव हार गए हैं।
भोपाल: मध्यप्रदेश कांग्रेस में आज से नई शुरुआत हो रही है। कमलनाथ को हटाकर प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए जीतू पटवारी आज पदभार ग्रहण करेंगे। जीतू पटवारी को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। जीतू पटवारी को हाई कमान की पसंद पर यह जिम्मेदारी दी गई है। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं की पसंद को दरकिनार कर यह जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है। बड़ी बात ये है कि जीतू पटवारी इस बार चुनाव हार गए हैं। वह, इंदौर जिले की राऊ विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे। राहुल गांधी के फैसले में उनके पिता राजीव गांधी की झलक देखने को मिली है।
2017 के बाद जीतू पटवारी राहुल गांधी के करीब आए थे। दरअसल, मंदसौर गोलीकांड में पांच किसानों की मौत हो गई थी। इस घटना से पूरे देश में सियासी उबाल था। ऐसे में राहुल गांधी ने मंदसौर का दौरा किया था। इस दौरान पुलिस के विरोध के बाद जीतू पटवारी ने राहुल गांधी को बाइक पर बैठाकर शहर का दौरा कराया था इसके बाद से वो राहुल गांधी की टीम में शामिल हो गए थे।
15 साल का राजनीति सफर
जीतू पटवारी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र नेता के रुप में की थी। उन्होंने इंदौर के शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय से पढ़ाई के साथ राजनीतिक की शुरुआत की। 15 साल की सियासत में जीतू पटवारी का ग्रोथ तेजी से हुआ। जीतू पटवारी ने युवा कांग्रेस से अपनी राजनीति शुरू की। पहली बार 2013 में राऊ विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने।
2018 के विधानसभा चुनाव से पहले पटवारी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद 2018 में फिर से राऊ विधानसभा सीट से दोबारा चुनाव जीते। 15 महीने की कमलनाथ सरकार में मंत्री बने। 2023 में विधानसभा का चुनाव बीजेपी उम्मीदवार से हार गए थे।
राजीव गांधी जैसा फैसला
राहुल गांधी ने 38 साल बाद मध्यप्रदेश में चौकाने वाला फैसला लिया है। राहुल गांधी के फैसले में राजीव गांधी वाली झलक देखने को मिली है। 1985 में राजीव गांधी ने 38 साल के दिग्विजय सिंह को मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सौंप दी थी। जब दिग्विजय को कमान सौंपी गई थी तब रेस में कई कद्दावर नेता थे लेकिन राजीव ने सभा को दरकिनार कर दिग्विजय को चुनाव था। उसके बाद 1993 में दिग्विजय सिंह सीएम भी बने थे।





