शशिकांत गुप्ते इंदौर
मंत्रीमंडल का Reshuffling किया गया।Shuffling शब्द का हिंदी अनुवाद होता है,पुनर्गठन फेरबदल,और फेंटना भी होता है।फेंटना शब्द ताश के पत्तो के खेल में बहुत प्रचलित है।जलेबी बनाने के लिए मैदे को बहु फेंटना पड़ता है।मैदे में खमीर उठना चाहिए।
ताश के पत्तो का खेल जब मनोरंजन के लिए खेलते तब पत्तों को फेंटने के पूर्व उसमें से जोकर निकाल दिए जातें हैं।ताश के बावन पत्तों में दो जोकर अलग से होतें हैं।
पैसों से खेले जाने वालें खेल में जोकर का महत्व होता है।केंद्र में सत्तासीन सरकार ने मंत्री मंडल का विस्तार किया।
आश्चर्य की बात है।रोजगार के स्रोत सिकुड़ते जा रहें हैं।आर्थिक स्थिति छोटे से दायरे में सिमटी जा रही है।विधयिका के कार्यो की समीक्षा न्यायपालिका को करनी पड़ रही है।कार्यपालिका का प्रबंधन लाठी और भैंस वाली कहावत को चरितार्थ करने में व्यस्त है।लोकतंत्र के चौथे खम्बे की हालत जितनी “चाबी भरी राम ने उतना चले खिलौना”। खिलौना खेलने वाले बच्चें गौदी में बैठ कर ही खेलतें हैं।आमजन को अपनी गृहस्थी को चलाने में पसीना आरहा है।फ्रांस देश की न्यायपालिका ने अच्छे अच्छों को पसीने छुड़वा दिए हैं।
ऐसी स्थिति में देश में मंत्रियों का जमघट बड़ा किया जा रहा है।मंत्रियों का वेतन,उनकी हवाई यात्राएं और बहुत सी जगह शिलालेख का लोकार्पण करने की व्यवस्था का सारा खर्च देश की जनता को ही वहन करना है।मंत्री मंडल के reshuffling में कुछ चुनिंदा मंत्रियों को आंग्रेजी का Suffer करना पड़ा रहा है।ट्विटर को कानून का भय दिखाने के चक्कर में क़ानून मंत्री सिर्फ संसद सदस्य बनकर रह गए।लाल बत्ती बुझ गई।सत्ता पक्ष की सूचनाओं का प्रसारण सम्भवतः ठीक से प्रसारित करनें में मंत्री असफल रहें इसलिए,प्रकाश का स्विच ऑफ कर अनुराग को आर्थिक राग आलाप ने से वंचित कर सूचनाओं को उचित तरीके से प्रसारित करने जिम्मा दिया गया।अनुराग वैसे भी देश के गद्दारों को बखूबी पहचानते ही है।
स्वास्थ्य मंत्री को बदलने का कारण है,स्वास्थ्य मंत्री को लोगों के स्वास्थ्य की चिंता ज्यादा नहीं थी,स्वास्थ्य मंत्री शंहशाह को बटर लगाकर स्वामिभक्ति में लीन हो गए थे।प्रधान सेवक को अतिसर्वत्रवर्जयति इस सुवाक्य का स्मरण हुआ।प्रधान सेवक ने स्वास्थ्य मंत्री से स्वास्थ्य मंत्रालय का भार ले लिया और उन्हें सहर्ष पूर्ण विश्राम करने की सलाह दे दी।
यह Reshuffling आगामी पाँच राज्यों के चुनावों के मध्य नजर किया गया है।प्रधान सेवक ने सभी मंत्रियों को नसीहत दी है कि, कोई भी मंत्री फ़िजूल बयान न दे।फिजुल बयानबाजी के लिए कुछ प्रवक्ता नियुक्त कर ही रखें हैं।सभी मंत्रियों को अपने कार्यालयों में समय पर पहुँचना है।हॉ कोई भी निर्णय बगैर अनुमति के नहीं लेना।अपने पास पूरे सैंतालीस वर्ष हैं।पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को रैलियों में भीड़ इकट्ठी करना है।मानधन की चिंता नहीं करना।
देश के छोटे छोटे उद्योग अंतिम सास ले रहे है।मशीनों के पूर्जे जाम हो रहें हैं।ऐसी विषमतम स्थिति में भी मंत्रिमंडल का विस्तार करना साहस का काम है।मंत्रियों को विभागों का आवंटन तो महज औपचारिकता है।ऊपरवाले के मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता है।
बधाई नए मंत्रियों को।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





