~ नयना जोशी (पुणे)
_सेक्स जीवन का बेहद अहम और ज़रूरी हिस्सा है. इसे चार पुरुषार्थोँ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) में स्थान दिया गया है. यह परमानन्द/पूर्णत्व का आधार भी बनता है. यही कारण है की तप, साधना, ध्यान से सबकुछ पाने वाले ऋषि ही नहीं, भगवान कहे लोग भी संभोग में उतरे._
हम अहर्निंश सेक्सचिंतन करते हैं. कतिपय लोग रेप,गेंग रेप, मर्डर तक करते हैं. लेकिन इस टॉपिक पर बात करने, कुछ जानने को पाप समझा जाता है. अज्ञानता इतनी है की मैक्सिमम भ्रामकता के स्तर की. विज्ञापनबाज़ी, नीम-हकीम और इंटरनेटऐप्स के कचरे कोढ़ में खाज का काम कर रहे हैं.यहां मैं सेक्स को लेकर हमसे पूछे जाने वाले अधिकतम सवालों के जबाब दे रही हूँ. यह जानकारी चेतना विकास मिशन की मुख्य चिकित्सिका डॉ. गीता शुक्ला से हुए संवाद पर आधारित है. विशेष ज्ञान या रोगनिदान के लिए व्हाट्सप्प 9997741245 पर संपर्क किया जा सकता है. यहां सभी सेवाएं शुल्कमुक्त हैं.
❓स्त्री की संतुष्टि के लिए पेनिस की लंबाई कितनी होनी चाहिए
➡️ सामान्यतया पेनिस की लंबाई ३ से ६ इंच होती है।
३ इंच स्त्री की तृप्ति के लिए काफी है। नारी की तृप्ति विशुद्ध प्रेमपूर्ण फोर-प्ले पर, जी-स्पाट के टचनेस/घर्षण पर निर्भर करती है।
सेक्स के लिहाज़ा योनी का २ से २.५ इंच तक का आरंभिक हिस्सा ही संवेदनशील होता है।
निष्कर्ष :
पेनिस की लंबाई-मोटाई नहीं, कड़ाई अहम होती है– स्त्री के डिस्चार्ज न होने तक के लिए। हां अगर अनेक पुरूष/पशु से सेक्स करवाने, सेक्सटॉय या और कोई सामान योनि में डालते रहने से योनि की सेन्सटिविटी कम हो गयी है, खत्म हो गयी है, या किसी वजह से योनि ढीली हो गयी है तो– टाइट पेनिस भी स्त्री को मज़ा नहीं दे पाता। योनि को छोटे- से ऑपरेशन द्वारा चुस्त और कसाव वाली बनवाया जा सकता है।
❓पेनिस का आकार कैसे बढ़ाया जा सकता है?
➡️पेनिस को आपरेशन(प्लास्टिक सर्जरी) के अलावा तैल या किसी भी दवा से बढाया नहीं जा सकता।
भूलकर भी किसी झांसे में न आएं।
❓ हस्तमैथुन से कोई नुकसान?
➡️ दमन खतरनाक़ होता है। नैचुरल सेक्स का अवसर न मिलने पर, तीब्रतम वेग की स्थिति यानी विशेष परिस्थिति में हैंड-प्रैक्टिस से रिलैक्स होने की सलाह आधुनिक मैडिकल साइंस देती है।
मगर, इसे आदत में शामिल करने पर पेनिस की नसें कमजोर हो जाती हैं, फैल जाती हैं। वह निर्जीव हो जाता है। संभोग शुरू होते ही वीर्य बह जाता है। यानी इंसान नामर्द।
नारी को हैन्ड-प्रैक्टिस से कोई नुकसान नहीं।
❓घातु जाना क्या है?
➡️ यह नैचुरल है, कोई बीमारी नहीं। उत्तेजना की दशा में नर-नारी दोनों के प्राइवेट पार्ट्स से रिसाव होता है।
इसके चक्कर में नीम-हकीमों के जाल में नहीं फंसना चाहिए।
❓क्या नारी कम सैक्सुअल होती है; वह अमूमन सैक्स से कतराती क्यों है?
➡️ ऩारी में 8 गुना अधिक सैक्सुअलिटी होती है। संसर्ग के दौरान अमूमन जब तक उसमें सैक्सुअलिटी जगती, वह हॉटनेस में डूबने को होती है: नर निढाल पड़ जाता है, अपना काम निकाल कर।
ऐसे में आर्गाज्म का अनुभव तो छोडिए, इसका अहसास तक नहीं हो पाता नारी को। यही कारण है कि एक वर्ष बीतते-बीतते ज्यादातर नारियां सैक्स से कतराने लगती हैं।
जो स्त्री नेचुरल संभोग में ठीक से गरम होकर, पिघलती है और निचुड़कर यानी पूर्णतः डिस्चार्ज होकर बेसुध होने का आनंद पाती है; वह सेक्स से कतराती नहीं– सेक्स मांगती है, बार- बार। ओर्गास्म एक ऐसा नशा है कि जिस स्त्री को लग जाये वो दौलत-शोहरत-रसूख-रुतवे तक के नशे व्यर्थ समझती है।
❓नर के शीघ्र स्खलन का कारण क्या है?
➡️जन्मजात/वंशानुगत कारण के अलावा पेनिस में चोट लगना, अधिक तनाव, हैंड-प्रैक्टिस, अनेक लोंगों से सैक्स, पशु से सैक्स, गुदा सैक्स, नशे और सैक्स पावर बढ़ाने वाली दवावों का सेवन।
❓सैक्स पॉवर बढाने की हानि-रहित दवा क्या है?
➡️कोई नहीं। किसी भी पैथी की दवा न लें। मेडिसिन तत्काल राहत देकर कुछेक दिन तो आपको बीर बना देंगी लेकिन बदले में आपकी नैचुरल क्षमता भी छीन लेंगी। आंखों और लिवर के लिए तो ये खतरनाक़ होती ही हैं।
खान-पान, नियम-संयम का घ्यान रखें, शीध्र स्खलन रोकने के लिए मैडिसिन नहीं, मेडिटेशन की शरण लें।
❓क्या ओरल सैक्स और गुदा सैक्स करना चाहिए?
➡️नहीं। इससे मुंह, गुदा और गले का कैंसर तक हो जाता है। योनि और गुदा में बहुत बैक्टीरिया होते हैं।
योनि स्वस्थ- स्वच्छ है, गुलाब की तरह खिली और खुशबू वाली है तब पुरूष को ओरल सेक्स में कोई नुकसान नहीं।
पेनिस सरीर के बाहर होता है, आसानी से साफ करके; “नारी की अपनी भूख-प्यास हो तो” वह ओरल सैक्स कर सकती है।
जबरदस्ती करवाने पर वह भी रोगी बनेगी क्योंकि उसकी मनोस्थिति उसमें नैगैटिव हारमोंस का स्राव करेगी।
❓ सैक्स किस से करना चाहिए?
➡️जिससे वास्तविक प्रेम हो। जाहिर है यह एक से ही हो सकता है। बिना प्रेम का सेक्स पशु जैसा काम है, मशीन जैसा काम है। यह रोगी, खासकर मनोरोगी बनाता है।
❓मैडिकल साइंस कहती है कि वीर्य में प्रोटीन, कैल्सियम, लवण, गलूकोज़, कार्बोहाइट्रेट, जिंक जैसे ६० तत्व होते हैं जो नारी की सैक्सुअलिटी, हैल्थ और व्यूटी बढाते हैं। तो नारी को वीर्यपान क्यों नहीं करना चाहिए?
➡️ दैहिक-मानसिक-बैद्धिक तौर पर स्वस्थ, प्रखर चेतना की ऊर्जा से संपंन्न, सात्विक नर के वीर्य में ये गुण संभव हैं।
एेसा इंसान आज के दौर में करोणों में नहीं, शायद अरबों में कोई एक मिले।
❓सैक्स किस ऊम्र तक करना चाहिए?
➡️ किसी भी उम्र तक। सैक्स दर्द की, टेंशन की, अनिद्रा की, हिस्टीरिया आदि की दवा है।
लेकिन ध्यान रहे, अतृप्ति-जनित सेक्स निराशा, हतासा, कुंठा देकर मन-मस्तिष्क को रोगी बनाएगा। रुग्ण मन-मस्तिष्क तन को भी रोगी बना देता है।
❓सैक्स किस समय करना चाहिए, कितनी बार करना चाहिए? क्या सैक्स से सेहत बिगड़ती है?
➡️ जिस समय आपका तन-मन-मस्तिष्क तैयार हो।
१,३,५,७,१० यानी उतनी बार आप सैक्स कर सकते हैं, जितनी बार करने की भूख-प्यास और क्षमता हो आप दोनों में।
सफल सैक्स स्वास्थ्य-वर्धक होता है, स्वास्थ्य-नाशक नहीं।
❓नामर्दी का दर्द झेल रहे लोगों को क्या करना चाहिए?
➡️शिव तंत्र-सूत्र में आध्यात्मित/तांत्रिक सैक्स के सूत्र उपलब्ध हैं। मेडिटेटिव सेक्स का लाभ केवल मेडिटेशन में रुचि रखने वाले ले सकते हैं।
मेडिटेशन की कई साइंटिफिक टैक्निक्स हैं, जिनके जरिए मनचाहे समय तक स्खलन को रोका जा सकता है।
🔅02 उपाय हैं 🔅:
【1】
इच्छुक “दम्पति” किसी समर्थ प्रशिक्षक के या हमारे सानिध्य में (न्यूनतम १५ दिन) रहकर यौगिक, तांत्रिक, मेडिटेटिव सेक्स सीख सकते हैं।
हम कोई पैसा नहीं लेते। अपने रहने-खाने का इंतजाम भी हमसे करवाना चाहेंगे तो हमें मुश्किल होगी।
【2】
मैडिकल साइंस में सर्जरी का रास्ता है। पैनिस की नसों को ठीक करना, अपेक्षित आकार देना और टाइम बढ़ाना अब संभव है।
(कोई भी सेक्सटॉय, बैटरी/बिजली/हस्त चालित वॉइब्रेटर योनि की कोशिकाओं को डेमेज करता है। योनि बज्र/पत्थर सरीखी होकर संवेदनशीलता खोती है। फिर ऐसी स्त्री को किसी-भी/कितने-भी पुरुष से तुष्टि नहीं मिलती!)
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तैल, कैपसूल्स, टैबलेट्स, इंजैक्शन, चूर्ण से बचना चाहिए। “दवा किसी भी पैथी की हो, तात्कालिक राहत देती है मगर नैचुरल पॉवर भी खा जाती है” आंखों की रोशनी का सत्यानाश अलग होता है।
*(चेतना विकास मिशन)





