अग्नि आलोक
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*आत्म भीति*

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कुछ लोग संतुष्ट हैं
बस अपने ही अहम से
न कि दूसरों की विनम्रता से।

कुछ लोग डरते
बस सुनी-अनसुनी बातों से
न कि दूसरों की हुकूमत से।

कुछ लोग खोखले हैं
बस अपने दर्प से
न कि दूसरों की प्रभुता से।

कुछ लोग खौफ में है
बस अपनी आशंकाओ से
न कि दूसरों की आधिपत्य से।

कुछ लोग आशंकित है
बस अपनी ही अवधारणाएँ से
न कि दूसरों की संकल्पनाएँ से।

डॉ.राजीव डोगरा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
(हिंदी अध्यापक)
पता-गांव जनयानकड़
पिन कोड -176038
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
rajivdogra1@gmail.com

Ramswaroop Mantri

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