अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

*शरीर, मृत्यु-पुनर्जन्म, कर्मफल और मोक्ष*

Share

          ~ डॉ. विकास मानव

       _आत्मा को कोई दोष नहीं लगता. वह अलिप्त है, अजर-अमर है, ईश्वर अंश है. कर्म शरीर करता है, उसके नष्ट हो जाने पर कुछ बचता नहीं. तो कर्मफल किसे और कैसे मिलता है, मोक्ष किसका होता है?_

      यह प्रश्न लिखा है एक आईएएस साथी ने. इस प्रश्न का उत्तर लिखकर क्लियर नहीं किया जा सकता, लेकिन जितना लिखा जा सकता है, उतने से समझदार लोग ‘सार’ तो समझ ही सकते हैं.

   श्वावासों की पूंजी समाप्त होने पर स्थूल शरीर संसार के जिम्मे छोड़ दिया जाता है. मौत/काल/यम जो भी कहें, उसके द्वारा शूक्ष्म शरीर स्थूल शरीर में से खींचकर निकाल लिया जाता है. 

    _यही शरीर कर्मो के लेखा-जोखा के लिए अस्तित्व के सामने प्रस्तुत किया जाता है. यहाँ कारण शरीर साकार होता है. यानी यह दिखता है की शूक्ष्म शरीर के साथ जो किया जाना है, उसका कारण क्या है?_

     अब पापकर्म अधिक होते हैं तो उनको भोगने के लिए मनावेतर योनियों में उसी अनुपात में भेज दिया जाता है. यह सजा काटने के बाद पुण्य कर्म के अनुरूप ऐटमास्फीयर में नरयोनि मिलती है.   

   अगर पुण्यकर्म अधिक हुआ, पापकर्म बहुत कम, तो मानवेतर योनियों का चक्र नहीं शुरू होता. मानव योनि में ही आकर उन पापकर्मो के फल भोगने होते हैं.

    _मोक्ष की अवस्था तब मिलती है, जब हम सदकर्म मात्र से संबद्ध रहते हैं. जब हम भावना – संवेदना- चेतना का विकास करते हुए जीते जी परम-आनंद/समग्रतृप्ति/मुक्ति का अनुभव कर लेते हैं._

     आत्मा एक पावर है.

    विजली के बोर्ड में आप AC का, कूलर का, पंखे का, हीटर का कोई भी प्लग लगा सकते हैं. जैसा प्लग , वैसा रिजल्ट. इसमें बिजली का कोई दोष नहीं है. इसी तरह आत्मा से हमें शक्ति मिलती है. हम अपनी इन्द्रियों को किस तरह के प्लग का रूप देकर क्या परिणाम साकार करते हैं, यह हम पर निर्भर है. इसके लिए आत्मा की जिम्मेदारी नहीं बनती.

    *🔥चेतना विकास मिशन*

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें