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तेंदुए की खोजबिन?

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शशिकांत गुप्ते

चिड़ियाघर या प्राणि उपवन (Zoological garden) वह संस्थान है जहाँ जीवित पशु पक्षियों को बहुत बड़ी संख्या में संग्रहीत कर रखा जाता है। लोग इन संग्रहित पशु पक्षियों को सुविधा और सुरक्षापूर्वक देख सकें इसकी भी व्यवस्था की जाती है। यहाँ उनके प्रजनन और चिकित्सा आदि की भी व्यवस्था होती है।
नाम चिड़ियाघर है, लेकिन यहाँ विभिन्न वन्य पशु और पक्षियों को भी रखा जाता है।इसीलिए इसे प्राणी संग्राहालय कहना उचित होगा। मानव बाकायदा टिकिट खरीद कर प्राणीसंग्रहालय में रखे पशु पक्षियों को देखने जातें हैं।
मध्यप्रेदश की व्यापारिक राजधानी के प्राणीसंग्रहालय से एक तेंदुआ भाग गया। युवा आयु का तेंदुआ है,जो प्राणीसंग्रहालय से भाग गया।
तेंदुआ विलाड प्रजाति का पशु होता है।मतलब बिल्ली के प्रजाति का पशु।वन्यप्राणियों पर अध्ययन करने वालों से पता चला है कि,इसके दौड़ने की गति 50 से 60 मिल प्रति धंटा होती है।

indore zoo Mysteriously missing leopard found at this place all logic  failed mpsn | रहस्यमयी तरीके से लापता हुआ तेंदुआ इस जगह मिला, सारे तर्क हुए  फेल | Hindi News, Madhya Pradesh


तेंदुआ भाग निकला।अपने यहाँ तो कैदी भी जेल से भाग जातें हैं।
तेंदुआ कितना भी खतरनाक पशु क्यों न हो मानव की तुलना में वह कम खतरनाक ही सिद्ध होगा।
चिडियाघर के सम्बंधित विभाग के लगभग चार दर्जन कर्मी तेन्दुओं को ढूंढ रहें हैं।
कैद से खूंखार अपराधी भाग जाए तो जन के साथ धन की भी हानि होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
तेंदुएं के भाग जाने से पालतू पशु जैसे गाय,बकरी,भैंस,मानव आदि की जान को ज्यादा खतरा है।
शायद तेंदुआ तो पकड़ में आ भी सकता है। कारण वह पशु है।भागकर जाएगा कहाँ? जंगल की ओर भागेगा। वह तेंदुआ है कोई फिल्मी गीदड़ नहीं हैं, जो स्वयं की हत्या करवाने के लिए शहर की ओर भाग कर आएगा?
तेंदुआ असली पशु है। उसने कोई तेन्दुओं की खाल नहीं पहनी है।
खाल पहनना एक कहावत है।
खाल मतलब कोई पोशाक ( Coustume) नहीं होता है?
यह सब नौटंकी सिर्फ फिल्मों में सम्भव है।
असली जिंदगी में तो बगैर खाल पहने सदेह, देश के धन को हड़प कर विदेश भागने में सफल हो जातें हैं।
अपने यहाँ बहुत सी कहावतें प्रचलित है।इन कहावतों में एक कहावत में भेड़िये की खाल का प्रयोग किया जाता है।
भेड़िये की एक कहावत का मानव लोगों को डराने के लिए उपयोग करता है। सिर्फ इतना भर चिल्लाता है कि, भेड़िया आया भेड़िया आया।
यह डराने वाला मानव भ्रमवश कभी स्वयं की डराने वाली कहावत का खुद ही शिकार हो जाता है।
बहरहाल समस्या है तेंदुए की जो भाग गया है।यह तेंदुआ यु आयु का है। तेंदुआ अकेला भागा है। प्राणीसंग्रहालय से भागा है।
जब भी कोई मानव कभी भागता है,किसी स्त्री को लेकर भागता है।धन लेकर भागता है।धोखा देकर भागता है। सुरक्षाकर्मियों और व्यवस्था की आँखों में धुलझोंककर भागता है।ऐसा कोई अपराध तेंदुआ नहीं कर सकता है।अंतः तेंदुआ पशु है।मानव नहीं है।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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