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*आखिर कब तक हिमाचल,जम्मू,उत्तराखंड में बरसात का कहर बरपता रहेगा*

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नरेन्दर भारती

आपदा का कहर कब थमेगा आखिर कब तक हिमाचल,जम्मू,उत्तराखंड में बरसात का कहर बरपता रहेगा यह एक यक्ष प्रश्न बनता जा रहा है l प्रकृति ने तीनों राज्यों में तांडव मचा रखा है करीब दो महीनों से यह कहर जारी है l बरसात से अब तक हजारों लोग मौत के आगोश में समा चुके हैं l किस्तवाड़ में बादल फटने से सेकड़ों लोग मारे गए,कठुआ में भी बहुत तबाही हुई lमानवीय तबाही बहुत हो चुकी है l तीनों राज्यों में आपदा से जनजीवन अस्त व्यस्त हो चूका है l प्रतिवर्ष देश में आपदा से लाखों लोग ग्रस्त हो रहे हैं l कहते है कि प्राकृतिक आपदाओं को रोक तो नहीं सकते परन्तु अपने विवेक व ज्ञान से अपने आप को सुरक्षित कर सकते है। उतराखंड में प्रकृति का रौद्र तांडव , एक त्रासदी है।प्रलय में असमय व अकाल ही निर्दोष लोग मारे गए।कुछ बच गए कुछ लापता हो गए। प्रकृति रौद्र रुप दिखकर तांडव मचा रही है।रविवार को उतराखंड में प्रकृति ने प्रलय की इबारत लिख दी।रविवार को सुबह साढे दस बजे राज्य के चमोली जिला के तपोवन में ग्लेशियर टूटकर ऋषिगंगा नदी में गिरा और तबाही का मंजर पल भर में लोगों को लील गया। ऋषिगंगा नदी के किनारे रैणी गांव में ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट तहस नहस हो गया और दर्जनों लोगों की लील गया।

16 लोगों को एडीआरएफ ने बचा लिया था 204 लोग लापता है और 34 शव बरामद कर लिए है।यह बहुत ही त्रासदी है।पल भर में लोग बह गए और लापता हो गए थे ।चमेाली में लापता लोगां की तलाश के लिए अब जियांेग्राफीकल स्कैनिंग की जा रही है।प्रकृति समय-समय पर आगाह करती रहती है मगर फितरती हो चुका मानव खुद केा समझकार समझता है मगर प्रकृति ने एक छोटे से झटके से उसको औकात दिख दी है।

सरकारो ने मुआवजे की घोषणा कर दी है मगर मुआवजा इसका हल नहीं है।प्रकृति से खेलना बंद करना होगा।यह प्रलय निरंतर होते रहेगें। बीते साल 2020 में अम्फान चक्रवात ने पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में तबाही मचा दी थी ।80 लोग अकाल बेमौत मारे गए थे। लाखों लोग बेघर हो गए थे ।पुल क्षतिग्रस्त हो गए थे।इलाके जल्मगन हो गए थे। देश में कभी भूकंप, कभी सुनामी, जैसीे प्राकृतिक आपदाएं अपना जलवा दिखाती है तो कभी बाढ़ का रौद्र रुप जिदंगियां लीलता है। लाखों-हजारों लोग मारे जाते है। मानव भी प्रकृति से छेड़छाड़ करने से बाज नहीं आते जब प्रकृति अपना बदला लेती है तब लोगों को होश आता समय-समय पर भीषण त्रासदियां होती रहती है मगर हम आपदाओं से कोई सबक नहीं सीखते।

हर त्रासदी के बाद बचाव पर चर्चा होती है मगर कुछ दिनो बाद जब जीवन पटरी पर चलने लग जाता है तो इन बातों को भूला दिया जाता है। अगर बीती त्रासदियों से सबक सीखा जाए तो आने वाले भविष्य को सुरक्षित कर लिया जा सकता है। मगर हादसों व आपदाओं से न तो लोग सबक सीखते है और न ही सरकारें सबक सीखती हैं।कुछ दिन सरकारी अमला औपचारिकता निभाता है और उसके बाद अगली घटना तक कोई कारगर उपाय नहीं किए जाते। सरकारो को इस आपदाओं पर मंथन करना चाहिए तथा शिविर लगाकर महानगरों, शहरों व गांवो के लोगों को जागरुक किया जाए। तभी तबाही से बचा सकता है।

देश में प्राकृतिक आपदाओं का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रकृति का कहर अनमोल जिन्दगीयां लील रहा है। देश के हर राज्य में बरसात से त्रासदीयां हो रही है। इस विनाशकारी प्रकृति के कहर से जनमानस खौफजदा है। अक्तूबर 1999 में भी उड़ीसा में तूफान ने काफी तबाही मचाई थी। प्रकृति की इस विभिषिका में हजारों लोग अपंग हो गए थंे।बच्चे अनाथ हो थे लाशे मलवे में दफन हो थी। सरकार को चाहिए की प्रत्येक गांव से लेकर शहरो तक आपदा प्रबंधन कमेटियां गठित करनी चाहिए जिसमें डाक्टर नर्स व अन्य प्रशिक्षित स्टाफ रखना चाहिए ताकि व त्वरित कारवाई करके लोगों केा मौत के मुंह से बचा सके ।

अक्सर देखा गया है कि जब तक आपदा प्रबंधन की टीमें घटना स्थनों पर पहुचती है तब तक बची हुई सांसे उखड़ जाती है लाशों के ढेर लग जाते है।अगर समय पर आपदा ग्रस्त लोगों को प्राथमिक सहायता मिल जाए तो हजारों जिदंगियां बचाई जा सकती हैं। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सरकार को कालेजों व स्कूलों में भी माकड्रिल जैसे आयोजन करने चाहिए ताकि अचानक होने वाली आपदाओं से अपना व अन्य का बचाव किया जा सके।स्कूलो व कालेजों मे चल रहे राष्ट्रीय सेवा योजना व स्काउट एंड गाइड के स्वंयसेवियों को आपदा से निपटने के लिए पारगंत किया जाए।

अगर यही स्वयसेवी अपने घर व गांवों में लोगों को आपदा से बचने के तरीके बताए तो काफी हद तक नुक्सान को कम किया जा सकता है। सरकार को चाहिए कि आपदा से बचाव के लिए प्रत्येक विभाग के कर्मचारियों को पूर्वाभ्यास करवाया जाए ताकि समय पर काम आ सके।पुलिस व अग्शिमन के कर्मचारियों को भी समय -समय पर ऐसे आयोजन करते रहना चाहिए।अगर सभी लोग आपदा से बचाव के तरीके समझ जाएगें तो तबाही कम हो सकती है।प्रकृति एक ऐसी देवी है जो भेदभाव नहीं करती प्रकृति के बिना मानव प्रगति नहीं कर सकता,प्रत्येक मानव को बराबर धूप व हवा व पानी दे रही है।

मानव कृतध्न बनता जा रहा है।मानव ने स्वार्थो की पूर्ति के लिए प्रकृति को लहूलुहान किया है।आज प्रकृति ने अपना बदला ले लिया है। तबाही की इबारत लिख दी है ।मानव का अहम मिटाकर रख दिया है।गलतफहमियों में जी रहे मानव आज प्रकृति के आगे नतमस्तक हो चुकें है।अतीत में की गए कुकर्मो का पश्चाताप कर रहे है।प्रकृति ने मानव को समय-समय पर आगाह किया मगर इंटरनैट की दुनिया के जाल में फंसा मानव खुद को प्रकृति से बड़ा माने लगा था उसे यह आभास नहीं था कि प्रकृति सबसे बड़ी गुरु है।प्रकृति ने बहुत कुछ सहा है चारों तरफ गंदगी है वातावरण अशुद्ध हो गया है।

वातवरण कि शुद्धि के लिए प्रकृति मजबूर हो गई और मगरुर हो चुके इंसान का गुरुर तोड़ कर रख दिया है। अनजाने में हुई भूल को माफ किया जा सकता है मगर जानबूझकर की गई गलतियों की सजा प्रकृति ने मानव को दे दी है। मानव को जीवन और मौत की परिभाषा सिखा दी है।यह प्रलय की आहट है। कुदरत ने भटक चुके मानव को पाप और पुण्य का अंतर समझा दिया है।प्रकृति का एक संदेश है भटक चुके व अहंकारी इंसान के लिए जो कुदरत से खिलवाड़ करता था।प्रकृति के प्रकोप से बचना है तो हमें अपनी जीवन शैली बदलनी होगी,छेड़छाड़ बंद करनी होगी।अगर अब भी मानव ने प्रकृति पर अत्याचार बंद नहीं किया तो प्रकृति अपना बदला लेती रहेगी और मानव को सबक सीखाती रहेगी। कुदरत का कहर बरपता रहेगा।यह प्रकृति का एक टरेलर ही है अगर अब भी मानव ने प्रकृकि से छेड़छाड़ बंद नहीं की तो प्रकृति पूरी पिक्चर दिखएगी तब होश् आएगा

उत्तराखंड तबाही : फितरती मानव ने प्रकृति पर अत्याचार बंद नहीं किया तो प्रकृति अपना बदला लेती रहेगी lफितरती मानव ने प्रकृति पर अत्याचार बंद नहीं किया तो प्रकृति अपना बदला लेती रहेगी l विश्व विख्यात देवभूमि हिमाचल व उतराखंड में प्रकृति का तांडव ,एक त्रासदी है l उत्तराखंड व हिमाचल को पता नहीं किसकी नजर लगी है की यहां तबाही ही तबाही हो रही है l मात्र 34 सेकंड में प्रकृति ने धारली में पल भर में सब तहस नहस कर दिया दर्जनों लोगों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग लापता हो गए हैंl धारली के पास हर्षिल में भी सेना का केम्प व हेलीपेड को भी नुकसान पहुंचा है सेना के 11 जवान लापता हैं l होटल भी बह गए l कहते है कि प्राकृतिक आपदाओं को रोक तो नहीं सकते परन्तु अपने विवेक व ज्ञान से अपने आप को सुरक्षित कर सकते है।

कुछ साल पहले भी उतराखंड में प्रकृति का रौद्र तांडव , एक त्रासदी है।प्रलय में असमय व अकाल ही निर्दोष लोग मारे गए थे ।कुछ बच गए थे कुछ लापता हो गए थे ।प्रकृति एक ऐसी देवी है जो भेदभाव नहीं करती प्रकृति के बिना मानव प्रगति नहीं कर सकता,प्रत्येक मानव को बराबर धूप व हवा व पानी दे रही है।मानव कृतध्न बनता जा रहा है।मानव ने स्वार्थो की पूर्ति के लिए प्रकृति को लहूलुहान किया है।आज प्रकृति ने अपना बदला ले लिया है। तबाही की इबारत लिख दी है ।

मानव का अहम मिटाकर रख दिया है।गलतफहमियों में जी रहे मानव आज प्रकृति के आगे नतमस्तक हो चुकें है।अतीत में की गए कुकर्मो का पश्चाताप कर रहे है।प्रकृति ने मानव को समय-समय पर आगाह किया मगर इंटरनैट की दुनिया के जाल में फंसा मानव खुद को प्रकृति से बड़ा माने लगा था उसे यह आभास नहीं था कि प्रकृति सबसे बड़ी गुरु है।प्रकृति ने बहुत कुछ सहा है चारों तरफ गंदगी है वातावरण अशुद्ध हो गया है।वातवरण कि शुद्धि के लिए प्रकृति मजबूर हो गई और मगरुर हो चुके इंसान का गुरुर तोड़ कर रख दिया है। अनजाने में हुई भूल को माफ किया जा सकता है मगर जानबूझकर की गई गलतियों की सजा प्रकृति ने मानव को दे दी है। मानव को जीवन और मौत की परिभाषा सिखा दी है।यह प्रलय की आहट है।

कुदरत ने भटक चुके मानव को पाप और पुण्य का अंतर समझा दिया है।प्रकृति का एक संदेश है भटक चुके व अहंकारी इंसान के लिए जो कुदरत से खिलवाड़ करता था।प्रकृति के प्रकोप से बचना है तो हमें अपनी जीवन शैली बदलनी होगी,छेड़छाड़ बंद करनी होगी। मानव को सबक सीखाती रहेगी। कुदरत का कहर बरपता रहेगा।यह प्रकृति का एक टरेलर ही है अगर अब भी मानव ने प्रकृति से छेड़छाड़ बंद नहीं की तो प्रकृति पूरी पिक्चर दिखएगी तब होश् आएगा वक्त अभी संभलने का है।अभी भी वक़्त है प्रकृति से छेड़छाड़ मत कीजिये l बेहरम बरसात ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक बहुत तांडव किया और हजारों लोगों को लील लिया बाढ़,भूसखलन के हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं केरल के वायनाड मे भूस्खलन होने से 43 लोगों की मौत हो गई थी इस भूसखलन मे लगभग 400 लोग लापता हो गए थे यह बहुत ही त्रासदी थी l चार गाँव बह गए थे और पुल, सड़क, मकान बह गए हैं l एन डी आर एफ की टीमें जान जोखिम मे डाल कर लोगों का जीवन बचाती है l

भारी बरसात के कारण यह हादसे होते है l सर्च ऑपरेशन व बचाव कार्य में भी काफ़ी जोखिम होता हैं l हिमाचल में भी बहुत तबाही हुई गाँव के गाँव दब गए लाशें नहीं मिली बादल फटने से 46 लोग मारे गए चलती गाड़ी पर पहाड़ी से पत्थर गिरने से एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई l प्रतिवर्ष बरसात मे ऐसे हादसे होते हैं और लोगों को जान गंवानी पड़ती है lप्रकृति की चेतावनी, सुधर जा मानव अभी सम्भलने वक़्त हैlप्रकृति के साथ छेड़छाड़ करने वाले मानव को प्रकृति ने आगाह किया है की सुधर जाओ नहीं तो तबाह कर दूंगी यह तो एक ट्रेलर है अभी पूरी पिक्चर बाकि है हिमाचल के किन्नौर से लेकर भरमोर तक तबाही ही तबाही हो रही है बरसात का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है प्रतिदिन पहाड़ दरक रहे हैं l

बरसात ने सेकड़ों लोगों का जीवन लील लिया है कई बच्चे अनाथ हो गए माताएँ व बहनों का सिंदूर मिट गया यह बरसात इतने जख्म दे गई की जख्म तो भर जायेंगे पर निशान अमिट रहेंगे बरसात के कारण अब तक सेंकेड़ो लोग मारे जा चुके हैं जो बह गए अभी तक नहीं मिल सके हैं करोड़ो की सरकारी व निजी सम्पति बह गई लोगों की उम्र भर की कमाई खत्म हो गई लोगों क़ो सड़को पर राते गुजारने पड़ रही है पल भर मे सब कुछ बह गया l कारें व बसें भी बह गई,आलीशान घर पल भर मे बह गए l सदियों पुराने पुल बह गए प्रकृति कभी भेदभाव नहीं करती लेकिन जब मानव ने प्रकृति का सीना छलनी कर दिया तो प्रकृति ने मानव को सबक सीखा दिया l अवैध खनन के कारण नदियों व नालों का रास्ता बदल गया है लोगो ने नदियों के किनारे मकान बना दिए नतीजन अब भुगत रहे हैं l

बरसात अपना रोद्र रूप इंसान को दिखा चुकी है भटक चुके मानव को उसकी औकात दिखा दी हैl मानव को भी छेड़छाड़ करना बंद कर देनी चाहिए l पिछले साल20अगस्त क़ो भी बहुत तबाही हुई थी मंडी के गोहर मे एक मकान के जमीदोज होने से आठ लोगो की मौत हो गई थी l अगस्त मे लगातार मूसलाधार बारिस हो रही है सड़कें बह रही है पहाड़ मे बादल फट रहे हैं लोग असमय मारे जा रहे हैं l अभी अगस्त माह बाकि है पता नहीं कुदरत क्या कहर ढाएगी l प्रशांसन भी सक्रिय है लोगों को सुरक्षित जगह पर आश्रय दें रहा है लोगों को भी सतर्क रहना चाहिए नदियों का जलस्तर भी काफ़ी हो चूका है लोग लापरवाही बरत रहे हैं और बह रहे हैं ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए l

मानव क़ो पहाड़ो से छेड़छाड़ बंद करनी होंगी ताकि आने वाले समय मे ऐसे हादसे रुक सके वक़्त अभी सभलने का है l अगर अब भी सबक नहीं सीखा तो ऐसी तबाही लगातर होती रहेगी l मानव क़ो चाहिए की अब ऐसी भूल मत करें नहीं तो कुदरत नामोनिशान मिटा देगी l गत बीते वर्ष रविवार को सुबह साढे दस बजे राज्य के चमोली जिला के तपोवन में ग्लेशियर टूटकर ऋषिगंगा नदी में गिरा और तबाही का मंजर पल भर में लोगों को लील गया। ऋषिगंगा नदी के किनारे रैणी गांव में ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट तहस नहस हो गया और दर्जनों लोगों की लील गया था । 16 लोगों को एडीआरएफ ने बचा लिया था ।204 लोग लापता हो गए थे और 34 शव बरामद कर लिए थे यह बहुत ही त्रासदी है।पल भर में लोग बह गए थे और लापता हो गए थे ।चमेाली में लापता लोगां की तलाश के लिए अब जियोग्राफीकल स्कैनिंग की गई थी ।

प्रकृति समय-समय पर आगाह करती रहती है मगर फितरती हो चुका मानव खुद केा समझकार समझता है मगर प्रकृति ने एक छोटे से झटके से उसको औकात दिख दी है।सरकारो ने मुआवजे की घोषणा कर दी है मगर मुआवजा इसका हल नहीं है।प्रकृति से खेलना बंद करना होगा।यह प्रलय निरंतर होते रहेगें। बीते साल 2024 में अम्फान चक्रवात ने पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में तबाही मचा दी थी ।80 लोग अकाल बेमौत मारे गए थे। लाखों लोग बेघर हो गए थे ।पुल क्षतिग्रस्त हो गए थे।इलाके जल्मगन हो गए थे। देश में कभी भूकंप, कभी सुनामी, जैसीे प्राकृतिक आपदाएं अपना जलवा दिखाती है तो कभी बाढ़ का रौद्र रुप जिदंगियां लीलता है। लाखों-हजारों लोग मारे जाते है।

मानव भी प्रकृति से छेड़छाड़ करने से बाज नहीं आते जब प्रकृति अपना बदला लेती है तब लोगों को होश आता समय-समय पर भीषण त्रासदियां होती रहती है मगर हम आपदाओं से कोई सबक नहीं सीखते।हर त्रासदी के बाद बचाव पर चर्चा होती है मगर कुछ दिनो बाद जब जीवन पटरी पर चलने लग जाता है तो इन बातों को भूला दिया जाता है। अगर बीती त्रासदियों से सबक सीखा जाए तो आने वाले भविष्य को सुरक्षित कर लिया जा सकता है। मगर हादसों व आपदाओं से न तो लोग सबक सीखते है और न ही सरकारें सबक सीखती हैं।कुछ दिन सरकारी अमला औपचारिकता निभाता है और उसके बाद अगली घटना तक कोई कारगर उपाय नहीं किए जाते। सरकारो को इस आपदाओं पर मंथन करना चाहिए तथा शिविर लगाकर महानगरों, शहरों व गांवो के लोगों को जागरुक किया जाए। तभी तबाही से बचा सकता है।देश में प्राकृतिक आपदाओं का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रकृति का कहर अनमोल जिन्दगीयां लील रहा है।

देश के हर राज्य में बरसात से त्रासदीयां हो रही है। इस विनाशकारी प्रकृति के कहर से जनमानस खौफजदा है। अक्तूबर 1999 में भी उड़ीसा में तूफान ने काफी तबाही मचाई थी। प्रकृति की इस विभिषिका में हजारों लोग अपंग हो गए थंे।बच्चे अनाथ हो थे लाशे मलवे में दफन हो थी। सरकार को चाहिए की प्रत्येक गांव से लेकर शहरो तक आपदा प्रबंधन कमेटियां गठित करनी चाहिए जिसमें डाक्टर नर्स व अन्य प्रशिक्षित स्टाफ रखना चाहिए ताकि व त्वरित कारवाई करके लोगों केा मौत के मुंह से बचा सके ।अक्सर देखा गया है कि जब तक आपदा प्रबंधन की टीमें घटना स्थनों पर पहुचती है तब तक बची हुई सासंे उखड़ जाती है लाशों के ढेर लग जाते है। अगर समय पर आपदा ग्रस्त लोगों को प्राथमिक सहायता मिल जाए तो हजारों जिदंगियां बचाई जा सकती हैं। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सरकार को कालेजों व स्कूलों में भी माकड्रिल जैसे आयोजन करने चाहिए ताकि अचानक होने वाली आपदाओं से अपना व अन्य का बचाव किया जा सके।

स्कूलो व कालेजों मे चल रहे राष्ट्रªªीय सेवा योजना व स्काउट एंड गाइड के स्वंयसेवियों को आपदा से निपटने के लिए पारगंत किया जाए।अगर यही स्वयसेवी अपने घर व गांवों में लोगों को आपदा से बचने के तरीके बताए तो काफी हद तक नुक्सान को कम किया जा सकता है। सरकार को चाहिए कि आपदा से बचाव के लिए प्रत्येक विभाग के कर्मचारियों को पूर्वाभ्यास करवाया जाए ताकि समय पर काम आ सके।पुलिस व अग्शिमन के कर्मचारियों को भी समय -समय पर ऐसे आयोजन करते रहना चाहिए।अगर सभी लोग आपदा से बचाव के तरीके समझ जाएगें तो तबाही कम हो सकती है।

Ramswaroop Mantri

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