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दुनिया के खुशहाली रिपोर्ट सूची में भारत के लोग इतने दु :खी क्यों ?

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Nirmal Kumar Sharma - YouTube

निर्मल कुमार शर्मा,

अभी पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2022 जारी की गई है, जिसके अनुसार आम जनता की खुशहाली के मामले में हमारा कथित आर्थिक महाशक्ति, विश्व गुरु और आध्यात्मिक गुरु बनने को आतुर देश कुल 146 देशों की सूची में 136 वें नंबर के दयनीय पायदान पर खड़ा है। हमारे देश के सत्ता के बेशर्म कर्णधारों को अगर जरा भी हया बची हो,तो उन्हें अपने आर्थिक नीतियों और इस देश को चलाने के लिए अपनी अन्य नीतियों पर भी एकबार पुनर्विचार जरूर कर लेना चाहिए कि आखिर हमारे देश की इतनी दयनीय स्थिति आखिर क्यों हो गई है,कि हमारे सभी पड़ोसी देश यथा चीन 72वें नंबर है पर है,नेपाल 84वें,बाँग्ला देश 94वें, पाकिस्तान 121 वें, म्यांमार 126 वें और श्रीलंका 127 वें नंबर पर होकर हमसे आगे हैं और हम बेशर्मी से 136वें नंबर पर खड़े हैं,शर्म की और डूब मरनेवाली बात यह भी है कि इस सूची में भूखमरी से त्रस्त अफ्रीकी देश इथियोपिया, कैमरून,गाना, यूगांडा और नामिबिया जैसे देश खड़े हैं आज ये देश हमारे देश से खुशहाली के मामले में हम से बेहतर स्थिति में हैं ! भारत जैसे बड़े आकार की उपजाऊ और उर्वर भूमि अमेरिका,चीन,रूस और आस्ट्रेलिया तक में नहीं है,यहाँ के उन्नत मस्तिष्क वाले टेक्नीशियन, डॉक्टर,इंजीनियर,वैज्ञानिक अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में जाकर अपनी प्रतिभा से नोबेल जैसे पुरस्कार प्राप्त कर रहे हैं। आखिर क्या कारण है कि यहाँ की समस्त आवाम और जनता इतनी गरीब,दुःखी,क्षुब्ध और व्यथित है ! इसका बहुत कुछ जबाब इस लेख मे ऊपर वर्णित किया जा चुका है। पुनः इस बात को रेखांकित करना चाहते हैं कि आज भारत की समस्त जनता वर्तमानसमय के कर्णधारों के जनविरोधी दुर्नीतियों की वजह से अपने वर्तमान समय में तो अत्यंत दुःखी है ही,अपने भविष्य के लिए भी डरी हुई है,पूरे देश का माहौल नारकीय बना हुआ है। इस भयावह स्थिति में इस देश की जनता खुश कैसे रह सकती है ?भारत के अरबों लोगों को जानबूझकर दुःखी,गरीब,अशिक्षित,बेरोजगार और मानसिक रूप से तनावपूर्ण वातावरण बनाने के लिए सीधे वर्तमानसमय के निरंकुश,दंगाजीवी, बलात्कारजीवी,हत्याजीवी और फॉसिस्ट मानसिकता के सत्ता के कर्णधार जिम्मेदार हैं।
किसी भी देश की जनता या वहाँ का समाज तभी खुश रह सकता है,जब वह अपने वर्तमान समय में हर तरह से सुखी हो,आत्मसंतुष्ट हो और अपने भविष्य के प्रति किसी भी प्रकार से आशंकित या सशंकित न हो,आज भारत के लोगों में वर्तमानसमय के सत्ता के कर्णधारों की दुर्नीतियों और गलत नीतियों से उपर्युक्तवर्णित ये दोनों चीजें बिल्कुल सिरे से गायब हैं,आज भारत की समस्त जनता अपने वर्तमान जीवन की दुरूहताओं और परेशानियों से दुःखी,परेशान और निराश है तथा मानसिक रूप से बेहद तनाव में तो है ही,अपने भविष्य के प्रति भी बुरी तरह से भयाक्रांत और डरी हुई है। वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2022 के अनुसार दुनिया में शीर्ष पर रहनेवाले देशों जैसे फीनलैंड,नार्वे,स्वीडन,डेनमार्क आदि देशों में वहाँ की सरकारें अपने लोगों के जीवन का रास्ता सुगम और आरामदेह बनाने के लिए भरसक और अधिकतम प्रयत्नशील हैं,उदारणार्थ उन देशों में हफ्ते में केवल 5 दिन का कार्यदिवस और प्रतिदिन सिर्फ 4 घंटे का ही कार्य का समय होता है,कार्यस्थल पर वातावरण सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए हर तरह से आरामदायक और उनकी शारीरिक व मानसिक क्षमता के अनुरूप होता है। इन खुशहाल देशों में भविष्य में काम की गारंटी,बुढ़ापे में सुखी जीवन की सुनिश्चिंतता के लिए पेंशन मिलने की पूर्ण गारंटी,छुट्टियों की सुविधा और वेतन इतनी ज्यादे कि वहाँ के सभी लोग अपना जीवन खूब बढ़िया ढंग से जीते हैं,कोई भ्रष्टाचार नहीं,कोई रिश्वत नहीं, कोई जातिवादी वैमनस्यता नहीं,कोई धार्मिक कटुता से दंगे-फसाद नहीं,कोई मॉबलिंचिंग नहीं,वहां के किसान अपनी फसलों की जायज कीमत पाते हैं,अपवाद स्वरूप किसान को खुले बाजार में उनकी फसल की कीमत उस फसल के लागतमूल्य से कम मिलती है,तो उस स्थिति में वहाँ की सरकारें सब्सिडी के रूप में स्वयं उनकी भरपाई किसानों को कर देतीं हैं,इसीलिए वहाँ अपनी फसल की साल-दर-साल उचित मूल्य न मिलने की स्थिति में एक भी किसान खुदकुशी को बाध्य नहीं किया जाता ! वहाँ अपने बच्चों की शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार के लिए कोई भी अभिभावक परेशान नहीं है,वहाँ शोषण के लिए एक भी पब्लिक स्कूल मतलब प्राइवेट स्कूल नहीं हैं,वहाँ के सभी बच्चे हर सुख-सुविधा से सम्पन्न सरकारी स्कूलों में लगभग निःशुल्क या नाममात्र की फीस में और पौष्टिक और स्वच्छ आहार के साथ प्राइमरी से 12 वीं तक की कक्षाओं में पढ़ते हैं। उसके बाद भी उच्च शिक्षा संस्थानों में फीस इतनी ही निर्धारित की जाती है कि वहाँ हर बच्चे उच्च शिक्षा भी प्राप्त कर लें। वहाँ हर छात्र को ऐसी तकनीकी या उपयोगी शिक्षा दी जाती है कि वे अपनी शिक्षा पूर्ण करते ही किसी न किसी रोजगार में लग जाते हैं। वहाँ की सरकारें अपने हर नागरिक की अच्छी शिक्षा,अच्छे स्वास्थ्य और रोजगार की सुनिश्चित गाऱटी देतीं हैं।
वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2022 में टॉप के सुखी देशों के नीतियों के ठीक विपरीत भारत में वर्तमानसमय की सरकार के कर्णधार इस संपूर्ण देश की जनता को तनाव,बेरोजगारी, अशिक्षा,भ्रष्टाचार,रिश्वतखोरी,भूखमरी,दंगे-फसाद आदि के नरक में धकेलने के लिए पूरी तरह आमादा और उतावले हैं,हजारों सालों से छिटपुट अपवादों को छोड़ दें तो यहाँ सभी धर्मों और जातियों के लोगों के मिल-जुलकर रहने की गंगा-जमुनी संस्कृति में पलीता लगाकर इस देश को जातिवाद व धार्मिकवैमनस्यता तथा धार्मिकसंकीर्णता की आग में झोंककर दंगे कराकर हिन्दू-मुस्लिम समुदायों में खूब कटुता और वैमनस्यता बढ़ाकर कर उनका ध्रुवीकरण करके यहाँ की बहुसंख्यक धर्मभीरु,अशिक्षित व मूढ़ हिन्दूओं के वोटों के बल पर सत्ता में बने रहना चाहते हैं,वे शिक्षा में सुधार करने के कदमों के ठीक विपरीत यहाँ के शिक्षा का निजीकरण करके,ऊँची फीस बढ़ाकर,सरकारी स्कूलों के भवन नीलाम करके बहुसंख्यक,गरीब व मध्यवर्ग को शिक्षा से वंचित करने की अक्षम्य साजिश कर रहे हैं,रोजगार पैदा करने के बजाय तमाम सरकारी व सार्वजनिक प्रतिष्ठित संस्थानों को बेचकर,उसमें कार्यरत करोड़ों कर्मचारियों को बेरोजगारी के दलदल में धकेल रहे हैं। बेरोजगारी से त्रस्त युवाओं,आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं,ठेके के शिक्षकों आदि लोगों द्वारा रोजगार माँगने पर उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में उन पर पुलिस की लाठियों से उनका सिर फोड़कर उनका बुरी तरह से दमन किया जाता है,श्रम सुधार के नाम पर वर्तमान 8 घंटे के कार्यसमय को घटाने के बजाय उसे 12 घंटे कर दिया गया है,उन कंपनियों को,जिनमें 300 तक कर्मचारी या मजदूर हैं अब उन्हें यह अमानवीय अधिकार दे दिया गया है कि वे जब चाहे अपने कर्मचारियों या मजदूरों को निकाल कर,उन्हें बाहर कर उन्हें भूखों मरने के लिए सड़क पर छोड़ सकते हैं। यहाँ वर्तमान समय की सरकार के कर्णधारों को आम जनता,किसानों,मजदूरों के जीवन और उनके सुख-दुःख से कोई मतलब ही नहीं है,उन्हें केवल अडानी और अंबानी जैसे पूँजीपतियों के खरबपति बनवाने में रूचि है ! आज अंबानी की एक मिनट की आमदनी 23 लाख रूपये है मतलब महीने में उसकी आमदनी 99अरब 36 करोड़ रुपये है,उधर अपनी फसल की कई दशकों से लागतमूल्य भी न मिल पाने की वजह से पिछले तीन दशकों में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार इसी देश के 4 लाख किसान और लगभग इतने ही बेरोजगारी से त्रस्त विद्यार्थी खुदकुशी करके मौत के मुँह में चले गए, इतना होने के बावजूद इस देश में अंबानी और अडानी की सम्पत्ति गुणात्मक तौर पर बढ़ रही है ! जीडीपी का कुटिल खेल देखिए,अगर उन 4 लाख खुदकुशी कर चुके किसानों और अंबानी के प्रतिमाह 99 अरब 36 करोड़ प्रतिमाह का औसत निकाल दें,तो प्रति किसान की प्रतिमाह औसत आमदनी भी एक लाख पैसठ हजार नौ सौ रूपये बैठती है,जबकि वे आमदनी के बजाय हर साल घाटे से होनेवाले नुकसान से मानसिक अवसाद ग्रस्त होकर आत्महत्या करने को बाध्य हुए। यही जीडीपी के आँकड़ों का छद्म और कुटिल कथित अर्थशास्त्र है। वैसे भी भारत जीडीपी के मामले में -23.9 के आँकड़े के आधार पर फिसड्डी बन चुका है ! केन्द्र से लेकर राज्य सरकार के कर्मचारियों की पेंशन खत्म कर दी गई है,जो बुढ़ापे की लाठी होती है, यहां निजीकरण के नाम करोड़ों नौकरियों को ही खत्म करने की कुत्सित खेल अनवरत जारी है !अब हिन्दू-मुस्लिम वैमनस्यता का बीज बोने के लिए वर्तमान मोदी सरकार अपने किए अपराधिक कुकृत्यों यथा गुजरात दंगे,दिल्ली दंगे,पुलवामा कांड और उत्तर प्रदेश में ईवीएम घोटाले आदि को ढकने के लिए एक काल्पनिक वह फर्जी ‘कश्मीर फाइल्स ‘ नामक फिल्म ले आई है ! जिससे पूरे भारतीय समाज में जातीय व धार्मिक वैमनस्यता का नंगा नाच होने वाला है !

निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा पत्र-पत्रिकाओं में निष्पृह,निष्पक्ष और बेखौफ लेखन ‘ ,जी-181-ए,एच.आई.जी. फ्लैट्स,डबल स्टोरी, सेक्टर-11,प्रताप विहार, गाजियाबाद,

Ramswaroop Mantri

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