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अब आधुनिकतम् हथियारों से लैश तालिबान आतंकी कैसे परास्त होंगे ?

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निर्मल कुमार शर्मा,

भारतीय समाज में दुष्ट व्यक्तियों के किए कुकृत्यों के परिणाम स्वरूप आए खराब नतीजों पर एक कहावत बहुत ही लोकप्रिय और प्रचलित है कि ‘बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से खायो ?’यह एक बहुत ही सारगर्भित व युगों-युगों से समाज के प्रबुद्ध चिंतकों द्वारा व्यवहार की कसौटी पर परखकर बनाई गई कहावत प्रतीत होती है,क्योंकि इसमें बहुत ही सारगर्भित बात कही गई है। दुष्टों के संबंध में इसी प्रकार इसी के समानार्थी एक और कहावत भी बहुत मशहूर है कि ‘जैसा बोओगे वही काटोगे ‘ उक्त दोनों सारगर्भित कहावतें आज के वर्तमान समय में अमेरिका जैसे देश पर बहुत सटीक बैठतीं हैं। यह वही अमेरिका है,जो वास्तव में आज विश्व का सबसे बड़ा मानवहंता,राष्ट्रहंता,संस्कृति और सभ्यता हंता आतंकवादी देश है। इसके लिए दुनिया के अन्य देशों के करोड़ों-अरबों बच्चों,बड़ों,बुजुर्गों और महिलाओं के जीने और मरने से कोई मतलब ही नहीं है,इसके लिए अपना राष्ट्रहित और अपने देश के लोगों का स्वार्थ ही सर्वोपरि है ! इसने दुनिया भर में सैकड़ों देशों के अरबों लोगों को भूखों तिल-तिलकर मरने को मजबूर कर रखा है ! उदाहरणार्थ जापान, वियतनाम,क्यूबा,उत्तर कोरिया,ईरान,इराक, लिबिया,अफगानिस्तान आदि बहुत से देश हैं। जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में तो यह आतंकवादी देश मनुष्यों पर परमाण्विक उर्जा का टेस्टिंग करने के लिए सीधे उन पर परमाणु बम ही गिराकर एक साथ ही लाखों लोगों को मौत के घाट उतार दिया ! उस भयावह परमाणु हमले के रेडिएशन से वहाँ की मानवता अभी भी बुरी तरह त्रस्त है,मर रही है !
लेकिन इस लेख के प्रारंभ में उल्लिखित मुहावरे अब अफगानिस्तान जैसे दुनिया के सबसे गरीब और फटेहाल देश में अब चरितार्थ हो रही है। मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने पिछले 20 सालों में अपनी अफगानिस्तान की कठपुतली सरकार को जो अरबों-खरबों रूपये कीमत के अत्याधुनिक व बेहद घातक हथियारों के जखीरे की आपूर्ति किया था,वे सभी हथियार अब उसकी जान के दुश्मन बने,उसी के मानसपुत्र,दुर्दांत व अब अजेय बने आतंकी संगठन तालिबानियों के कब्जे में आ गया है ! इन अत्यंत घातक,अत्यंत सटीक और मारक क्षमता वाले एक बहुत बड़े हथियारों का अमरिकी जखीरा जो दरिंदे और मानवहंता तालिबानियों के कब्जे में चला गया है ! अमेरिकी हथियारों के अलावे सोवियत संघ रूस और चीन निर्मित अत्यंत घातक हथियारों को हथियाने में भी इन तालिबानी दरिंदों को सफलता मिल गई है ! संक्षेप में एक नजर डाल लीजिए,पता चल जाएगा कि अब अफगानिस्तान के साथ लगे देशों के साथ दुनिया भर की मानवता अब कितनी असुरक्षित होकर रह गई है !
वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति के ही बयान के अनुसार उन्होंने तालिबानी आतंकवादियों से लड़ने के लिए अपने अत्यंत दक्ष अमेरिकी सेना के प्रशिक्षकों से लगभग 3 लाख अफगानी सुरक्षाकर्मियों को प्रशिक्षित किए थे,आज वे सभी 3 लाख अफगानी सुरक्षाकर्मी तालिबान आतंकवादियों के सामने घुटने टेक दिए हैं,आत्मसमर्पण कर दिए हैं,जाहिर है उन सभी 3 लाख अफगानी सुरक्षाकर्मियों के सभी हथियार अब तालिबान लड़ाकों के कब्जे में चला गया ! इसके अतिरिक्त अतिउन्नत और अचूक निशाने वाले घातक हथियारों में 51आर्म्ड फाइटिंग,8 चीनी एंटी एयरक्राफ्ट गन,23 लड़ाकू एयरक्राफ्ट्स तथा हेलीकॉप्टर्स,6 ड्रोन्स,1980 मिलिट्री वाहन,6ए-29 लाइट अटैक हेलीकॉप्टर्स,174 हाई मोबिलिटी मल्टीपर्पज व्हील्ड व्हीकल,2.75 मिलीमीटर के 10000 हाई एक्सप्लोसिव रॉकेट्स,0.50 कैलिबर के 9 लाख राउंड्स और 7.62 मिलीमीटर के 20 लाख 15 हजार बुलेट्स। इसके अतिरिक्त 61 टैंक और 60,82 और 120 मिमी के मोर्टार्स,चीन निर्मित 76 मिमी की 3 डिवीजनल बंदूकें और 132 मिलीमीटर की 35 हॉवित्जर तोपें ! इतना बड़ा जखीरा तो अफगानिस्तान के चारों तरफ स्थित देशों में कई देशों के पास भी नहीं है ! कल्पना करिए अमेरिका जैसे महाशक्ति को अभी तक दुर्दांत तालिबानी आतंकवादी पुराने,खटारा ट्रकों पर सवार होकर, पुराने हथियारों से ही दुम दबाकर भागने पर मजबूर कर दिए ! अब तो उक्तवर्णित आधुनिकतम् हथियारों से वे सुसज्जित हैं,तब तो दक्षिण एशिया में वे एक अपराजेय ताकत बन गए हैं ! आज जब अमेरिका अफगानिस्तान के लगभग साढ़े तीन करोड़ गरीब, बदहाल,डरे,सहमें लोगों को उनके हाल पर छोड़कर भाग खड़ा हुआ है,उस स्थिति में अब तालिबान अधिकृत अफगानिस्तान के आसपास के छोटे-छोटे और गरीब देशों यथा मध्य एशिया के तमाम देशों,भारत,इरान आदि देशों के लोगों की क्या स्थिति होगी,यह कल्पना से परे है। आखिर इन सभी भयावह और खौफनाक हालात पैदा करने का एकमात्र जिम्मेदार देश अमेरिका जैसे देश के कर्णधारों की दुर्नीतियाँ ही तो जिम्मेदार हैं !

-निर्मल कुमार शर्मा, ‘सशक्त,निर्भीक व स्वतंत्र लेखन ‘ , गाजियाबाद, उप्र

Ramswaroop Mantri

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