इस साल का बजट कैसा रहा? इस सवाल के ज्यादातर जवाब खुशी भरे नहीं हैं। लोगों में सबसे ज्यादा मायूसी टैक्स कम न होने से है। वित्त मंत्री से इसी की बहुत उम्मीद थी। 72% लोगों का कहना है कि बजट में टैक्सपेयर्स को राहत न मिलना बड़े झटके जैसा है। 58% लोगों को तो लगा ही नहीं कि बजट में कुछ उनके काम का भी है। वहीं 55% लोगों ने कहा कि इससे महंगाई बढ़ने वाली है।
ये बातें दैनिक भास्कर के सर्वे में सामने आई हैं। भास्कर ने बजट के फौरन बाद एक ऑनलाइन सर्वे किया था। वित्त मंत्री सीतारमण का भाषण खत्म होते ही हमने लोगों से 5 सवाल पूछे थे। शाम 5 बजे सर्वे खत्म होने तक इस पर 1.36 लाख रिस्पॉन्स आए। आप भी पढ़िए कि बजट के बारे में लोगों का क्या सोचना है…
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ठीक उसी लाइन पर काम किया है, जिस पर उम्मीद की जा रही थी। मोदी सरकार ने आम इनवेस्टर्स के लिए कोई राहत या रियायत नहीं दी है। बजट पूरी तरह से ग्रोथ ओरिएंटेड है। सीतारमण ने आम निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। इनवेस्टर्स को पहले की तरह ही सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स और लाॅन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देने होंगे।
रियल एस्टेट, इंफ्रा, लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर में निवेशकों को जरूर फायदा होगा। सरकार ने इन पर बड़ा खर्च करने का ऐलान किया है। इसका सीधा असर मार्केट में देखने को मिला। इन्फ्रा, पावर, टेलिकॉम, लॉजिस्टिक सेक्टर की कंपनियों के शेयर में खासा उछाल देखा गया।
क्रिप्टो गिफ्ट में भी दिया तो टैक्स देना होगा
सरकार ने नए उम्र के क्रिप्टो इनवेस्टर्स पर जबर्दस्त प्रहार किया है। क्रिप्टो इनवेस्टर्स को किसी भी तरह की कमाई पर अब 30% का भारी भरकम टैक्स देना होगा। यानी, शेयर बाजार की तुलना में इसमें दोगुना टैक्स देना पड़ेगा। शेयर बाजार निवेशकों को 15% टैक्स देना होता है।
एक्सपर्ट बोले- कैपिटल ग्रोथ वाला बजट
बाजार के जानकारों का कहना है कि निवेशक इस बजट के बाद बैंक वाले स्टॉक्स ले सकते हैं, क्योंकि सरकार निवेश और खर्च करेगी। इसका सीधा फायदा बैंक को मिलेगा। पाइप वाली कंपनियों में पैसे लगा सकते हैं, क्योंकि रियल एस्टेट और इंफ्रा पर फोकस किया गया है।
HDFC के चेयरमैन दीपक पारेख ने कहा कि मार्केट के लिए यह अच्छा बजट है। यह एक ग्रोथ वाला बजट है। वित्त मंत्री ने इंफ्रा पर ज्यादा पैसा खर्च करने की बात कही है जो ग्रोथ के लिए अहम है। उन्होंने अर्बन इंफ्रा पर काफी पैसा देने की बात कही है। यह एक कैपिटल ग्रोथ वाला बजट है।
छोटे शहरों से ज्यादा आ रहे रिटेल इनवेस्टर्स
कोरोना के कारण इस साल भी नए इनवेस्टर्स की संख्या खूब बढ़ी है। कुछ राज्यों में निवेशकों की संख्या दोगुनी तक हो गई है। आमतौर पर दो तरह के इनवेस्टर्स होते हैं। एक रिटेल और दूसरे इंस्टीट्यूशनल। रिटेल मतलब आम आदमी जो पैसे लगाता है। इंस्टीट्यूशनल जिनमें बैंक, कंपनियां या फिर बड़े निवेशक होते हैं। पिछले साल का ट्रेंड बता रहा है कि छोटे शहरों से रिटेल इनवेस्टर्स ज्यादा आ रहे हैं।
लगातार 9वें साल इनकम टैक्स की स्लैब नहीं बदली, नौकरीपेशा लोगों को कोई फायदा नहीं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट में इस बार भी मिडिल क्लास खाली हाथ रह गया। सबसे ज्यादा उम्मीद इनकम टैक्स में छूट की थी, लेकिन वित्त मंत्री ने साफ कर दिया कि टैक्स न बढ़ाने को ही छूट मानिए। बजट से आस लगाए बैठे लोग वित्त मंत्री का 1 घंटा 31 मिनट लंबा भाषण सुनते रहे, लेकिन आखिर में निराशा ही मिली।
यह लगातार 9वां साल है, जब टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे टैक्स फ्री इनकम का दायरा बढ़ने की उम्मीद को फिर झटका लगा। महिलाओं को भी टैक्स में सीधी कोई छूट नहीं मिली। किसान सम्मान निधि में कोई इजाफा नहीं हुआ। रेलवे में नई ट्रेनों के नाम पर सिर्फ वंदे भारत मिलेंगी। अच्छी बात यह रही कि रेल किराया नहीं बढ़ा।
हालांकि, वित्त मंत्री के कुछ ऐलान पर अब भी चर्चा हो रही है। इनमें सरकारी डिजिटल करेंसी लाना और क्रिप्टोकरेंसी की कमाई पर 30% टैक्स सबसे खास है। कुल जमा बजट में महज आठ बातें हैं, जो आपसे साझा करने लायक हैं। अभी करते हैं, लेकिन इससे पहले बताते चलें कि ये सब हम उसी क्रम में कर रहे, जैसा आपने हमें कहा था।
1. इनकम टैक्स: लगातार 9वें साल भी हाथ लगी निराशा, कोई बदलाव नहीं
इंतजार था कि इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव होगा। 9वें साल भी इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया। टैक्स फ्री इनकम की लिमिट बढ़ाने की उम्मीद थी, यह घोषणा भी नहीं हुई।
- टैक्स फ्री इनकम का दायरा नहीं बढ़ा, टैक्स स्लैब रिवाइज्ड नहीं
- आपको दो साल पुराने टैक्स रिटर्न को अपडेट करने की सुविधा
2. नौकरीपेशा: यहां भी उम्मीदें धराशायी, कोई बड़ा ऐलान नहीं
उम्मीद थी कि 80C का दायरा बढ़ाया जाएगा। कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम कल्चर में ढल चुके इम्प्लॉइज को राहत मिलेगी, पर ऐसा नहीं हुआ। ऐसे इम्प्लॉइज की संख्या 82% से ज्यादा थी, जो दफ्तर नहीं जाना चाहते।
- 80C के तहत निवेश और खर्चों में पुरानी 1.5 लाख की लिमिट
- वर्क फ्रॉम होम वर्कर के लिए कोई स्पेशल अलाउंस नहीं दिया
3. कारोबारी और GST की दरें: MSME के लिए पैकेज, GST की तारीफ
कोरोना के वक्त सबसे ज्यादा प्रभावित कारोबारी हुए। सरकार ने पिछले साल MSME के लिए 15 हजार 700 करोड़ रुपए का ऐलान किया था। इस बार भी पैकेज का ऐलान किया गया। इसके साथ ही GST पर फील गुड फैक्टर का जिक्र हुआ।
- MSME के लिए अगले 5 साल के लिए 6 हजार करोड़
- डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस, ई-पोर्टल लॉन्च किया गया
- ड्रोन शक्ति के लिए स्टार्टअप को मिलेगा प्रमोशन
- जनवरी में रिकॉर्ड 1.4 लाख करोड़ GST कलेक्शन हुआ
4. किसान: पीएम किसान सम्मान निधि नहीं बढ़ी, पर दूसरे ऐलान हुए
उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि को 6 हजार से बढ़ाकर 9 हजार किया जाएगा, पर ऐसा नहीं हुआ। हां, कुछ और ऐलान हुए जो निश्चित तौर पर किसान के लिए फायदेमंद साबित होंगे।
- किसान ड्रोन, नेचुरल फॉर्मिंग, लैंड डिजिटाइजेशन को प्रमोशन
- MSP का 2.37 लाख करोड़ सीधे किसानों के खाते में जाएगा
- Nabard के जरिए एग्रीकल्चर स्टार्टअप्स की फाइनेंसिंग होगी
- गंगा के किनारे 5 किमी. के दायरे में ऑर्गेनिक खेती पर फोकस
5. महिलाएं: जो उम्मीदें थीं, उनमें एक भी पूरी नहीं हुईं
महिलाएं इनकम टैक्स छूट, होम लोन और म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट पर रियायतों की उम्मीद कर रही थीं, लेकिन ऐसी कोई बड़ी घोषणा नहीं हुई, जिससे उनकी कमाई या खर्च में राहत पर असर हो।
- 2 लाख आंगनवाड़ी अपग्रेड होकर सक्षम आंगनवाड़ी बनेंगी
- डायमंड और जेम्स पर कस्टम ड्यूटी घटाकर 5% कर दी गई है
- हीरों के गहने सस्ते होंगे, नकली गहनों पर कस्टम ड्यूटी 400/किलो होगी
6. क्रिप्टोकरेंसी: 2 बड़े ऐलान हुए, दोनों का असर भी बड़ा होगा
सबसे पॉपुलर इन्वेस्टमेंट मीडियम क्रिप्टोकरेंसी को लीगल कर दिया गया है। भारत में 10 करोड़ से भी ज्यादा क्रिप्टोकरेंसी यूजर्स हैं। डिजिटल करेंसी को लेकर भी बड़ा ऐलान किया गया है।
- क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली कमाई पर 30% का टैक्स
- डिजिटली एसेट्स ट्रांसफर करने पर 1% TDS लगेगा
- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इस साल लाएगा डिजिटल करेंसी
- डिजिटल करेंसी में ब्लैकचेन टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करेगी
7. हेल्थ सेक्टर और सोशल वेलफेयर: केवल फोकस की बात, कोई ऐलान नहीं
कोरोना की तीसरी लहर जारी है। पिछली बार हेल्थ सेक्टर को 2.38 लाख करोड़ रुपए दिए गए थे। इस बार इसे 50% बढ़ाए जाने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हां, सोशल वेलफेयर का बजट बढ़ा है।
- मेंटल हेल्थ काउंसिलिंग के लिए प्रोग्राम शुरू होगा
- पिछड़ों और दिव्यांगों के लिए 13,134 करोड़, पिछली बार से 12% ज्यादा
- पिछड़ों और सफाई कर्मचारियों के लिए 56 करोड़, पिछली बार 49 करोड़ बजट था
8. रेलवे: कोई बड़ा ऐलान नहीं, न ही निजीकरण या वर्ल्ड क्लास स्टेशन
रेलवे को लेकर कोई बड़ा ऐलान नहीं हुआ है। इसके मायने यह हैं कि यात्री किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसके अलावा बुलेट ट्रेनों और वर्ल्ड क्लास स्टेशनों का भी जिक्र नहीं किया गया है।
- 400 नई जेनरेशन की वंदेभारत ट्रेनें अगले 3 साल में चलेंगीं
- 100 प्रधानमंत्री गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल भी डेवलप होंगे
- मेट्रो सिस्टम डेवलप करने के लिए इनोवेटिव रास्ते खोजेंगे
- रेलवे छोटे किसानों और MSME के लिए प्रोडक्ट डेवलप करेगा
सबसे नया और सबसे जरूरी : गेमिंग और एनिमेशन बनेंगे इकोनॉमी का हिस्सा
सीतारमण ने कहा कि एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्, गेमिंग और कॉमिक्स यानी AVGC सेक्टर में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं। ऐसे में वित्त मंत्री ने AVGC प्रमोशन टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया। ये टास्क फोर्स इससे जुड़े सभी स्टाक होल्डर्स के साथ बातचीत करेगी। ऐसे रास्ते तलाशेगी जिससे हम लोकल डिमांड को भी पूरा करें और ग्लोबल लेवल पर भी पार्टिसिपेट कर पाएं। इस सेक्टर में रोजगार की बड़ी संभावनाएं पैदा होंगी।
सीतारमण के और अहम ऐलान भी जानिए
1. 60 लाख नए रोजगार सृजित किए जाएंगे।
2. गरीबों के लिए 80 लाख घर बनाए जाएंगे, इसके लिए 48000 करोड़ रुपए बजट।
3. 2022-23 में ई-पासपोर्ट जारी किए जाएंगे, जिनमें चिप लगी होगी।
4. डाकघरों में भी अब एटीएम मिलेंगे।
5. PM ई-विद्या का एक क्लास-एक टीवी चैनल प्रोग्राम 12 चैनल से बढ़ाकर 200 चैनल किया जाएगा, चैनल क्षेत्रीय भाषा में होंगे। व्यावसायिक शिक्षा के लिए डिजिटल यूनिवर्सिटी।
बजट से पहले लोकसभा अध्यक्ष की मुस्कुराहट, वित्त मंत्री की महाभारत
बजट से पहले जब निर्मला सीतारमण बजट पेश करने जा रही थीं, तब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मुस्कुराते हुए कहा कि मंत्रीजी डिजिटल बजट पढ़ेंगी। उम्मीद थी कि पिछली बार की तरह सीतारमण कुछ शेर-ओ-शायरी भी पढ़ेंगी। ऐसा नहीं हुआ। हां, महाभारत की एक सीख जरूर लोगों को बताई।





