
निर्मल कुमार शर्मा
आखिर इस देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के विभिन्न इलाकों में कुछ-कुछ समयांतराल के बाद बार-बार आग क्यों लग जाती है, जिससे बेचारे सैकड़ों मजदूरों की आग में जलकर अकाल मृत्यु हो जाती है ! क्या इस देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में, जहां इस देश के सबसे बड़ा ब्यूरोक्रेट भारतीय राष्ट्र राज्य का राष्ट्रपति बैठते हों, संसदीय व्यवस्था का सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री यहीं रहते हों,इसके अलावा गृहमंत्री,रक्षा मंत्री,तीनों सेनाओं के सेनाध्यक्ष रहते हों ! उसी दिल्ली में होटलों के मालिक, स्कूलों के मालिक,फैक्ट्रियों के मालिक इतने ताकतवर और उदंडता की हद तक निरंकुश कैसे हो गए हैं कि वे किसी भी सुरक्षा इंतजामों,नियमों को नहीं मानते हैं ? उक्त वर्णित बातें तो निश्चित रूप से हैं, लेकिन इसमें और भी एक बात सम्मिलित है,वह यह कि इस देश की नौकरशाही इतनी रिश्वतखोर और व्यभिचारी हो गई है,कि आज भारत की यह स्थिति हो गई है कि आप कितना भी गैरकानूनी, असंसदीय,असंवैधानिक काम आज के नौकरशाहों से करवा सकते हैं,इसके लिए केवल उन्हें उचित मेहनताना या दूसरे शब्दों में रिश्वत खिला दीजिए,आपका सारा गैरकानूनी, असंसदीय,असंवैधानिक काम उन रिश्वतखोर नौकरशाहों को रिश्वत खिलाते ही कानूनी, संसदीय और संवैधानिक हो जाएगा ! इस देश की कथित व्यवस्था की यही कटु सच्चाई है !
मुंडका मेट्रो स्टेशन से मात्र 100मीटर की दूरी पर मेट्रो पिलर संख्या 544के बिल्कुल पास में एक तीन मंजिले भवन में,जिसके प्रथम तल पर सीसीटीवी कैमरे और राउटर बनानेवाली एक कंपनी में आग शाम को लगभग 4.45 पर लगी,उस समय उस भवन में लगभग 100 लोगों के होने की सूचना है,जिसमें से 27मजदूरों या कर्मचारियों की तुरंत मौत हो गई है,40 मजदूर भयंकर रूप से घायल हैं ! विभिन्न समाचार पत्रों के अनुसार इस इमारत के लिए इसके मालिकों को अग्नि शमन विभाग का कोई अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया है ! सबसे भयावह स्थिति यह भी है कि आकस्मिक आग लगने की स्थिति में इस भवन से बाहर निकल सकने के लिए कोई आपातकालीन दरवाजे भी नहीं हैं ! जाहिर सी बात है कि इस बिल्डिंग में उक्त वर्णित सामान बनाने की फैक्ट्री रिश्वत ले-देकर पूर्णतया गैरकानूनी और अवैध रूप से चल रही थी !
सबसे खेद की बात है कि देश की राजधानी दिल्ली में आग से बचाव के लिए भी जो चुस्तीफुर्ती,बचाव के उपकरण और प्रशिक्षण होना चाहिए,वे कहीं नहीं दिखते ! अब आइए इस देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र में विगत् में कुछ प्रमुख आग लगने की बेहद लोमहर्षक और भयावतम् दुर्घटनाओं को याद करते हैं ! 13जून 1997 को दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में स्थित उपहार सिनेमा भवन में भयंकरतम् आग लगी थी,जो एक विद्युत ट्रांसफार्मर के ऊपरी मंजिल पर अवैध रूप से चल रहा था,इस दुर्घटना में 59लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे थे ! फ़रवरी 2019 में करोलबाग के एक होटल अर्पित पैलेस में शार्ट सर्किट से लगी आग में केरल के एक ही परिवार के तीन लोगों समेत,17 लोगों की मौत हो गई थी,वर्ष 2019को 8 दिसम्बर को तड़के लगभग पौने चार बजे दिल्ली के रानी झांसी रोड स्थित अनाज मंडी की तंग गलियों मेंं प्लास्टिक आइटम,कागज और अन्य बहुत सी अतिज्वलनशील पदार्थों के प्रयोग करके लेडिज पर्स और बैग बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री में बिजली के सॉर्ट सर्किट या किन्हीं अन्य कारणों से लगी भीषण आग में 43 गरीब मजदूर हादसा स्थल पर ही जलकर मर गये थे ! साल 2018 में 21 जनवरी को बवाना क्षेत्र में एक अवैध पटाखा फैक्टरी में लगी आग से 9 महिलाओं और एक लड़की सहित 17 लोग जिन्दा जल गये । 21 नवम्बर 2011 को नन्दनगरी में हुए भयंकर अग्नि हादसे में 15 किन्नरों की जलकर मौत हो गई थी !
मिडिया के अनुसार आग लगने की घटनाओं में केवल चार वर्षों 2014 से 2017 तक कुल 80616 हुई घटनाओं में कुल 6154 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और 847लोगों की मौत हो चुकी है !
प्रश्न है कि ‘जीवन से बड़ी कोई चीज नहीं है,जीवन नहीं तो आग में जलकर मरने वाले उस व्यक्ति के लिए भी कुछ भी नहीं है ‘,तो इस तरह की दुःखद घटनाओं में इतनी लापरवाही क्यों ? हर दुर्घटना के बाद समवेदना के वही रटे-रटाए,घिसे-पिटे शब्द,मुआवजे,और मजिस्ट्रेटी जाँच बैठा दी जाती है ! आखिर इससे क्या हासिल होता है ?यहाँ सरकार के सत्तारूढ़ पक्ष या विपक्ष के किसी भी शख्स का यह बयान क्यों नहीं आता कि ‘भविष्य में इस तरह के हादसे न हों,इसके लिए हमारी सरकार फुलप्रूफ इंतजाम करेगी। ‘
इतनी बड़ी संख्या में आग लगने से निरपराध व गरीब मजदूरों के मरने की दुखद घटनाओं के होने के बावजूद भी अभी भी दिल्ली में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के बल पर तमाम अवैध कारखाने, रेस्तरां,होटल, स्कूल, कोचिंग सेंटर आदि बिना किसी आग से बचाव के उपकरण और प्रशिक्षण के चल रहे हैं। दिल्ली के मुंडका इलाके में इस दुर्घटना के बाद भी भविष्य के लिए हमारी सरकारें और इनकी व्यवस्थाओं में कोई सुधार होगा यह कोई जरूरी नहीं है ! किसी भी दुर्घटना के बाद मृतकों और घायलों को मुआवजा बाँट देना,उस समस्या या दुर्घटना का कोई स्थाई समाधान नहीं है । समाधान तो यह होना चाहिए कि उक्त वर्णित दुखद घटनाओं के होने के कारणों को निस्तारित किया जाना चाहिए,ताकि भविष्य में उस दुर्घटना की पुनरावृत्ति न हो या न्यूनतम् हो लेकिन बहुत बहुत अफसोस दुखदरुप से अपने देश में यही काम नहीं होता है ! केवल जमकर लीपापोती की जाती है ! आकंठ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी में डूबे अफसर एक दूसरे को बचाने का अपने अधिकतम् प्रभाव,बल और पैसे का दुरूपयोग करते हैं ! इस देश की यही वास्तविकता, कटु सच्चाई और कटु यथार्थ है !
विकसित देशों में भी आग लगने की घटनाएं जब-तब सुनाई दे जातीं हैं,परन्तु भारत के गाँवों और दूरदराज़ की बात छोड़िए,इस देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इतनी ज्यादे संख्या में आग लगने की घटनाओं का होना और हजारों गरीब मजदूरों का असमय काल के गाल में समा जाना,इस देश की राजनैतिक,प्रशासनिक विफलता को प्रदर्शित करता है। इसके निराकरण के लिए मानवीय प्रयास होने ही चाहिए आखिर गरीब मजदूरों का जीवन,उनके अनाथ हुए बच्चे,उनकी विधवा बीबियां और उनके बेसहारा बूढ़े माँबाप का जीवन भी उतना ही महत्वपूर्ण है,जितना इस देश के किसी अतिविशिष्ट व्यक्ति का ! लेकिन भारत जैसे देश में आकंठ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी में डूबे अफसर एक दूसरे को बचाने का अपने अधिकतम् राजनैतिक प्रभाव,बल, रसूख और पैसे का दुरूपयोग करते हैं ! इस देश की यही वास्तविकता,कटु सच्चाई और कटु यथार्थ है !
-निर्मल कुमार शर्मा 'गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के सुप्रतिष्ठित समाचार पत्र-पत्रिकाओं में वैज्ञानिक,सामाजिक, राजनैतिक,पर्यावरण आदि विषयों पर स्वतंत्र,निष्पक्ष,बेखौफ, आमजनहितैषी,न्यायोचित व समसामयिक लेखन




