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2022 के अंत तक क्या दिवालिया हो जाएगा देश?

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पवन सिंह
आने वाले दिन देश के लिए बहुत ही भयावह होने वाले हैं। मैं लगातार बैंकिंग सेक्टर के धराशाई होने को लेकर लिखता रहा हूं और मेरी बात सही साबित हो रही है। धीरे-धीरे सरकारी बैंकों की कमर टूट रही है। 2022 के समाप्त होते-होते देश की आर्थिक स्थिति बहुत ही बुरे दौर‌ में पहुंच चुकी होगी।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सेंट्रल बोर्ड बैठक में बड़ा फैसला हुआ था कि 99,122 करोड़ रुपये के सरप्लस अमाउंट को केंद्र सरकार को ट्रांसफर कर दिया जाए।
केद्रीय बैंक की ओर से जारी एक स्टेटमेंट में कहा गया था कि सरप्लस अमाउंट 31 मार्च, 2021 को समाप्त हो रही नौ महीने के अकाउटिंग पीरियड के लिए सरकार को ट्रांसफर की जाएगी और वह ट्रांसफर हो गई। यह फ़ैसला RBI गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की
बैठक में ये अहम फैसला लिया गया था। मोदी सरकार लगातार रिजर्व बैंक के रिजर्व फंड से पैसे ले रही है।
आरबीआई की ओर से जारी की गई रिलीज के मुताबिक सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 589वीं बैठक में आर्थिक परिस्थितियों जैसे वैश्विक व घरेलू चुनौतियों की समीक्षा की गई। इस बैठक में कोरोना महामारी की दूसरी लहर पर भी चर्चा की गई थी और इकोनॉमी पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए भी RBI ने चर्चा की।‌ यह पहली बार नहीं है जब रिजर्व बैंक से पैसा लिया गया है।
साल करोड़ रु
2015-16 65, 876
2016-17 30,659
2017-18 50,000
2018-19 1,75,987
2019-20 57,128
2020-21 99,122
इधर IMF यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर और चिंता बढ़ा दी है।‌ IMF के मुताबिक़, GDP के अनुपात में 99% का कर्ज देश पर हो जाएगा। अगर किसी को कोई मुगालता है या वो इसे मज़ाक में ले रहा है, उस पर‌ मुझे कुछ नहीं कहना है लेकिन सच यह है कि अब आर्थिक सुनामी के लिए लोगों को कमर कस लेनी चाहिए। इकोनामी डिजास्टर करीब और‌ करीब आता जा रहा है। कोविड का जब पहला केस केरल में मिला था और सरकार विपक्ष के एक नेता का मजाक उड़ा रही थी तब भी मैंने लिखा था कि लोग अपनों की लाशें कंधों पर ढोएंगे और कोई आंसू पोंछने वाला नहीं होगा। आखिरकार 50 लाख से ज्यादा लोग जानवरों की तरह मारे गये। 2021 के अंत तक देश की आर्थिक स्थिति बहुत कुछ बयां करने लगेगी, वह बात अलग है कि देश का बिका हुआ मीडिया आपको अफगानिस्तान, पाकिस्तान,मुल्ला, मंदिर-मस्जिद में उलझाए रखे लेकिन कब तक? एक न एक दिन नंगा सच आपको नजर आने ही लगेगा। IMF ने हाल ही में घोषणा की है कि कोविड के कारण भारत के सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में ऋण 74% से बढ़कर 90% हो गया है। बकौल IMF यह 2021 में बढ़ाकर 99% हो जायेगा। भारत की एक बड़ी शेयर ब्रोकरेज कंपनी मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने‌ भी यही कहा है। ओसवाल के अनुसार पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में केंद्र एवं राज्यों का संयुक्त रूप से कर्ज-जीडीपी अनुपात 75 फीसदी के करीब था, इस साल यह 91 फीसदी पर पहुंच गया है। भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना के हमले से पहले ही धीमी नीचे सरकने लगी थी। वित्त वर्ष 2019-20 में जीडीपी गिर कर 4.2 फीसदी पर पहुंच चुकी थी। मार्च, 2020 में यह घटकर 3.1 फीसदी तक पहुंच गई। अब हालात बद से बद्तर हो चले हैं। बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट कह रही कि विगत वर्ष सरकार पर कुल कर्ज 147 लाख करोड़ था लेकिन उस समय जीडीपी 194 लाख करोड़ थी। केंद्र सरकार ने इस वित्त वर्ष यानी 2021-22 में 12 लाख करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेने का निर्णय लिया है।‌ देश की जीडीपी लगातार सिकुड़ रही हैं और कर्ज का पहाड़ ऐवरेस्ट जैसा हो रहा है।‌ देश के तमाम अर्थशास्त्रियों के अनुसार यदि किसी देश में जीडीपी की तुलना में कर्ज का अनुपात 72 फीसदी से ज्यादा हो जाता है, तो इसका सीधा असर आर्थिक वृद्धि दर पर पड़ता है और यही देश में हो रहा है।
दूसरी ओर चीन और दक्षिण कोरिया ने अर्थव्यवस्था के नजरिए से कमाल किया है। ये ऐसे देश हैं जो कि कोविड-19 को शुरुआत में दबाने में सफल रहे हैं। चीन की अर्थव्यवस्था साल 2021 में 8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ सकती है। चीन का ग्रोथ रेट महामारी से पहले दुनिया के सबसे सफल पश्चिमी देशों के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा रह सकता है। मोटे तौर पर निर्यात पर टिकी हुई चीन की अर्थव्यवस्था को पश्चिमी देशों में हुए लॉकडाउन का फायदा मिला है. मनोरंजन और ट्रैवल जैसी सर्विसेज के लिए भले ही पश्चिमी देशों की डिमांड में गिरावट आई है। ऊंचे टैरिफ के बावजूद अमरीका को चीन से होने वाला निर्यात रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंच गया है। पूरे एशिया में भी चीन अपना आर्थिक प्रभाव बढ़ा रहा है। पैसिफिक में एक नए फ्री ट्रेड जोन और यूरोप से लेकर अफ्रीका तक में अपने ट्रेड रूट्स के इर्दगिर्द भारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के बूते चीन अपना दबदबा बना रहा है। सेमीकंडक्टरों जैसे कंपोनेंट्स पर पश्चिमी देशों की सप्लाई चेन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए चीन एडवांस टेक्नोलॉजीज पर भी निवेश कर रहा है। अगले पांच साल में चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा और वह इस मामले में अमरीका को पीछे छोड़ देगा. यह पहले के अनुमान के मुकाबले दोगुनी रफ्तार से सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
इधर भारत है जो लगातार गोता लगा रहा है।‌ खुशहाली के मामले में 149 देशों की सूची में भारत को 139वें पायदान पर रखा गया है, जो स्पष्ट तौर पर यह दिखाता है कि भारत में लोग उतना खुश नहीं हैं जितने कि अन्य देशों के लोग हैं। गौरतलब है कि 2019 में भारत को 140 वां स्थान मिला था।

Ramswaroop Mantri

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