अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

अनूठा व्यक्तित्व

Share

जो देखना चाहते हैं
मेरी तबाही का मंजर
उनको बता दूं
मैं सर्वदा बहने वाला हूं
पर तुम शाश्वत न रहने वाले हो।

जो देखना चाहते हैं
मेरी आंखों में आंसू
उनको बता दूँ
मैं इस आब-ए-चश्म में
डूब कर ही तैरना सीखा है।

जो देखना चाहते हैं
गम-ए-हयात में मुझे डूबता हुआ
उनको बता दूँ
इसी समुद्र में विजय की नौका पर
हर मंजिल फ़तह करना सीखा है।

जो देखना चाहते हैं
मुझे दूसरों के आगे नत हुआ
उनको बता दूँ
माँ काली के आगे सिर झुका कर ही
सिर उठाकर जीना सीखा है।

डॉ.राजीव डोगरा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
(हिंदी अध्यापक)
पता-गांव जनयानकड़
पिन कोड -176038
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
rajivdogra1@gmail.com

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें