मुनेश त्यागी
औरत है मानवता की जननी
मैं गीत उसी के गाता हूं
भारत माता का बेटा हूं
जननी की बात सुनाता हूं।
जहां बच्चियां पेट में मरती हों
जहां बहुएं दहेज में जलती हों,
जहां मानव की चेतना सडती हो
उसी दुनिया की बात सुनाता हूं।
हिटलर ने मांओं को जलाया था
उसने बहनों को नंगी घुमाया था,
हां बेटियों का मान घटाया था
उसी शैतान की बात सुनाता हूं।
गुजरात में बहनों को रौंदा था
बिल्किस की याद दिलाता हूं,
जिसने इंसानियत को रौंदा था
उसी हैवानियत की बात सुनाता हूं।
जहां औरतों को नंगा घुमाया है
फिर अपना बर्बर रूप दिखाया है,
जहां फिर रौंद दिया मानवता को
उसी मणिपुर की बात सुनाता हूं।
कल वो गुजरात पर चुप थे
आज बंगाल, मणिपुर पर चुप हैं,
ये असभ्य, जंगली और बर्बर हैं
इन औरतखोरों की बात सुनाता हूं।





