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संतानोत्पत्ति का मेडिकल-एस्ट्रोलॉजिकल उपाय 

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       डॉ. विकास मानव 

   मेरे पास एक पति पत्नी की लाइफ हिस्ट्री सास ने ऑनलाइन कंसल्टेशन के लिए भेजी। मैने इनालिसिस के बाद बताया कि इनको संतान नहीं हो रही इसलिए आप बाल गोपाल यज्ञ का आयोजन करें। यह काम किसी दक्ष और अव्यवसायिक विद्वान से करवाए। 

   यह किया उन्होंने, लेकिन दो साल तक संतान नहीं हुई. वे मेरे पास आए और कहा कि हमने तो बालगोपाल यज्ञ करा दिया पर कोई फल प्राप्त नहीं हुआ। तब मैने पूछा कि यज्ञ कैसे-कैसे करवाए, पूरा बताएं।

   उन्होंने बताया कि सारे रिश्तेदारों को बुलाया , कीर्तन मंडली को भी बुलाया।पंडित जी के घर से जलूस के साथ ग्रंथ भी सिर पर उठा कर लाया। मुश्किल से दो दिन की छुट्टी लेकर बेटा आया था। एक पहले दिन फिर एक आखरी दिन। बहू भी स्कूल में ड्यूटी के बाद पूरी कथा सुन लेती थी। सारा दिन कथा, कीर्तन, नाच गाना, हर रोज़ धाम का आयोजन सब कुछ विधि विधान के साथ संपन हुआ।

   यह सब सुन मुझे तो चक्कर आ गया। मैने कहा कि असली विधि विधान तो किया नहीं। वो बोले क्या। मैने कहा कि असली विधि विधान तो पति और पत्नी द्वारा होना था। आप के कीर्तन नाच गाने कथा सुनने से अगर बच्चा होता तो मैं यहीं नाच गा कर सबके बच्चे उत्पन कर देता।  

    इस यज्ञ के दौरान पति पत्नी को कुछ नियम पालन करने होते हैं। कथा , यज्ञ का आयोजन सिर्फ उन नियमों के साथ जीने के लिए प्रेरित करते हैं और पति पत्नी उन नियमों के लिए वचनबद्ध होते हैं। एक धार्मिक उत्सव का माहौल रहता है। जॉब से छुट्टी लेकर बैठे पति पत्नी तनाव से मुक्त रहते हैं एक आस्था और विश्वास बनता है मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की कमी दूर होती है। मन प्रसन्न चित्त रहता है। 

   पति धोती पहन कर रहता है जिससे टेस्टिस कूल डाउन रहती है और स्पर्म काउंट और क्वालिटी अच्छी होती है। पत्नी साड़ी पहन कर रहती है जिससे उसकी लोअर बॉडी पार्ट का तापमान नियंत्रित होता है। पौष्टिक और समय अनुसार खाना पीना होता है। पति नशे से दूर रहता है जिससे यौन शक्ति में सुधार होता है। 

  यह कथा यज्ञ पत्नी कि तिथि आने से पांच दिन बाद आयोजित किया जाता है. इसमें पहले कुछ दिन ब्रम्हचर्य का पालन करना होता है। इस यज्ञ का पूरा विधि विधान आधुनिक मेडिकल साइंस की विधियों के अनुरूप है। 

      पतिदेव जी कुछ मंगाने के बहाने से पत्नि को मेरी केबिन से बाहर भेजकर, मुझसे बोले : सर IVF टेक्निक तक तो सफल है नहीं. कुछ को चाहे लाभ होता हो, हज़ारों लोग लाखों रूपये बर्बाद करके भी खाली हाथ रह जाते हैं. आप ध्यान, यज्ञ, स्प्रिचुयलटी की बात करते हैं. बच्चा गोद लेना सही रहेगा, लेकिन मेरी कोई सुने तब ना.

    मैंने उनसे कहा : आपको ना तो मेरे पर ट्रस्ट हैं और ना तो पत्नि की खुशी से आपका कोई सरोकार है. आपको सिर्फ़ अपने स्वार्थ से मतलब है. बच्चा नहीं होने के लिए 99% जिम्मेदार पौरुष होता है, स्पर्म की क्वालिटी होती है. गोद ले लो बच्चा, कोई प्रॉब्लम नहीं. इसके लिए लोग आपकी इसलिए नहीं सुनते की बच्चे में आपका तो छोड़ो, आपकी पत्नि तक का कोई अंश नहीं रहेगा. आप मेरा बताया कोई उपाय भी मत अपनाइए. आप पत्नि को आज मेरे पास छोड़ दीजिए, कल ले जाना. वे प्रेग्नेंट हो जायेंगी. उनको इसके लिए कैसे रेडी करना है यह मेरा मैटर है. उनके साथ मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूंगा जिससे उनको कोई फिजिकली, हॉर्टली या मेंटली प्रॉब्लम हो. उलटे जो उनको आनंद का अनुभव होगा, वो ना कभी हुआ होगा और ना ही कभी हो सकता है.

 वे नहीं माने. खैर!

     इन्फेर्टिलिटी आज के समय में आधुनिक शैली में जीने वाले लोगों की एक भयानक समस्या बन चुकी है। शहरी क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से ज्यादा newly married couple इस समस्या से जूझ रहें है। 

इस टॉपिक पर ज्योतिषीय और मेडिकली फैक्ट के बेस पर मैं यह कहना चाहता हूं :

        1.  फीमेल का लोअर बॉडी temprature 12 वे से 19 वें दिन, माहवारी आने वाले दिन से नॉर्मल बॉडी temprature से 2 डिग्री ज्यादा रहना चाहिए। तभी उसका हार्मोनल साइकिल ठीक रहता है और फीमेल fertile होती है। 

   इसलिए स्त्रियों को बॉडी के लोअर पार्ट को ज्यादा ढक लपेट कर रखना चाहिए। तंग वस्त्र लोअर पार्ट में नहीं पहनने चाहिए। परन्तु आधुनिकता के इस दौर में उल्टा हो रहा है।

  अब सेक्सुअलिटी के कारण लड़कियों का हार्मोनल सिस्टम छोटी उम्र में ही बिगड़ जा रहा है। उपर से प्रोटीन डाइट कम खाने की वजह से , इस बिगड़े हार्मोनल सिस्टम की वजह से spider veins, अनियमित monthly cycle, low nitric oxide level, low blood circulation, stone, overy cysts, uterus, thiroid, low estrogen, बाल झडने की समस्याएं उत्पन हो रही हैं।

    आप किसी भी देश के पुराने culture में देखो, स्त्रियां लोअर बॉडी ड्रेस हमेशा ज्यादा पहनती थी।

       2. पुरषों के testis का टेंप्रेचर नॉर्मल बॉडी temprature से हमेशा 2 डिग्री कम रहना चाहिए। तभी स्पर्म क्वालिटी , count ठीक रहता है। टेस्टोस्टेरोन का लेवल ठीक रहता है।

     testis में तभी स्पर्म बनता है जब उनका टेंप्रेचर नॉर्मल बॉडी temprature से 2 डिग्री कम रहे। पुराने समय में आप किसी भी देश का ड्रेसिंग sense देख लो , पुरष हमेशा लोअर पार्ट में कम कपड़े और ढीले कपड़े पहनते थे।

    परंतु आजकल टाईट ड्रेस और सिंथेटिक अंडर गारमेंट पहनने से ये तापमान कम नहीं रह पाता। जिससे स्पर्म क्वालिटी, count ठीक नहीं रह पाता।

     टेस्टोस्टेरोन लेवल डाउन रहने से बॉडी मेटाबॉलिज्म गड़बड़ हो रहा है। जिससे इरेक्टाइल डिस्फक्शन की प्रॉब्लम छोटी उम्र में ही उत्पन हो रही है। यही समस्या बाद में cardiovascular problem उत्पन कर रही है।

3. ज्योतिष ग्रहों के अनुसार जब जीवन में संतान उत्पति के योग आते हैं। जब ऐसे योग बन रहे हों , उस समय क्या क्या करना चाहिए। यह भी ध्यान में रखना होगा.

4. जिस दिन उसकी पत्नी को डेट आए। उस दिन से स्वास्थ्य वर्धक, प्रोटीन युक्त भोजन शुरू कर देना चाहिए। समय समय पर अपनी testis को ठंडे पानी से धोता रहे, और पत्नी से अगले 12 दिन कोई संबंध ना बनाए, ना ही किसी और तरह से स्पर्म waste ना करे। 

  जब पत्नी का 13 वां दिन हो, उस दिन से रोज संबध बनाए 17 वें दिन तक। सेक्स ऐसा होना चाहिए की पत्नि आपके पेनिस से के प्रयोग से डिस्चार्ज हो, आपसे पहले. 

   गर्भ धारण करने की सबसे ज्यादा संभावना 14 वें दिन होती है। इसलिए शायरी में स्त्री की सुंदरता का बखान करने के लिए ” चौदहवीं का चांद” का प्रयोग किया जाता है। क्योंकि 14वें दिन स्त्री बहुत कामुक और सुंदर लगती है। हां संबध बनाने के बाद स्त्री को कम से कम दो घंटे सोए रहना चाहिए बिना कोई साफ सफाई किए।

5. शायद अब समझ में आया कि स्मार्ट लड़के को cool और सुंदर लड़की को hot क्यों कहते हैं। सोशल मीडिया पर तो cool और hot शब्दों का इस्तेमाल नई पीढ़ी खूब करती है पर आजकल इनकी ड्रेस sense करती उल्टा है। 

यानी लड़के hot लड़कियां cool हो रही है। तो infertility तो बढ़ेगी ही।

6. तभी तो बजुर्ग लोग लड़कियों को अगर टांगे खोल कर बैठे देख कर उनको डांट देते थे। और अगर लड़का टांगे सिकोड कर बैठा देख कर भी उसे डांट देते थे कि कैसे लड़कियों कि तरह से बैठा है।

7. हमारे रीति रिवाज , संस्कारों में इन चीजों का ध्यान रखा जाता था। सनातन संस्कृति को भुला कर आज की पीढ़ी आईवीआर सेंटर में पैसा फूंकने को मजबूर हो चुकी है। हमारे मेडिकल सिस्टम में कोई डॉक्टर भी इन बातों को नहीं बताता।

 हमारा मेडिकल सिस्टम सिर्फ दवा मार्केट को बढ़ावा देता है। आईवीआर का bussiness फल फूल रहा है। ज्योतिष, सनातन संस्कृति को झुठलाने में पूरा मार्केटिंग सिस्टम लगा हुआ है।

8. ये सारी बातें प्लस टू से लेकर BSc के biology के सिलेबस में पढ़ाई जाती है। पर पढ़ने, पढ़ाने वाले लोग सिर्फ इस examination में नंबर लाने के लिए इस्तेमाल करते हैं , फिर भूल जाते हैं। कि इनका हमारे जीवन में क्या इस्तेमाल है।

अब कुछ उपाय लिख रहा हूं जिनसे आप अपनी यौन शक्ति को कायम रख सकते हैं :

*पुरषों के लिए :*

ज्योतिष, शिवपुराण, शारीरिक उपनिषद, मॉडर्न मेडिकल साइंस के अनुसार पुरष के स्वास्थ्य का राज उसके जननांग में छुपा है। ( Bacterial or viral बीमारियों को छोड़ कर) एक पुरष को क्या करना चाहिए जिससे वह हमेशा खुश रहे और डिप्रेशन व टेंशन ना हो। यह मै स्टेप वाइज लिख रहा हूं।

1. घर में बिना अंडरवियर के रहे और loose कपड़े पहने। बाहर हो तो पुराने जमाने की तरह वाले अंडरवियर पहने।

     2. जब भी urine जाए अपने balls या testis पर ठंडा पानी लगाए। लेकिन ध्यान रखे पानी की नमी सूखती रहे। इसीलिए loose ड्रेस पहने।

3. Testis या बॉल का तापमान नॉर्मल बॉडी तापमान से 2 डिग्री कम बनाए रखे।

 4. गुप्तांग के बाल ना काटे। क्योंकि प्रकृति ने ये बाल जननांग का तापमान नियंत्रित करने के लिए दिए हैं।

*स्त्रियों के लिए :*

   स्त्रियों की सभी बीमारियों का (non bacterial और non viral) बीमारियों की शुरुआत उनके हार्मोनल सिस्टम बिगड़ने से होती है। यह दुराचार के कारण और सेक्स में तृप्ति नहीं मिलने के कारण होता है.      

    utrus,ओवरी cyst etc. सब का इलाज ज्योतिष शास्त्र, शिव पुराण, शारीरिक उपनिषद, मॉडर्न मेडिकल साइंस में क्या है इस बारे में मैंने पिछले कई आर्टिकल में लिखा है। इनको विस्तार से बताने के बजाए में सिर्फ स्टेप वाइज cure बता रहा हूं।

1. जो भी अन नेचुरल है वह गरल है यानी ज़हर. कई से सेक्स नहीं करवाएं. पेनिस को मुँह या गुदा में नहीं लें. योनि में पेनिस के अलावा कुछ भी नहीं डालें. प्राइवेट पार्ट के बाल ना कटें. उसे दुनिया को नहीं दिखना होता की फैशन के कारण आपकी मज़बूरी है। 

प्रकृति ने योनि एरिया के ये बाल जननांग का तापमान नियंत्रित करने के लिए दिए हैं।

   2. बॉडी के लोअर पार्ट का तापमान 2 डिग्री ज्यादा रखने के लिए लोअर बॉडी में ज्यादा कपड़े पहने।

 3. अपने जननांग को हमेशा गरम पानी से ही धोएं। ठंडा पानी भूल कर भी ना लगाएं।

4. यदि डिप्रेशन या टेंशन हो तो जननांग को गर्म पानी के सेक दें। नाभि से नीचे का हिस्सा जिसके पीछे यूट्रस और ओवरी होती है उसको गर्म रखे। नाभि से थोड़ा नीचे पेट कि दोनों साइड में जहां ओवरी होती है उसकी पाइप जिसे फिलोपाइन ट्यूब कहते हैं जो सेंटर में स्थित यूट्रस तक आती हैं।उनकी हल्की मसाज करे। वेजिना और rectum के बीच लगभग दो इंच का जो स्थान होता है उसे पेरिनम area कहते हैं।इस स्थान पर दिमाग से आने वाली बहुत से न्यूरोलॉजिकल nerves आती हैं।इसका हलका मसाज करे पर बालों के उखड़ने का ध्यान रखें। इस एरिया की मस्साज करने से एग बिल्कुल सही समय पर रिलीज़ होता है। यह बात मेडिकल साइंस और हमारे उपनिषदों में साफ लिखी है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह बात नॉर्मल डिलीवरी के लिए बहुत जरूरी होती है।

5. कोई भी हेल्थ प्रॉब्लम हो, वास्तविक खुशी के लिए कुछ भी चाहिए हो, हमारी निःशुल्क सेवा ले सकती हैं. हमारे शिविर में भी और अपने घर में भी.

Ramswaroop Mantri

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