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तांत्रिक संसर्ग : परिचय, प्रयोग और प्रभाव !

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 डॉ. विकास मानव 

          ●हमारे देश में सियासत सब खा गई, खाये जा रही है।  

     ●क्वालिटी के मामले में विश्व की बेस्ट यूनिवर्सिटीज की लिस्ट में हमारे यहाँ की एक भी यूनिवर्सिटी स्थान नहीं पा सकी है। 

   ●यहां की प्रतिभाओं की कद्र नहीं होती। अवसर नहीं मिलते। वे विदेशों में जाकर उन्हें डेवेलप करती हैं। 

_ऐसे में प्राच्य विद्या पर स्टडी/रिसर्च का सवाल कहां उठता है।_

    ●हमारे पूर्वजों का ‘योग’ वहां से योगा बनकर आया तब हमारे गले उतरा। 

   ●ऋषियों का रिसर्च ‘ध्यान’ वहां से मेडिटेशन बनकर आया तब हमें समझ आया। 

     ●मैं खुद मेडिटेशन ट्रेनर के रूप में मेडिटेशन रिसर्च फाउंडेशन यूएसए से ऑथराइज्ड हुआ, तब कद्र हुई यहां के मूर्खों द्वारा मेरी। जबकि सबकुछ मैं यहीँ से सीखा/साधा। कई चीजें तो USA वाले मुझ से ही जाने।”

        _अपने यहाँ लोग न श्रम करना चाहते हैं, न साधना। यहाँ सॉर्टकट चलता है। कुछ को अपवाद मान लें तो : यहां अमूमन मेल पर्सन घूस देकर कामयाबी हासिल करना चाहता है और फ़ीमेल पसर्न नर-भेड़ियों को अपना ज़िस्म परोसकर।_

          ■अब तंत्रिक सेक्स का प्रचलन बढ़ रहा है। यह भी भारत की विद्या है। लेकिन अब विदेश से ब्रांड बनकर रिलीज होने लगी है तो यहां भी कुलबुलाहट हुई है। 

     कई लोगों ने इस बाबत हमें लिखा है। नाम के कारण कई लोगों को लगता है कि यह ओझा/शोखा/तांत्रिक का मामला है जो नींबू, लवंग, मदिरा, मुर्गा, हवन, मंत्रजप आदि से संबंधित है।

    बता दूँ :

_तांत्रिक सेक्स ऐसी बकवासों से नहीं, ध्यान से संबद्ध है। यह मेडिटेशन का ही एक आयाम है। तो आज की हमारी पोस्ट इसी टॉपिक पर।_

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    *यौन संबंध* में प्रयुक्त होने का एक नवीन और मेडिटेटिव तरीका  है तांत्रिक सेक्स है। 

   _तांत्रिक सेक्स भावनाओं, संवेदनाओं और ऊर्जा को गहरे स्तर तक पहुंचाने में मदद करता है। स्त्री को यह ऐसा गहन आनंद देता है की जन्नत भी शर्माने लगती है। ऐसे परम-आनंद में डूबी स्त्री को भगवान की कमी तक महसूस नहीं होती। उसे मन-तन के रोग नहीं होते।_

        शारीरिक सेक्स के तरिके को थोडा परिवर्तित कर के तंत्र के सूत्र मुताबिक सेक्स के मार्ग से परमानंद तक यह ले जाता है। आपको वास्तव आम सेक्स से कई गुणा ज्यादा आनंद मिलता है। 

    साधारण सेक्स के तुलना में तांत्रिक सेक्स ज्यादा बैज्ञानिक है। इसमें शक्तिक्षय भी नही होता है। तांत्रिक सेक्स से यौन उर्जा को शक्ति के रुप में परिवर्तित किया जाता है। जिसके चलते यौन में अधिक आनंद आता है।

    _तांत्रिक सेक्स का मार्ग सरल है, लेकिन गहरा भी है। यह खुशी की साझा अभिव्यक्ति के लिए मानसिक जागरूकता की गुणवत्ता बढाने के साथ-साथ हमारे शरीर और इच्छाओं की पवित्रता के लिये भी उत्तम मार्ग है।_

             इस सेक्स क्रिया से मनुष्य अपने आपको तनाव से मुक्त महसूस करता है। डर, भय, शर्भ आदि आघात से निजात भी पाता है। इससे मनुष्य को सेक्स में पूर्णतया आनंद मिलता है और यह उसे तनाव रहित रखने में मदद करता है।

    अपनी कामुक ऊर्जा के परिवर्तनकारी शक्ति को उजागर करने से वह शरम नही करता और उसे अधिक आत्मा विश्वास लगने लगता है। इस मार्ग में मनुष्य कि समग्र दृष्टिकोण बदल जाती है। 

   उसको कामुकता और यौन एक दिव्य साधना जैसी लगने लगती है।

           *आखिर तांत्रिक सेक्स क्या है ?*

     तंत्र एक संस्कृत शब्द है। इद इसका हिंदी अनुवाद “बुनाई” है।

   _यह मनुष्य के भीतर एक मर्दाना और स्त्री शक्ति को एकजुट करने, स्वर्ग और पृथ्वी, पारगमन के साथ मानव शरीर, ध्रुवों को ढहने को संदर्भित करता है।_ 

  तंत्र का उद्देश्य स्वयं की अलग भावना से परे जीवन के साथ एक परमानंद मिलन की खोज करना है। 

           ‘पवित्र-लिंग और योनि-मंदिर तंत्र का एक पहलू है। इनको तंत्र द्वारा एक मुक्तिद्वार के रूप में देखा जाता है। 

    एक बार जब मनुष्य सीख जाता हैं कि इसका दोहन कैसे किया जाता है : तो वह अद्वैत अवस्था के लिए उस में ही अपने को डुबा देता है। 

   _तांत्रिक सेक्स मैं मनुष्य की यौन ऊर्जा, जुनून और इच्छाओं की आग को सही मार्ग में अग्रसर करके उस उर्जाको क्षय होने से रोककर शक्ति उर्जा मैं परिणत करता है।_ 

   साधारण यौनउर्जा की शक्तियाँ कभी कभी मनुष्य समालने में असमर्थ हो जाता है। तांत्रिक सेक्स के द्वारा इन उर्जा शक्तियों का संतुलन करने में आसानी होती है। सामंजस्य बिठाने में सरलता होती है। 

   _पारस्परिक यौन की चिंगारियाँ बिखरने एवं उड़ने लगती हैं तो तंत्र सेक्स उसे समेटकर मनुष्य को सशक्त, पारलौकिक, गहरा सुंदर, अनुभव देता है।_

         तंत्र सेक्स में पुरुष (परमात्मा) और स्त्री (प्रकृति) है। वे इस तरह एक दूसरे से  जुड़े होते है, जैसे दो शरीर एक ही हो। दोनों के बीच प्रेम अत्यंत सम्मान भाव और भक्ति से भरा हुआ होता है। इस तरह की आत्मीयता दोनों के बिच उच्चतम आत्म को उद्घाटित करती है और संबंध में प्यार भर देती है।

    तंत्र संभोग में समय धीमा हो जाता है और अंतर्ज्ञान फैलता जाता है। मनुष्य संभोग के चरम आनंद तक पहूच जाता है। ऐसा आनंद शरीर तल के भोग से प्राप्त करना असंभव है ।

  *तांत्रिक सेक्स कैसे काम करता है ?*

       तांत्रिक सेक्स में कामुक गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल होती है। दोनों में एक ही तरह की शारीरिक उत्तेजना जागृत नहीं होती है। 

      तांत्रिक सेक्स में अक्सर धीमे आलिंगनों, कोमल स्पर्श के साथ सूक्ष्म अहसास शरीर के भीतर मौजूद होना और भागीदार के शरीर के बीच ऊर्जा के संचलन पर ध्यान केंद्रित करना अति आवश्यक होता है। 

     यह सेक्स तंत्र ध्यान, भक्ति के आयाम पर टिका है । यदि मनुष्य आराम से संभोग में उतरता हैं तो वह संभोग में निरन्तरता देता है। इसमें मनुष्य संभोग में लम्बे समय तक स्थिर रह सकता है। आनंद की कोई सीमा नही रह जाती है।

   _साधारण संभोग से तांत्रिक संभोग जैसा दीर्ध आनंद और परम संतुष्टी प्राप्त नहीं की जा सकती। आम सेक्स में संभोग सुख के करीब पहुचने से पहले ही शक्ति क्षय हो जाती है और आनंद तक पहुंचना असंभव हो जाता है। तंत्र संभोग में मनुष्य अधिकतम  02 घण्टे तक टिकने की क्षमता रखता है।_

    यह मैथड स्त्री को यह ऐसा गहन आनंद देता है की जन्नत भी शर्माने लगती है। ऐसे परम-आनंद में डूबी स्त्री को भगवान की कमी तक महसूस नहीं होती। उसे मन-तन के रोग नहीं होते।

    हर स्त्री इस स्तर के आनंद के लिए बेताब रहती है। केवल वह स्त्री ऐसा नहीं चाहती जो जिन्दा-लाश यानी ठंडी हो, जिसका शरीर बिल्कुल ढीला या पत्थर हो चुका हो, जिसकी योनि सेंसिटिविटी खो चुकी हो। 

          _समग्र जागरूकता के साथ की जाने वाली स्वस्थ यौन क्रिया तांत्रिक सेक्स कहलाती है।_

    साधारण सेक्स में मनुष्य कच्चे, अपाहिज़, और पशुवत तरीके से सेक्स करता है। उस मनुष्य की सहज बुद्धि तक खत्म हो जाती है। वह केवल भोग के लिए अंधा होता चला जाता है।

     तांत्रिक सेक्स इससे विलकुल अलग होता है। इसमें मनुष्य चेतन होकर इसमें उतरता है मेडिटेटिव तरीके से। 

       _योनि-मन्दिर के अलावा नारी स्तन, पेड़ू, नितंब, होठ, जिह्वा, कर्णभाग उत्तेजना के मुख्य अंग होते हैं। तांत्रिक सेक्स विधी में यह अति अहम स्थान रौंदे नहीं जाते। इन स्थानों को स्वर्ग के फूल स्वीकार कर के दिव्य स्पर्श से सहलाया जाता है, सूंघा जाता है, इनकी खुसबू को पीया जाता है। इन्हें ईश्वर की भांति पूजा जाता है।_

    ऐसे में सहज ही स्त्री का श्वासवेग बढने लगता है। बढती श्वास यौन ऊर्जा शक्ति को बढाने मे सहायक होती है। फिर एक दूसरे की स्वास को अपने अंदर दौड़ाया जाता है कम से कम 30 मिनट तक। यह तरीका अद्वैत अवस्था की ओर ले जाता है।

  तात्रिक सेक्स में मनुष्य अपने पूरे शरीर में यौनऊर्जा को स्थानांतरित करने के लिए अपनी सांस और जागरूकता का उपयोग करते हैं। 

     _योनि- पेनिस के ट्चनेस के दौरान एक-दूसरे की गर्मी-सिहरन-फ़ीलिंग को टोटली महसूस करना, ऑब्जोर्व करना, एक दूसरे में समाना लाज़मी होता है। यह प्रयोग कम से कम 45- से 60 मिनट मांगता है। पेनिस को योनि में डालते ही या 10-15 मिनट में ही आप लूज़ हो गए तो…!_

     पश्चिमी देशों में पाया जाने वाला तंत्र वास्तव में नवतंत्र है। इसका विकास कुछेक वर्ष में ही हुआ है; जो अभी-अभी अस्तित्व में आया है। उनका इतिहास इतना पुराना नही है। भारतीय मेडिटेशन-तंत्र को ही वहां परिमार्जित किया गया है। उसको नया रूप दिया गया है।

    _हमारे शास्त्रीय तंत्र में विभिन्न जटिल और कठोर आध्यात्मिक मार्ग हैं, जो लक्ष्य के रूप में पूर्ण आध्यात्मिक जागृति या प्रबोधन का लक्ष्य रखते हैं।_

    इनमें शैववाद (शिव-पार्वती की संभोग क्रिया का दर्शन), तिब्बत का वज्रयान और बौद्ध मार्ग शामिल हैं। 

    इन रास्तों पर गंभीर अध्ययन, व्यक्तिगत समर्पण और ध्यान की जरूरत पड़ती है।

         इसके विपरीत पिछले 150 वर्षों में नीओतन्त्र का भी विकास हुआ है। इसका उद्देश्य भी ‘विशेष रूप से’ अधिक अंतरंगता का विकास और सेक्ससंबंध को शिखर देकर पूरा करना है। यह व्यक्ति के शरीर और भावनाओं का गहरा संबंध बनाता है। 

    _इस प्रकार संभोग सुख को गहराई से सोचने, इसमें उतरने और अनुभव करने के मार्ग में यह ध्यान-तंत्र अहम और लाभदायक है।_

            आधुनिक तांत्रिक संभोग-साधना में सब कुछ साइन्सटिफिक मेथड से में सिखाया जाता है जो अति उत्तम और फलदायक परिणाम देता है।

   _सिखाने का अर्थ यह नहीं कि ट्रेनर द्वारा अपने सामने कपल्स से प्रयोग यानी संभोग कराया जाता है। ऐसा नहीं है।_

   वह एक टीचर की तरह सूत्रों की व्याख्या करता है, आपको टच भी करके बताता है, लेकिन प्रयोग आप अपनी पत्नी/प्रेमिका या अपने पति/प्रेमी के साथ अकेले ही करते हैं। 

    अगले दिन जो प्रोग्रेसिव रिपोर्ट कपल्स “अलग- अलग प्रशिक्षक से के सामने आकर” उसे देते हैं, उसी के आधार पर वह उनके लिए अगला पैटर्न तय करता है।

       आप पत्नी या प्रेमिका को सच में प्यार करते हैं तो आपको समर्थ बनकर उसे तृप्ति का शिखर देना ही चाहिए। 

    _आप ऐसा नहीं करते हैं, तो उसे हम कोई सलाह नहीं दे सकते। वह क्या निर्णय लेती है : यह उसकी समझ पर आधारित उसका निजी मामला है।_

  【जिन्हें प्रयोग सीखना और पारंगत होना है, वे विथ-पार्टनर महज 15 दिन का समय हमें दें। ध्यान शिविर में सब निःशुल्क। होम सर्विस स- शुल्क】

Ramswaroop Mantri

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