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मेरा कोना -विवेक मेहता 

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व्यंग्य – किस्सा मुल्ला नसरुद्दीन का

अपुन को सूत्रों से बड़ी परेशानी होती है। जब अपुन पढ़ता था तब भी रासायनिक सूत्रों को याद रखने और समीकरण को बैलेंस करने में पसीने आ जाते थे। अभी भी समीकरण बैलेंस नहीं होती। पर्युषण शुरू होने वाले हैं तो आगम सूत्र का पठन भी होने वाला है। आगम सूत्र से याद आया कि मुंबई के कबूतरखाने पर किसी की तिरछी नजर हो गई। वहां कबूतरों को दाना डालने पर पाबंदी का नोटिस लग गया। दाना डालने वालों पर जुर्माना, पुलिस केस होने लगें। नाम हाईकोर्ट और पालिका का आ रहा । जब लोग हाईकोर्ट में जा रहे हैं तो कोर्ट बोल रहा है कि हमने कोई आदेश नहीं दिया। पालिका के पास जा रहे हैं तो जवाब मिल रहा है कि हमने कोई लिखित आदेश नहीं दिया इस कारण आदेश वापस लेने का सवाल ही नहीं होता है! बिना आदेशों के भी काम हो रहा है तो फिर जरूरत ही क्या है आदेशों की ऐसा सूत्र बता रहा है। सूत्र तो बताते हैं कि टोल नाका, न्यायालय, कार्यालय, अफसर, पुलिस भी नकली सामने आने लगी हैं मेक इन इंडिया में। 

           एक समय में अकेले चुनाव आयुक्त शेषन ने लोगों के मन में चुनाव आयोग की निष्पक्षता का विश्वास पैदा किया था। अब लोग उसे केंचुआ कहने लगे। अपुन को तो वह केंचुआ नहीं लगता। गैंडे जैसी मोटी चमड़ी जिस पर किसी बात का असर नहीं हो वह केंचुआ कैसे हो सकता है! जब जवाब सूत्रों के माध्यम से ही दिया जा सकता है या काम निपट सकता है तो फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस क्या करना? बीत गया जमाना प्रेस कॉन्फ्रेंस का। अब तो एक तरफा मन की बात का युग है। उसी के साथ आगे बढ़ते हुए विश्व का सिरमौर बने रहना है। ये जो चुनाव आयोग पर आरोपों के बम फोड़े जा रहे हैं उस पर अपुन के सूत्र ने एक किस्सा सुनाया। सूत्र ने कहा किस्सा समझ में आ जाए तो सब सच्चाई समझ में आ सकती है। अपुन की समझ में तो आया नहीं। शायद आपकी समझ में आ जाए इसलिए किस्सा प्रस्तुत है- 

       बुढ़ापे में मुल्ला नसरुद्दीन को अपने गांव में थानेदारी मिल गई। उसके पास पहला केस पहुंचा। एक आदमी रिपोर्ट लिखाने आया। वह केवल अंडरवियर में था। मुल्ला ने पूछा- क्या हुआ भाई? क्या समस्या है ? वह बोला- आपके गांव में लोगों ने मुझे लूट लिया। मुल्ला ने फिर पूछा- क्या लूटा। वह बोला-कार,घड़ी, पैसे, जेवर, कपड़े सभी तो लूट लिया। मुल्ला ने कहा- जहां तक मैं देख रहा हूं तुम अंडरवियर पहने हो। रिपोर्ट लिखाने आया आदमी बोला- हां बस अंडरवियर ही उन्होंने छोड़ दी। थानेदार मुल्ला नसरुद्दीन बोला- वी नेवर डू एनीथिंग हाफहार्टली एंड पार्शियली। हमारे गांव में कोई भी आदमी अधुरा काम नहीं करता।  वह काम बेमन से नहीं करता। तुम झूठ बोल रहे हो। हमारे गांव में यदि किसीने तुम्हें लूटा होता तो तुम अंडरवियर में भी नहीं होते। तुम्हें किसी और गांव में लूटा होगा। तुम मेरे गांव को बदनाम करना चाहते हो। तुम्हें तो जेल में बंद कर देना चाहिए। यहां कोई एफआईआर दर्ज नहीं होगी। जाना है तो कोर्ट में जाओ और एफिडेविट दो। गनीमत रही कि उस नंगे आदमी को मन मारकर मुल्ला नसरुद्दीन ने थाने से बाहर निकलने के लिए आजाद छोड़ दिया।

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Ramswaroop Mantri

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