अग्नि आलोक
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*आनंद अनुभूति*

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मृत्यु योग बनता रहा
पर मेरे महाकाल
काल का भक्षण करते रहे।

शत्रु योग बनता रहा
पर मेरी मां काली
शत्रुओं का रक्त पान करती रही।

भयभीत करने का प्रयास
लोग करते रहे
मगर मेरे कालभैरव
भय के साथ भयाकारक का भी
भयानक विनाश करते रहें।

दुरात्मा योग बनता रहा
पर मेरे सदाशिव
ज्ञानामृत देकर पापयुक्त करते रहे।

वियोग का योग बनता रहा
पर मेरी मां काली का
ममतामई स्पर्श आनंदमय करता रहा।

डॉ.राजीव डोगरा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
(हिंदी अध्यापक)
पता-गांव जनयानकड़
पिन कोड -176038
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
rajivdogra1@gmail.com

Ramswaroop Mantri

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