बुंदेलखंड की क्रिकेटर क्रांति गौड़ ने विश्वकप जीतकर भारत का नाम रोशन किया है. बचपन में भाई के जूते पहनकर खेलने वाली क्रांति की सफलता के पीछे कोच सोनू वाल्मीकि की अहम भूमिका रही. मां ने गहने बेचे, पिता ने मजदूरी की, और आज उसी मेहनत का फल है कि क्रांति भारत की नई क्रिकेट सनसनी बन गई हैं.
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की नई सनसनी बनी ‘क्रांति गौंड’ की पूरे देश में चर्चा हो रही है. विश्वकप जीतने के साथ क्रांति ने बुंदेलखंड का परचम पूरी दुनिया में फहरा दिया है, लेकिन क्रांति के लिए यह सब कुछ सपने जैसा ही रहा है, क्योंकि जिसने अपना पहला मैच भाई के जूते और अनजान खिलाड़ी की ड्रेस पहनकर खेला था. क्रिकेट के लिए, जिसकी मां ने गहने बेचे, पिता ने मजदूरी की आज टीम के विश्व चैंपियन बनने के बाद उस पर धन वर्षा हो रही है, लेकिन यह सब अचानक नहीं हुआ है. इसके पीछे क्रांति की 8 साल की मेहनत जुनून और सागर के जाने माने क्रिकेट कोच सोनू वाल्मीकि की पारखी नजरों का कमाल है, जिन्होंने पहली बार देखते ही उसकी प्रतिभा को पहचान लिया था. सोनू ने ही क्रांति को अपनी टीम की ओर से पहले मैच में ब्रेक देकर विश्व कप फाइनल के लिए खेलने का रास्ता जैसे तभी तय कर दिया था.
बुंदेलखंड के छोटे से गांव घुवारा से निकलकर इंटरनेशनल तक का सफर करने वाली क्रांति के कोच सोनू वाल्मीकि ने लोकल 18 से बात करते हुए वह किस्सा साझा करते हुए बताया कैसे एक अनपेक्षित खोज ने ”रोहिणी” को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर “क्रांति गौड़” के रूप में स्थापित कर दिया. दरअसल, यह बात आज से ठीक 8 साल पहले की है, जब 25 नवंबर 2017 को छतरपुर जिले के घुवारा में स्व. राज बहादुर सिंह स्मृति क्रिकेट टूर्नामेंट में लड़कियों का एक शो मैच आयोजित किया गया था, जिसमें सोनू वाल्मीकि सागर से लड़कियों की टीम लेकर पहुंचे थे, लेकिन किसी कारण की वजह से टीम में एक खिलाड़ी कम पड़ गई, तभी सोनू की नजर ग्राउंड पर अकेले शैडो प्रैक्टिस कर रही एक लड़की पर पड़ी. सोनू बताते हैं, ”मेरी आंखें चमक गईं.” उस लड़की ने अपना नाम रोहिणी बताया, जो अपने भाइयों के साथ क्रिकेट खेलती थी.
क्रांति ने भाई के जूते पहनकर जीता पहला ”मैन ऑफ द मैच”
गौर क्रिकेट अकादमी के कोच सोनू आगे बताते हैं कि मेरे पास एक खिलाड़ी की कमी जानने के बाद रोहिणी सागर की टीम से खेलने के लिए तुरंत तैयार हो गई, तो मेरी एक खिलाड़ी एक्स्ट्रा ड्रेस लेकर गई थी, जो क्रांति को पहना दी, लेकिन जूते की समस्या खड़ी हो गई. इस पर तत्काल अपने घर पहुंची. वहां से भाई के जूते पहनकर आ गई. जूते की साइज बड़ी होने की वजह से उससे ठीक से चलते नहीं बन रहा थ, लेकिन उसमें उत्साह जोश और जुनून अलग ही था. इस मैच में उसने दो विकेट लिए और तीसरे नंबर पर बैटिंग करते हुए 27 रन की शानदार पारी खेली, जिसके चलते सागर की टीम में जीत गई और उसे समय की रोहिणी को शानदार प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच से नवाजा गया.
इसके बाद इस मैच के आयोजन कमेटी मेंबर और जन् प्रतिनिधियों ने इस बच्ची को शिक्षा देने की बात कही इसके बाद रोहिणी ने सागर आकर मेरी क्रिकेट अकादमी को ज्वाइन किया. उसे समय स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से मैंने फीस माफ कर दी थी. कहीं से क्रिकेट किट का भी इंतजाम करवा दिया था और उसने मौसी के घर मकरोनिया में रहकर अपनी ट्रेनिंग शुरू की थी. कुछ समय के बाद वह सागर जिला टीम में सिलेक्शन हो गया और इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. सागर के बाद वह छतरपुर टीम के लिए खेलने लगी थी जहां कोच राजीव बिल्थरे का मार्गदर्शन मिला इसके बाद डिवीजन क्रिकेट अंडर 16 में उसे कप्तान बनाया गया था सागर डिवीजन ने पहली बार उसकी कप्तानी में टूर्नामेंट जीता था.
कोच सोनू ने स्पष्ट किया कि शुरुआती दौर में रोहिणी के नाम से पुकारी जाने वाली यह खिलाड़ी जब डिस्ट्रिक्ट, डिविजन और बोर्ड की टीम में सिलेक्ट होने लगी, तब शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर उनका आधिकारिक नाम क्रांति गौड़ उपयोग होने लगा.





