
सत्येन वर्मा,सत्येन
एक अनपढ, देश की जनता को पागल,ठठरी बंधे कहता है, न जिसके पास भाषा है न शिल्प है न शब्दों का बैचारिक भंडार है वह इस देश के धार्मिक क्षेत्र का सितारा बन गया जिसकी ज्यादा उम्र भी नही है वह सिर्फ रटत तोता है।और एक ओर है जो कहता कि बंगला देश के हिंदू के साथ अत्याचार हो रहा है, महाराष्ट्र की जनता ने सबक सिखा दिया है शिव भक्तों ने,जबकि यह मामला बिदेश नीति का है सरकार इस पर मौन है यह कथा वाचक बोल रहे है
ऐसा लगता है किसी दल के एजेंट के तौर पर काम को अंजाम दे रहे है, टी .वी एंकर एक दल का प्रवक्ता बन कर प्रश्न नही पूछता है दल का बचाव करता है, क्या इस देश के नागरिक का खून उबाल नही खाता, इस देश के कवि सत्ता पोषित है, एक कवि सरे आम कहता है कि महात्मा गांधी, नेहरु अपराधी है, गोडसे महान थे? संभल मे दंगा, अजमेर शरीफ के नीचे शिव की मूर्ति ये क्या हो रहा है क्या हम मूर्ख है, अभी अभी बयान आया हैं तीन बच्चे पैदा करो, जिनके 6 बच्चे है
बेरोजगार है , नौजवान है उन्होंने अपनी सारी उर्जा दूसरी -तीसरी जगह ढोल दी ,कुछ नशे मे लिप्त हो गये तो वह कैसे तीन बच्चे पैदा करेगे, कुछ युवा-युवती गे है, कुछ लेस्बियन है तो कैसे काम बनेगा, किसी के पास रोटी का संकट, कुछ मोबाइल, क्म्प्यूटर के गुलाम है उनकी सारी उर्जा भटक गई, कुछ पर कर्ज का बोझ लदा है किसी की मानसिकता बच्चे पैदा करने की नही हो रही तो कैसे माननीय का सपना पूरा होगा? कुछ बेरोजगार युवा चोरी डकैती कर रहे है जो पढे लिखे है यह सबाल है ,लोकसभा राज्यसभा अडानी, अबानी, संभल, किसान मणिपुर पर बातचीत नही करना चाहती बिपक्ष को दोषी बताती तो क्या बिपक्ष गलत है इस पर बेईमान मीडीया चुप है वह अपने दायित्व का निर्वाह नही कर रहा, कांग्रेसी की हरकत साहब के पास कैद है,
एक ग्वालियरी जिसका जीता जागता उदाहरण है।यह देश ऐसे मोड पर है यहां जिसकी जो मर्जी है धर्म के नाम पर नशे मे लिप्त 100 करोडो नागरिक को अपनी ऊंगली पर नचा सकता है पर अपन इन नेताओ को अच्छी तरह जानते है यह लोग सत्ता बचाने में बहुत नीचे जा सकते है इन पर सिर्फ -सिर्फ धिक्कारने की हैसियत तो रखता हूं मेरे पास सिर्फ आक्रोशित कलम है जो गमो की स्याही में डूबी है।





