अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

महादानव 

Share

जीवित नहीं
मुर्दे हो तुम
महानगर के महामानव नहीं
महादानव हो तुम।

अपने मतलब के लिए
बनाते हो हर किसी को
अपने ख्वाबों का परिंदा
फिर कहते हो
अब भी मैं हुँ सब में जिंदा।

शर्म कर्म बेच कर अपनी
दो टके के लोगों को
कहते हो सब को
किरदार मेरा है
अब भी सबसे उम्दा।

डॉ.राजीव डोगरा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
(हिंदी अध्यापक)
पता-गांव जनयानकड़

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें