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खड़े तो इस सिस्टम के ख़िलाफ़ होना होगा

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Hafeez Kidwai 

एक आदमी बैठा है और दूसरा आदमी उसपर पेशाब कर रहा है । यह होता है, जब आप ग़ुलाम बन जाते हैं । जब मान लिया जाता है कि हम कुछ भी कर आएँगे,मगर तुम्हारे पास हमारे सिवा चुनने को कोई विकल्प भी नही होगा । यह होता है तब, जब किसी को यह विश्वास हो जाए कि लोग उसे कभी नही छोड़ेंगे,लाइन लग लग कर वोट देंगे ।

एक बार एक थार गाड़ी में बैठे आदमी ने, कुछ आदमियों को सबके सामने कुचला था,लोगों ने कुचलने वालों को लाइन लग लग कर वोट दिया और कुचले गए आदमियों को सबक सिखाया था । अब पेशाब किया गया है, तो आपको लगता है कि उनकी सेहत पर कोई फर्क पड़ेगा ।

ग़ुलाम हो चुके लोग इन घटनाओं से विचलित नही होते हैं । उन्हें तो जो मज़े हिन्दू-मुसलमान राजनीति में आ रहे हैं । उनके मुँह में साम्प्रदायिकता का स्वाद जो चढ़ गया है, तो यह पेशाब की दुर्गंध भी सुगंध ही लगेगी । आदमी ने खुद को आदमी कहे जाने की खूबियों को ताख पर रख दिया है, अब आप इन्हें जानवर भी कहिए, तो यह खुशी से लोटपोट होते हैं ।

अब किसी को कोई फर्क नही पड़ता, क्योंकि आदमी ख़त्म हो रहे हैं और ग़ुलाम बढ़ रहे हैं, जो हमारी आपकी तरह सांस तो लेते हैं मगर सोच नही सकते,क्योंकि उनकी सोच पर पहले ही कोई पेशाब कर चुका है कि उन्हें कुछ भी बुरा नही लगता,उन्हें बुरा लगना बंद हो गया है । कुछ लोग तो इसे भी सही ही ठहरा देंगे कि ठीक ही किया पेशाब कर दिया मगर एक बार सोचिएगा की यह हिम्मत कहाँ से आती है । कोई को यह कैसे यक़ीन है कि वह चेहरे पर पेशाब करके और मज़बूत हो जाएगा ।

यह यक़ीन थार से कुचले हुए लोगों का हश्र देखकर आता है । यह विश्वास दर बदर होते पहलवानों को देखकर आता है । यह अहंकार तब जन्म लेता है, जब उसे पता होता है कि हम कुछ भी कर गुज़रे,तुम तो लाइन लग लग कर हमारे आका को ही वोट दोगे, तो बताओ,वह क्यों डरे ।

वह हरकत बहुत बुरी है, होना तो यह चाहिए कि पेशाब करने वाले के पीछे खड़ी उसकी ताकत से भी उतनी ही दूरी बनाए जाए,जितनी उससे,मगर लोग एक आदमी को कोसकर छोड़ देंगे,जबकि यह तो एक सिस्टम है, जो कभी पेशाब करता है, कभी कुचलता है, कभी पीटता है, कभी लिंच करता है, कभी नँगा करके दौड़ाता है, कभी दुराचार करता है, खड़े तो इस सिस्टम के ख़िलाफ़ होना होगा । आखिर इतनी हिम्मत आती कहाँ से है, इसके हिम्मत के खिलाफ खड़े होना होगा । खुद को गुलाम बनने के ख़िलाफ़ खड़े होना होगा, वरना कोई भी आपके सपने,भविष्य,योजनाओं और खुली आज़ाद सांसों पर पेशाब करके निकल जाएगा…उस आदमी को सख्त सजा मिले,इसकी मांग है और उसके पीछे खड़ी ताकतों को भी लोग हराए ताकि यह अहंकार टूटे,वरना वाक़ई दिन कठिन हों जाएँगे,इतना मनबढ़ होना अच्छी बात नही…

Ramswaroop Mantri

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