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पंचकोशीय शरीर और आत्मतत्व 

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       डॉ. विकास मानव 

हमारे शरीर के पाँच कोश :

१-अन्नमय
२-प्राणमय
३-मनोमय
४-विज्ञानमय
५-आनन्दमय
अन्नमय शरीर हमारा मुख्य शरीर या स्थूल शरीर है। प्राणमय शरीर हमारा सूक्ष्म शरीर है जिसमें metabolism= उपापचय होता है। इसके दो आयाम हैं : उपचय=anabolism और अपचय =catabolism. उपापचय ही प्राण का क्रियान्वयन है। हमारे शरीर को चलाने के लिए है हमारा चित्त है। चित्त के तीन अंश हैं :
१-मन
२-बुद्धि
३-अहंकार
मन को हम सिर्फ लक्षणों के आधार पर तय नहीं कर सकते। मनोमय शरीर का आधार है मन। मन के छह आयाम हैं :
१-अनुभूति =अहसास Perception. इसके लक्षण हैं :
ध्वनि, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध.
Perception अनुभूति के विकृति से होता है भ्रम = illusion और विभ्रम hallucination.
मन का पहला आयाम है अनुभूति. अनुभूति =अहसास =Perception =फीलिंग. इसी के विकृति से होता है भ्रम= illusion और विभ्रम =hallucination.
किसी वस्तु को और कुछ समझ लिया है तो वह भ्रम= illusion है. जैसे रस्सी को साँप समझ लेना भ्रम है। संस्कृत साहित्य में इसे रज्जवो सर्पभ्रमः कहते हैं.
बिना किसी वस्तु के कुछ और समझ लेना विभ्रम =hallucination है. जैसे schizophrenia बीमारी में होता है। भ्रम मन का उपज नहीं है। भ्रम तो मन की अनुभूतियों की विकृति से होता है। ये हैं :
२-आवेग = Emotions = Affect
३-आचरण = Behaviour
४- स्मृति = Memory
५- चिन्तन = Thought
६- तृप्ति = Satiety
तृप्ति का सम्बन्ध भूख, प्यास, कामेच्छा (libido) , ध्यानेच्छा, जिज्ञासा, जिजीविषा, रिरंसा (जीने की इच्छा) इत्यादि इच्छा से है। इसी के विपरीत भाव को राजयोग में “विपर्यय” कहा गयाहै।
चित्त का दूसरा अंश है बुद्धि। बुद्धि=Intelligence. विज्ञानमय शरीर का आधार है बुद्धि। बुद्धि के चार आयाम हैं :
१-भावपूर्ण बुद्धि Anstract thinking या Abstract Intelligence
इसके छह उपभाग हैं :
क्रियात्मक बुद्धि, यान्त्रिक बुद्धि, मौखिक या Verbal बुद्धि, सांख्यिक arithmetic बुद्धि, शैक्षणिक या educational बुद्धि और विश्लेषक या analytical बुद्धि।
२- अन्तर्दृष्टि = insight
३- विकल्प = alternative
४- निर्भ्रान्ति = Lack of Delusion

चित्त का तीसरा अंश है अहंकार. आनन्दमय शरीर का आधार है अहंकार। अहंकार के छह आयाम हैं :
१-अस्तित्व Existence
२- अस्मिता Ego
३-जागृति =जागरण,जागरुकता और निद्रा Arousal
४- न्याय Justice
५- प्रतिक्रिया Reaction
६- प्रमाण Proof

आत्मा इन सब से अलग है। अणु परमाणु का गठन एक मीटर के परार्धतम लम्बाई यानी करोड़वाँ हिस्से के करोड़वें हिस्सा है; जबकि कोशिका की लम्बाई एक मीटर की मात्र दस लाखवें हिस्से के बराबर है। आत्मा के लिये ब्रह्मसूत्र के द्वितीय अध्याय में सूत्र कहता है :
“ज्योतिदर्शनाच्च” यानि आत्मा photon के बराबर है यानी परमाणु के भी करोड़वें हिस्से का करोड़वाँ हिस्सा के बराबर है। इस तरह परमाणु से भी सूक्ष्म है आत्मा।

Ramswaroop Mantri

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