अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

गांव गांव के किसान बापू की आवाज़ बनेंगे!

Share

सुसंस्कृति परिहार
आज लगभग पूरे दिन देश भर में राष्ट्रपिता गांधी को याद किया गया। झूठे ही सही आज गांधी और भी प्रासंगिक हो जाते हैं जब अमेरिका के राष्ट्रपति जौ बाइडिन गांधी के रास्ते पर चलने की बात करते हैं और तब जब भारत के प्रधानमंत्री के साथ यह बात कबूल करते है। हमें शर्मसार होना चाहिए कि गांधी से यदि किसी मुल्क ने दूरी बनाई है तो वह भारत है। भारत ही वह देश है  जहां आज हैशटैग पर गोडसे ज़िंदाबाद टेंड कर रहा है। भारत में ही इस समय वह सरकार सत्तारुढ़ है जो गांधी के हत्यारे के जिम्मेदार संगठन से पोषित है ।गांधी की देह समाप्ति के बाद अब वे उनकी वैचारिकी को समाप्त करने पर तुले हैं।सत्य, अहिंसा,सत्याग्रह आंदोलन, धरना-प्रदर्शन,उपवास जैसे सिद्धांतों पर सीधे सीधे हमले किए जा रहे हैं।सत्य परेशान किया जा रहा है।झूठ का सर्वत्र बोलबाला है। अहिंसा के स्थान पर गांधी जी के गुजरात से एक बड़े नरसंहार के जिम्मेदार सत्ता पर काबिज हैं।असम के दरांग से लेकर गोरखपुर तक पुलिस बल का जो रौद्र रूप दिखाई दे रहा है वह इस बात का प्रतीक है कि देश में हिंसात्मक ताकतों को प्रश्रय दिया जा रहा है। अपने हक़ की आवाज उठाने वाले किसान गांधी के रास्ते पर चलते हुए अपने 600साथियों को खो चुके हैं फिर भी सत्य की जीत के प्रति आश्वस्त हैं और दस माह बाद भी आंदोलनरत। आंदोलनकारी किसानों की जिस तरह उपेक्षा हो रही है वह यह साफ करती है कि गांधी के देश में गांधी की आवाज का दमन बुरी तरह जारी है।
29जनवरी 1948 में हत्या के ठीक एक दिन पहले गांधी जी ने अंतिम प्रार्थना सभा में कहा था—“मेरी चले तो हमारा गवर्नर जनरल किसान होगा।हमारा बड़ा वज़ीर किसान होगा सब कुछ किसान होगा क्योंकि यहां का राजा किसान है किसान जमीन से पैदा ना करें तो हम खायेंगे क्या? सचमुच किसान हिंदुस्तान का राजा है।” आज कौन है जो किसानों को राजा मानता है।उसकी आवाज अनसुनी हो रही है वह अनगिनत परेशानियों से जूझ रहा है। इसी तरह अंतिम व्यक्ति के लिए दिए मंत्र की घनघोर उपेक्षा कर शिखर पर बैठे पूंजीपतियों की स्थिति मज़बूत की जा रही है। ऐसे अनेक सवाल हैं जो गांधी के मान और उनके विचारों को आहत करते हैं।वे गांधी को स्वच्छता अभियान का हीरो बनाकर स्वच्छ भारत का चश्मा लगाकर अपनी महानता प्रर्दशित कर गांधी के कद को बौना करते हैं। मनरेगा को नरेगा नाम देकर उनसे नफरत प्रर्दशित करते हैं पर आज भी दिखावा ही सही गांधी को साथ लेकर चलने विवश हैं। अमेरिका में बेमन से सही गांधी को स्वीकारते हैं।वास्तव में सब उनकी मज़बूरी है।
गांव गांव में जन जन के बीच आज भी महात्मा गांधी शिद्दत के साथ ज़िंदा है। देश में गांधी की भले उपेक्षा कर लें पर दुनिया उन्हें गांधी के देश का मानकर सम्मान करती हैं । महत्वपूर्ण बात ये है जब सरकार गांधी विरोधी हो तो गांधी को कैसे बचाया जाए इस विषय पर विमर्श की अपेक्षा गांवों का सहारा लेना होगा ।आज भी जो गांधी वादी अपने छोटे छोटे सामाजिक कार्यों से गांवों में गांधीजी के सिद्धांतों की अलख जगाए हुए हैं उसी कड़ी को विस्तारित करना होगा यह बहुत ज़रूरी है।सत्य और अहिंसा की जगह जिस तरह झूठ और हिंसा का ज़ोर देश में चरम पर है उसने महात्मा गांधी की महत्ता और ज़रूरत को बढ़ाया है । गांधी जी एक मज़बूत गांधी की बतौर उभर रहे हैं। इसके अच्छे परिणाम के लिए गांव गांव पहुंच बनाने की आवश्यकता है।भारत गांवों और किसानों का देश हैं और वहीं बापू की आवाज़ बनेंगे।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें