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वेस्टर्न कोर्ट में लाडली मोहन निगम और मधु लिमये

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विवेक शुक्ला

दिल्ली यूनिवर्सिटी और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के बहुत सारे छात्र और अध्यापक 1980 और 1990   के दशकों में जनपथ स्थित वेस्टर्न कोर्ट हॉस्टल में पहुंचते थे. दरअसल उस दौर में यहां पर लाडली मोहन निगम और मधु लिमये  जैसे  समाजवादी विचारक और चिंतक रहा करते थे. लाड़ली जी सारी उम्र वेस्टर्न कोर्ट हॉस्टल के एक कमरे में रहते रहे.

 वेस्टर्न कोर्ट के दूसरे कोने में एक कमरे में मधु जी रहते थे. आज 8 जनवरी को उनकी पुण्य तिथि है! डीयू के पूर्व प्रफेसर डा. हरीश खन्ना, राजकुमार जैन जी भी वहां  दोनों से मिलने जाते थे .उम्र में बड़े होने के बावजूद उनके व्यवहार में बराबरी और मित्रता का भाव रहता था. हंसी मज़ाक भी होता रहता था. मधु जी के साथ उनकी पत्नी चम्पा जी भी रहती थीं! वो बॉम्बे यूनिवर्सिटी में अध्यापन कर चुकी थीं! वो ही सबको चाय बना कर पिलाया करती थीं! उनके घर में फ्रिज भी नहीं था!  गर्मियों में सुराही से सब पानी पीते थे! 

 मधु लिमये और निगम साहब की मित्र मंडली में छोटे बड़े सभी तरह की उम्र के लोग थे. महिला मित्र भी थीं.सब के प्रति समता का भाव रहता था, उसमें उनकी उम्र या अहम कहीं रुकावट नहीं थी. दोनों घुमक्कड़ प्रवृति के थे. निगम साहब एक छोटी सी पोटली में इलायची लोंग सुपारी रखते थे . कभी कभी मिलने वालों को देते थे. आपात काल में बड़ौदा डायनामाइट केस में जॉर्ज फर्नांडीस के साथ उनको भी अपराधी बनाया गया था पर वह भूमिगत हो गए. उनका देहांत जब हुआ तो दिल्ली के वेस्टर्न कोर्ट कमरे के बाहर दरी पर पड़ी थी. तब ही एक  सरकारी गाड़ी आईं ,साथ में एक दूसरी गाड़ी  जिसमें सुरक्षा कर्मी भी थे,वह भी आईं.  एक सज्जन उस में से उतरे और हाथ जोड़ कर आकर नीचे दरी पर बैठ गए. वह थे भारत की सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जे एस वर्मा जो शोक अभिव्यक्त करने आए थे.

पंडारा रोड में भी रहे लिमये जी

मधु लिमये के वेस्टर्न कोर्ट  के बाद पंडारा रोड शिफ्ट कर गए थे. बहुत सादगी के साथ कहते थे. वे जब सांसद नहीं रहे तो उन्हें सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी कोटे से पंडारा रोड में एक फ्लैट आवंटित कर दिया था. उसमें ही वे और उनकी पत्नी चंपा जी रहते रहे. वहां पर तमाम बुद्धिजीवी, लेखक,पत्रकार, राजनीतिक कार्यकर्ता मधु जी से विचार-विमर्श के लिए आते. बेशक उनके नाम पर सड़क वेस्टर्न कोर्ट या पंडारा रोड़ में होती तो बेहतर रहता. उनके फ्लैट में हज़ारों किताबें करीने से रखी थीं! उन्हें शास्त्रीय संगीत की भी गहरी समझ थी! उनके पास यहां समता संगठन से जुड़े भाई सुनील,  भाई जसवीर,  मदन लाल हिन्द भी आते थे! मधु जी बिहार को बिहार और बिहारी समाज की अच्छी समझ थी! वे वहां से लोक सभा के लिए भी निर्वाचित हुए थे! 

कह सकते हैं कि उनके दिल में बसता था बिहार! 

मधु लिमये मूल रूप से पुणे के थे!

 जब राष्ट्रीय राजनीति में उन्होंने क़दम रखा तो चुनाव लड़ने के लिए बिहार ही चुना! पहली बार वो 1964 में मुंगेर से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे में, सोशलिस्ट पार्टी और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी का विलय हुआ और यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी बनी थी! मधु जी ने 1967 के चुनावों में यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर मुंगेर से जीत हासिल की! हालाँकि, बाद में वो पार्टी से अलग हो गए! मधु  जी 1973  ने बिहार के बांका से चुनाव जीता!पर पंडारा रोड में रहने वाले लिमये जी के नाम पर सड़क का चाणक्यपुरी में होने का कोई मतलब समझ नहीं आता. 

नवभारत टाइम्स  में छपे लेख के अंश.

Ramswaroop Mantri

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