अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">


आप मुसलमान पाकिस्तान और गाय गोबर करते रहिए, दुनिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है

Share

डॉ सलमान अरशद

आप मुसलमान पाकिस्तान और गाय गोबर करते रहिए, दुनिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है। विज्ञान और तकनीक ने जो रफ्तार पकड़ रखी है, इससे आने वाले हर साल में दुनिया सदियों का सफ़र करने वाली है। 

इंटरनेट और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग पर आधारित तकनीक अब तक के ज्ञान और उससे बनी तकनीक को तेजी से रिप्लेस करने जा रही है। ड्राइबर, डॉक्टर, एकाउन्टेन्ट, मास्टर जैसे तमाम पेशे अब बीते दिनों की बातें होंगी। सालों में होने वाला काम अब दिनों में होगा। करोड़ो नोकरियाँ जायेंगीं। कोई भी पार्टी आये इस सूरत को बदल नहीं सकती। 

ऐसे में सबसे ज़्यादा अहम है कि हम मनुष्य और इस धरती पर आबाद जीवन के भविष्य पर संजीदगी से विचार करें। 

आज आप किसी भी काम के बारे में सोचें, फिर उससे जुड़ी तकनीक का अध्ययन करें, आप पाएंगे कि उस काम को करने के जो साधन हैं अगर उनका ईमानदारी से उपयोग किया जाए तो मानव श्रम तो बचेगा ही, काम की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। 

अगर विज्ञान और तकनीक में उन्नति हो रही है तो इससे सम्पदा भी उसी अनुपात में पैदा होगी। लेकिन इस सम्पदा का मालिक कौन होगा, किसकी मर्जी से और किस के लिए इस सम्पदा का उपयोग होगा, ये सोचना आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है। 

हर वो काम जो इंसान कर रहा है, उसे उससे बेहतर रोबोट कर सकते हैं। लेकिन रोबोट जिनकी नोकरियाँ खाएंगे, उनका क्या होगा ? 

तमाम बड़े औद्योगिक घरानों की आपसी प्रतियोगिता को देखें तो एक बात बहुत साफ़ नज़र आती है कि गुज़रते वक़्त के साथ इनमें से कोई दो चार कॉरपोरेट ही बचेंगे। बहुत मुमकिन है कि कोई एक ही बचे।  विज्ञान और तकनीक पर और प्रकारांतर से दुनिया की सत्ता और सम्पदा पर इनका ही कब्ज़ा होगा। ऐसे में दुनिया की आम आबादी के रोटी, कपड़ा, मकान, सेहत और सुरक्षा का क्या होगा? ज़वाब सोचिये, सही ज़वाब तक पहुंच गए तो आत्मा तक हिल जाएगी। 

तो क्या विज्ञान और तकनीकी विकास मानवता या जीवन का दुश्मन है? इस सवाल का ज़वाब सकारात्मक और नकारात्मक दोनों है। अगर दुनिया के तकनीकी विकास पर पूंजीपतियों का कब्ज़ा है तो ये विकास धरती पर आबाद जीवन को ग्लोबल सुसाइड की ओर ले जाएगा, लेकिन अगर इस विकास पर दुनिया के मेहनतकश वर्ग का कब्ज़ा हुआ तो दुनिया इतनी खूबसूरत हो सकती है जैसी की आज शायद कल्पना भी न की जा सके। 

आप कोई भी समस्या उठा लें, उसकी जड़ में पूँजीवादी विकास बैठा मिलेगा। 

मार्क्सवाद को कोसने में दुनिया भर के पूंजीवादी देशों ने अरबों डॉलर खर्च किया, अभी भी कर रहे हैं। लेकिन सोवियत काल के सिर्फ स्टालिन के दौर के विकास को देख लें तो समझ आएगा कि मेहनतकश अपने नेतृत्व में दुनिया को क्या बना सकता है। 

हमारे देश में हर वक़्त कहीं न कहीं चुनाव होता रहता है, लेकिन कहीं भी कोई भी पार्टी इतना भी वादा करने की हैसियत में नहीं है कि कह दे कि वो कम से कम चिकित्सा ही सभी को निःशुल्क मुहैया कराएगी। 

हम सब एक संपन्न दुनिया के विपन्न रहवासी हैं। इस विपन्नता को ही अगली पीढ़ी को सौंपना है या सपन्नता पर सबके हक के लिए लड़ना है, इस एक फैसले से ही दुनिया का भविष्य तय होना है।

~ Dr. Salman Arshad 

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें